महाराष्ट्र में अवैध अप्रवासियों और ड्रग्स के खिलाफ एआई उपकरणों का इस्तेमाल: सीएम फडणवीस
मुंबई, 30 मार्च (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों का पता लगाने के लिए डेटा-आधारित उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग करने की योजना की घोषणा की।
उन्होंने विशेष रूप से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) जैसे संस्थानों के साथ पार्टनरशिप का उल्लेख किया, ताकि एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरण विकसित किया जा सके और अधिकारियों को वैध निवासियों और शहर में वैध दस्तावेजों के बिना रहने वालों के बीच अंतर करने में मदद कर सके। परीक्षण पूरा होने के बाद इन उपकरणों को तैनात किया जाएगा।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री फडणवीस ने मादक पदार्थों के खिलाफ मेजर वॉर की घोषणा की, जिसमें विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक महाराष्ट्र भर के परिसरों को अवैध पदार्थों से मुक्त रखने के लिए एक नई रणनीति विकसित कर रहे हैं।
गृह विभाग भी संभाल रहे मुख्यमंत्री फडणवीस मुंबई में आयोजित द्विवार्षिक राज्य पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन की अध्यक्षता करने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने राज्य की सुरक्षा के लिए एक व्यापक कार्यसूची प्रस्तुत की, जिसमें नक्सलवाद का खात्मा, पुलिस व्यवस्था में एआई का समावेश और मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ी कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
उन्होंने पूर्णतः डिजिटल कानूनी प्रक्रिया के लिए सरकार के प्रयासों की घोषणा की और पुलिस महानिदेशक को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने से लेकर आरोप पत्र दाखिल करने तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करने के लिए छह महीने की समय सीमा दी। साक्ष्यों की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
आपराधिक जांच विभाग को पिछले चार से पांच वर्षों के उन मामलों का विश्लेषण करने का कार्य सौंपा गया है जिनमें दोषसिद्धि नहीं हुई है। उन्होंने आगे कहा कि इसका उद्देश्य खामियों की पहचान करना और राज्य की दोषसिद्धि दर को वर्तमान 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 95 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ने राज्य से नक्सलवाद को लगभग पूरी तरह से समाप्त करने में महाराष्ट्र पुलिस के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले 244 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
--आईएएनएस
एमएस/
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Jharkhand News: इस जिले में खुलेगा झारखंड का पहला रेल नीर प्लांट, 30 स्टेशनों तक होगी आपूर्ति; रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
Jharkhand News: रांची जिले के चान्हो प्रखंड के बरहे में रेल नीर बोतलिंग प्लांट लगाने की योजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है. भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने इसके लिए झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जीआईएडीए) से अंतिम स्वीकृति मांगी है. जानकारी के अनुसार, इस परियोजना की निविदा प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और इसमें केवल एक ही बिडर शामिल हुआ है. जैसे ही अंतिम मंजूरी मिलती है, आईआरसीटीसी को जमीन आवंटित कर दी जाएगी और निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा.
बरहे का पानी सबसे बेहतर
इस प्लांट के लिए जगह चयन में पानी की गुणवत्ता को सबसे अहम माना गया. बरहे समेत अन्य स्थानों पर टीडीएस और हाइड्रोलिक जांच की गई, जिसमें बरहे का पानी सबसे बेहतर पाया गया. यही कारण है कि रातू के टुंडुल और ओरमांझी जैसे क्षेत्रों को पीछे छोड़ते हुए बरहे को अंतिम रूप से चुना गया.
लागत और उत्पादन
आपको बता दें कि करीब 12.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट के लिए लगभग दो एकड़ जमीन प्रस्तावित है. प्लांट शुरू होने के बाद यहां से प्रतिदिन लगभग 6000 कार्टन रेल नीर का उत्पादन होगा. मांग बढ़ने पर इसे 9500 और फिर 12500 कार्टन तक बढ़ाया जा सकता है.
बरहे से रांची की दूरी करीब 45 किलोमीटर है, जहां से रेलवे स्टेशनों तक पानी की सप्लाई की जाएगी. अभी रांची और हटिया स्टेशनों पर रोजाना करीब 2000 बोतलों की खपत होती है, लेकिन इस प्लांट के शुरू होने के बाद पानी की आपूर्ति और भी बेहतर और नियमित हो जाएगी.
30 स्टेशनों तक होगी आपूर्ति
इस परियोजना के तहत रांची, धनबाद और जमशेदपुर सहित लगभग 30 रेलवे स्टेशनों को रेल नीर से जोड़ा जाएगा. इससे यात्रियों को हर जगह एक जैसी गुणवत्ता वाला शुद्ध पानी मिलेगा, जिससे रेलवे की छवि भी बेहतर होगी.
रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
इस प्लांट के शुरू होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. संचालन के लिए वेंडर नियुक्त किए जाएंगे और मैनपावर एजेंसियों के जरिए लोगों को काम मिलेगा. साथ ही, रेल नीर की बिक्री से रेलवे की आय में भी बढ़ोतरी होगी और बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम होगी.
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