भारत में AI और डीपफेक कंटेंट पर सरकार के नए सख्त नियम 20 फरवरी से होंगे लागू, अब 3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक पोस्ट, लेबलिंग हुई अनिवार्य
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक टेक्नोलॉजी के जरिए बनाए जा रहे भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए जारी की गई नई गाइडलाइंस के तहत अब नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है। ये नए नियम 20 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं, जिनका मकसद डिजिटल स्पेस में धोखाधड़ी, उत्पीड़न और गलत सूचना के प्रसार को रोकना है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डीपफेक और सिंथेटिक मीडिया का इस्तेमाल गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए तेजी से बढ़ रहा है। नए बदलावों का सीधा असर Facebook, X (पूर्व में Twitter), Instagram जैसे तमाम सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज पर पड़ेगा।
लेबलिंग और पहचान अब सबसे जरूरी
नए नियमों में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव लेबलिंग को लेकर किया गया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि AI द्वारा बनाए गए, एडिट किए गए या किसी भी तरह से बदले गए कंटेंट पर एक स्थायी और स्पष्ट रूप से दिखने वाला लेबल लगाना अनिवार्य होगा। यह लेबल ऐसा होना चाहिए जिसे हटाया या उसके साथ छेड़छाड़ न की जा सके।
इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट में एक यूनिक आइडेंटिफायर भी जोड़ना होगा। इस कदम का उद्देश्य सिंथेटिक या मैनिपुलेटेड कंटेंट के सोर्स का पता लगाना (ट्रेस करना) आसान बनाना है।
घटाई गई कंटेंट हटाने की समय-सीमा
आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है। पहले, सोशल मीडिया कंपनियों को किसी गैर-कानूनी या आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत मिलने पर उसे हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था।
लेकिन अब, कानून प्रवर्तन एजेंसी के आदेश या यूजर की शिकायत के बाद कुछ विशेष मामलों में इस समय-सीमा को घटाकर मात्र 3 घंटे कर दिया गया है। यह बदलाव प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा जवाबदेह बनाएगा।
यूजर को भी देनी होगी जानकारी
अब जिम्मेदारी सिर्फ प्लेटफॉर्म्स की ही नहीं, बल्कि कंटेंट अपलोड करने वाले यूजर्स की भी होगी। नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर कंटेंट अपलोड करते समय यह घोषित करे कि उसकी सामग्री AI टूल्स की मदद से बनाई गई है या उसमें बदलाव किया गया है।
यही नहीं, प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स द्वारा की गई इस घोषणा को वेरिफाई करने के लिए भी जरूरी टूल्स तैनात करने होंगे। अगर AI से बने कंटेंट का इस्तेमाल किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि के लिए किया जाता है, तो उसे अन्य अवैध कंटेंट की तरह ही माना जाएगा और उस पर सख्त कार्रवाई होगी। इन नियमों को 10 फरवरी को अधिसूचित किया गया था।
8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! इस दिन से बढ़कर आएगी सैलरी, सरकार ने संसद में खुद दिया जवाब
8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति स्पष्ट की है। समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने सरकार से पूछा कि आयोग का काम कहां तक पहुंचा है और कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी को लेकर अंतिम फैसला कब तक आएगा।
इस पर वित्त मंत्रालय की ओर से राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और यह निर्धारित नियमों के अनुसार अपना काम कर रहा है।
18 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपेगा आयोग
सरकार ने संसद में बताया कि 8वें वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय मांगा है। इसी अवधि के भीतर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप देगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि आयोग कर्मचारियों और संबंधित पक्षों से सुझाव लेकर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। नियमों के तहत आयोग हर चरण की जानकारी सरकार को सार्वजनिक रूप से देने के लिए बाध्य नहीं है।
सांसद ने पूछा था ये सवाल
सपा सांसद जावेद अली खान ने सरकार से जानना चाहा था कि आयोग का काम किस चरण में है? अब तक कितने कर्मचारियों से सुझाव लिए गए हैं? अंतिम रिपोर्ट सरकार को कब सौंपी जाएगी? सरकार ने जवाब में कहा कि आयोग स्वतंत्र रूप से अपनी प्रक्रिया के अनुसार कार्य कर रहा है।
कर्मचारी संगठन ने क्या कहा?
सरकार के जवाब के बाद AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि आयोग समय से पहले अपनी रिपोर्ट सौंप देता है, तो जनवरी 2026 से प्रभावी वेतन संशोधन को लागू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकती है। उन्होंने आयोग से कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित में रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने की अपील की।
आयोग की बैठकें लगातार जारी
8वें वेतन आयोग की कार्यवाही लगातार आगे बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार, पहले चरण की बैठक 10 जुलाई को कोलकाता में संपन्न हो चुकी है।
दूसरे चरण की बैठक 7 अगस्त को दिल्ली में प्रस्तावित है। इसके बाद सितंबर में चेन्नई में भी आयोग की बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों के दौरान विभिन्न पक्षों से सुझाव लेकर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
लाखों कर्मचारियों की निगाहें आयोग की रिपोर्ट पर
देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। संसद में सरकार के ताजा बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि आयोग अपनी निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। अब सभी की नजरें आगामी बैठकों और अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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