Kal Ka Mausam: आसमान से बरसेगी आफत! अगले 5 दिनों तक देश के कई राज्यों में बारिश और ओले गिरने की चेतावनी
भारत के कई हिस्सों में इस सप्ताह मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है. मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. इसका सबसे ज्यादा असर 30 मार्च और 4 अप्रैल 2026 को देखने को मिलेगा. कश्मीर घाटी में आज छिटपुट भारी बारिश और बर्फबारी की भी आशंका है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है.
उत्तर भारत में ओलावृष्टि और तेज हवाओं का अलर्ट
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 30 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में ओले गिर सकते हैं. पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 30 और 31 मार्च को हल्की से मध्यम बारिश के साथ 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. इसके बाद 2 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसके कारण 3 से 5 अप्रैल के बीच एक बार फिर उत्तर भारत के राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला शुरू होगा.
पूर्वी और मध्य भारत में भी दिखेगा असर
मौसम का यह बदलाव सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहेगा. 31 मार्च को मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों में भी ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है. बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 31 मार्च को तेज आंधी आ सकती है, जिसकी रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ओडिशा में भी 30 मार्च से 3 अप्रैल के बीच छिटपुट बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं. छत्तीसगढ़ और विदर्भ के इलाकों में भी 1 अप्रैल तक ओले गिरने का अनुमान है.
पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत का हाल
पूर्वोत्तर भारत में इस पूरे सप्ताह व्यापक बारिश और बिजली गिरने की संभावना है. अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 31 मार्च और 1 अप्रैल को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. वहीं, दक्षिण भारत की बात करें तो केरल में 31 मार्च से 1 अप्रैल के दौरान भारी बारिश हो सकती है. कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी बिजली गिरने और हल्की बारिश के साथ ओले गिरने की स्थिति बन सकती है.
तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर
पिछले 24 घंटों में देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 36 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया. सबसे अधिक तापमान महाराष्ट्र के अकोला में 41.4 डिग्री सेल्सियस रहा. हालांकि, आने वाले दिनों में बारिश के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में 2 से 4 डिग्री की गिरावट आ सकती है. इसके बाद 31 मार्च से 3 अप्रैल के बीच तापमान फिर से बढ़ेगा, लेकिन 4 और 5 अप्रैल को होने वाली बारिश के बाद एक बार फिर गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
सक्रिय मौसम प्रणालियां और चेतावनी
वर्तमान में कई चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) सक्रिय हैं. एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र पंजाब और हरियाणा के ऊपर बना हुआ है, जबकि दूसरा उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर स्थित है. इसके अलावा, बिहार से लेकर मणिपुर तक एक ट्रफ लाइन भी गुजर रही है. इन प्रणालियों के कारण ही देश के अलग-अलग हिस्सों में नमी पहुंच रही है और मौसम अस्थिर बना हुआ है. मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और बिजली गिरने की स्थिति में पेड़ों के नीचे शरण न लें.
संसद में गरजे गृह मंत्री अमित शाह, बोले- 1970 से इंदिरा जी ने जिस विचारधारा को स्वीकारा उसने देश को जख्म दिए
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा के भीतर नक्सलवाद के मुद्दे पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की बहुत खुशी है कि एक बहुत खास घटनाक्रम, जो लंबे समय तक चला, उस पर आज देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में चर्चा हो रही है. शाह ने सदन को जानकारी दी कि बस्तर जैसे इलाकों से अब नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और वहां विकास की नई बयार बह रही है. उन्होंने स्पीकर का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने 1970 से लेकर 2026 तक की घटनाओं की श्रृंखला पर चर्चा करने की अनुमति दी, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बहुत गहरा महत्व रखती है.
बस्तर में विकास की नई मुहिम
गृह मंत्री ने बस्तर के बदलते हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि अब वहां के हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चल रही है. इसके साथ ही सरकार वहां राशन की दुकानें खोलने और गैस के चूल्हे वितरित करने पर पूरा जोर दे रही है. उन्होंने उन लोगों पर सीधा सवाल दागा जो अब तक नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे. शाह ने पूछा कि जो काम अब हो रहे हैं, वे पिछले कई दशकों में क्यों नहीं हुए? उन्होंने साफ किया कि सरकार की मंशा अब स्पष्ट है और बस्तर का कोना-कोना मुख्यधारा से जुड़ रहा है.
विचारधारा पर तीखा हमला
अमित शाह ने सदन में कहा कि नक्सलवाद का असली कारण केवल विकास की मांग नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक खतरनाक विचारधारा है. उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि इस विचारधारा को 1970 के दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वीकार कर लिया था. शाह के अनुसार, राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के समीकरणों के चलते इसे बढ़ावा मिला, जिसके बाद यह पूरे देश में फैलता चला गया. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थ के कारण एक ऐसी विचारधारा को पनपने दिया गया जो लोकतंत्र के खिलाफ थी.
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