DU Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी यूजी 2nd CSAS Allocation 25 जुलाई को होगा जारी, इस डेट तक ले पाएंगे दाखिला
DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने CSAS UG 2026 के पहले चरण में एडमिशन का आंकड़ा जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, 21 जुलाई तक 61,932 उम्मीदवारों ने अपनी सीट स्वीकार करने के बाद प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली है। पिछले वर्ष पहले राउंड के बाद यह संख्या 45,316 थी, जबकि इस बार इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पहले राउंड में 93 हजार से ज्यादा सीटें ऑफर
CSAS UG 2026 के पहले राउंड में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 67 कॉलेजों के 221 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में 93 हजार से अधिक सीटें आवंटित की थीं। सीटों का आवंटन CUET UG 2026 स्कोर, श्रेणी (Category) और छात्रों द्वारा भरी गई कॉलेज व कोर्स प्राथमिकताओं के आधार पर किया गया।
25 जुलाई को जारी होगा राउंड-2 अलॉटमेंट
विश्वविद्यालय के अनुसार, CSAS UG Round-2 Seat Allocation 25 जुलाई 2026 को जारी किया जाएगा। जिन छात्रों ने पहले राउंड में सीट स्वीकार की है, वे अपग्रेड विकल्प का लाभ भी ले सकते हैं। यदि किसी छात्र को बेहतर विकल्प मिलता है, तो उसे नई सीट के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
महत्वपूर्ण तारीखें
राउंड-2 सीट अलॉटमेंट: 25 जुलाई 2026
राउंड-2 एडमिशन प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तिथि: 26 जुलाई 2026 (रात 11:59 बजे तक)
एडमिशन फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 28 जुलाई 2026
नया शैक्षणिक सत्र शुरू: 28 जुलाई 2026
छात्रों को क्या करना होगा?
राउंड-2 में सीट मिलने वाले उम्मीदवारों को CSAS पोर्टल पर लॉगिन कर अपना अलॉटमेंट देखना होगा। इसके बाद निर्धारित समय के भीतर दस्तावेज सत्यापन, सीट स्वीकार करने और फीस जमा करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सभी औपचारिकताएं पूरी करने वाले छात्र 28 जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में शामिल हो सकेंगे।
Car Care Tips: गाड़ी के सस्पेंशन में आई खराबी, 5 बातों को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी
Car Care Tips: कार का सस्पेंशन सिस्टम आपकी गाड़ी की सेफ्टी, कंफर्ट और बेहतर कंट्रोल की सबसे अहम कड़ी होता है। यही सिस्टम खराब सड़कों पर झटकों को कम करता है, टायरों की सड़क पर मजबूत पकड़ बनाए रखता है और मोड़ पर कार को संतुलित रखता है। लेकिन समय के साथ शॉक एब्जॉर्बर, स्ट्रट्स, स्प्रिंग्स और दूसरे सस्पेंशन पार्ट्स घिसने लगते हैं। यदि इन्हें समय पर रिपेयर या बदलवाया न जाए, तो इसका असर न केवल ड्राइविंग कम्फर्ट पर पड़ता है, बल्कि ब्रेकिंग, हैंडलिंग और टायरों की उम्र भी घट सकती है।
अक्सर लोग शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बाद में बड़ी और महंगी मरम्मत की नौबत आ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि आप उन संकेतों को समय रहते पहचान लें, जो बताते हैं कि आपकी कार के सस्पेंशन सिस्टम को जांच या रिपेयर की जरूरत है।
1. सड़क पर ज्यादा उछाल और झटके
अगर आपकी कार गड्ढों या खराब सड़क पर पहले की तुलना में ज्यादा उछलने लगी है या हर छोटे झटके का असर केबिन तक महसूस होने लगा है, तो यह खराब शॉक एब्जॉर्बर या स्ट्रट्स का संकेत हो सकता है। अच्छी स्थिति में सस्पेंशन सड़क की ऊंच-नीच को आसानी से संभाल लेता है। राइड क्वालिटी खराब होने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए।
2. टायरों का असमान घिसना
अगर किसी एक टायर का किनारा ज्यादा घिस रहा है या टायर असमान तरीके से घिस रहे हैं, तो यह सस्पेंशन या व्हील अलाइनमेंट में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। खराब बुशिंग या सस्पेंशन मिसअलाइनमेंट के कारण कार का वजन बराबर नहीं बंटता, जिससे टायर जल्दी खराब होने लगते हैं।
3. गड्ढों पर अजीब आवाजें आना
स्पीड ब्रेकर या गड्ढों से गुजरते समय अगर कार से क्लंक, क्लैटर या स्क्वीक जैसी आवाजें सुनाई देती हैं, तो बॉल जॉइंट, कंट्रोल आर्म या स्वे बार लिंक जैसे सस्पेंशन पार्ट्स में खराबी हो सकती है। ऐसी आवाजों को नजरअंदाज करने पर पार्ट्स पूरी तरह खराब हो सकते हैं।
4. कार का एक तरफ खिंचना
यदि सीधी सड़क पर चलाते समय या ब्रेक लगाने पर कार बार-बार बाईं या दाईं ओर खिंचती है, तो यह कमजोर स्ट्रट, स्प्रिंग या असंतुलित सस्पेंशन का संकेत है। इससे गाड़ी की हैंडलिंग प्रभावित होती है और अचानक लेन बदलने के दौरान दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
5. ऑयल लीकेज या दिखाई देने वाला डैमेज
अगर शॉक एब्जॉर्बर से ऑयल रिसता हुआ दिखाई दे या सस्पेंशन के आसपास ग्रीस जमा हो, तो यह स्पष्ट संकेत है कि सिस्टम में खराबी आ चुकी है। इसके अलावा यदि कोई पार्ट मुड़ा हुआ, जंग लगा या फटा हुआ नजर आए, तो उसे तुरंत बदलवाना चाहिए।
समय पर कराएं जांच
इन संकेतों को समय रहते पहचानकर आप न केवल बड़ी खराबी और महंगे रिपेयर बिल से बच सकते हैं, बल्कि अपनी कार की सुरक्षा और परफॉर्मेंस भी लंबे समय तक बेहतर बनाए रख सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर 10,000 से 15,000 किलोमीटर पर सस्पेंशन सिस्टम की प्रोफेशनल जांच कराना एक अच्छी आदत है।
(मंजू कुमारी)
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