कचरा नहीं खजाना है पपीते का छिलका! डालते ही मुरझाए पौधे हो जाएंगे हरे-भरे
हम अक्सर रसोई में फल काटने के बाद उनके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं। खासकर पपीते के छिलके, जिन्हें लोग बिना सोचे समझे कूड़ेदान में डाल देते हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि यही छिलके आपके सूखे और कमजोर पौधों को दोबारा हरा-भरा बना सकते हैं?
आजकल लोग अपने पौधों के लिए महंगे केमिकल फर्टिलाइजर खरीदते हैं, लेकिन घर में मौजूद साधारण चीजों से भी उतनी ही असरदार खाद बनाई जा सकती है। पपीते के छिलके ऐसा ही एक आसान और सस्ता उपाय हैं, जो आपके गार्डन की हालत बदल सकते हैं।
पपीते के छिलके क्यों हैं पौधों के लिए फायदेमंद
पपीते के छिलकों में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम। ये सभी तत्व पौधों की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी होते हैं। जब ये छिलके मिट्टी में मिलते हैं, तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ जाती है। इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनमें नई जान आ जाती है। खासतौर पर जो पौधे मुरझा रहे होते हैं, उनमें यह खाद बहुत जल्दी असर दिखाती है।
पपीते के छिलकों से लिक्विड फर्टिलाइजर कैसे बनाएं
अगर आप जल्दी असर चाहती हैं, तो पपीते के छिलकों से लिक्विड फर्टिलाइजर बनाना सबसे अच्छा तरीका है। हम इसे बनाने के लिए सबसे पहले पपीते के ताजे छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं। इसके बाद इन्हें एक बाल्टी या जार में डालकर पानी भर देते हैं। अब इस मिश्रण को ढंककर 2 से 3 दिन तक छायादार जगह पर छोड़ देते हैं।
कुछ दिन बाद जब यह घोल तैयार हो जाता है, तो हम इसे छान लेते हैं और बराबर मात्रा में सादा पानी मिलाकर इस्तेमाल करते हैं। यह तरल खाद पौधों की जड़ों में डालने पर बहुत जल्दी असर दिखाती है।
लिक्विड खाद का इस्तेमाल कैसे करें
जब यह खाद तैयार हो जाए, तो इसे सीधे पौधों की जड़ों में डालना चाहिए। यह खाद नाइट्रोजन और पोटेशियम का अच्छा स्रोत होती है, जिससे पौधों की पत्तियां हरी और चमकदार हो जाती हैं। अगर आपके पौधे कमजोर हो गए हैं, तो यह उपाय उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
पपीते के छिलकों से सूखी खाद कैसे बनाएं
अगर आप बार-बार खाद बनाने की परेशानी से बचना चाहती हैं, तो पपीते के छिलकों की सूखी खाद भी बना सकती हैं। हम इसके लिए छिलकों को धूप में अच्छे से सुखाते हैं, जब तक वे पूरी तरह सख्त न हो जाएं। इसके बाद इन्हें मिक्सी में पीसकर बारीक पाउडर बना लिया जाता है। यह पाउडर लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
सूखी खाद का सही उपयोग कैसे करें
इस पाउडर को महीने में एक या दो बार पौधों की मिट्टी में मिलाना चाहिए। जब यह धीरे-धीरे मिट्टी में घुलता है, तो पौधों को लगातार पोषण मिलता रहता है। खासकर फूलों वाले पौधों जैसे गुलाब, गुड़हल और मोगरे के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है।
केमिकल फर्टिलाइजर से बेहतर क्यों है यह तरीका
आजकल बाजार में मिलने वाले फर्टिलाइजर महंगे होने के साथ-साथ कई बार मिट्टी को नुकसान भी पहुंचाते हैं। पपीते के छिलकों से बनी खाद पूरी तरह प्राकृतिक होती है और इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है। यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है और पौधों के लिए भी ज्यादा फायदेमंद।
Telegram पर सरकार का सख्त एक्शन, पाइरेटेड कंटेंट हटाने के लिए दी 15 दिन की मोहलत
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप में हाल ही में एक नया फीचर यूजरनेम शुरू किया था। जिसके बाद से हर जगह इसकी चर्चा हो रही थी। यूजरनेम पर कई सारे सवाल उठ रहे थे। जिसके बाद सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी। व्हाट्सएप के बाद अब सरकार ने टेलीग्राम को भी नोटिस जारी कर दिया है।
भारत में ऑनलाइन प्राइवेसी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब मैसेजिंग प्लेटफार्म टेलीग्राम के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर प्लेटफॉर्म को अपनी एंटी-पाइरेसी व्यवस्था को मजबूत करने और इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
Telegram को सरकार का आदेश
सरकार का कहना है कि टेलीग्राम पर बड़ी संख्या में पाइरेटेड फिल्में, कॉपीराइट कंटेंट और ओटीटी कंटेंट शेयर किया जा रहे हैं। जिससे फिल्म इंडस्ट्री और क्रिएटर इकोनॉमी को नुकसान हो रहा है। प्लेटफॉर्म को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वह पाइरेटेड फिल्मों और कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाले ऑडियो वीडियो कंटेंट की पहचान कर उनकी रिपोर्टिंग करने और उन तक पहुंच रोकने और हटाने के लिए कोई मजबूत तरीका तैयार करें। सरकार का कहना है कि केवल शिकायत मिलने के बाद कंटेंट हटाना ही पर्याप्त नहीं है। प्लेटफॉर्म को खुद भी इस तरह के कंटेंट की पहचान करने और समय रहते उसे हटाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
सरकार ने उन यूजर्स नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है जो बार-बार इस तरह का कंटेंट साझा करते हैं। इसमें पर्सनल अकाउंट से लेकर ग्रुप, चैनल, बॉट, एडमिन और उनसे जुड़े कई नेटवर्क शामिल है। सरकार का मकसद ऐसे पूरे नेटवर्क को खत्म करना है जो फिल्म और वेब सीरीज की पाइरेटेड कॉपी लोगों तक पहुंचाता है।
मांगी गई ये जानकारी
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से टेलीग्राम से Grievance Redressal सिस्टम की पूरी जानकारी भी मांगी गई है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि पाइरेटेड कंटेंट की शिकायत असली निर्माता द्वारा कैसे दर्ज कराई जा सकती है और शिकायत पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।
15 दिन में मांगी रिपोर्ट
सरकार ने 15 दिनों के भीतर एक डिटेल एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने के निर्देश जारी किए हैं। इस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि कंटेंट की पहचान कर उन्हें रोकने और हटाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। अगर तय समय के अंदर रिपोर्ट नहीं दी जाती है तो मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
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