इंद्रधनुष सा खूबसूरत और रंगीन नजारा, क्या है ग्लोरी?
नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। प्रकृति की खूबसूरती नदियों, पहाड़ों तक सीमित नहीं हैं। ये खूबसूरती पानी की बूंद से लेकर बादलों तक के रूप में फैले हुए हैं। साल 2012 में प्रकृति की ऐसी ही खूबसूरती अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के सैटेलाइट टेरा में कैद हुई। प्रशांत महासागर के ऊपर आसमान में एक ऐसा खूबसूरत और दुर्लभ नजारा देखने को मिला जो देखने में इंद्रधनुष जैसा लगता है। वैज्ञानिकों ने इस नेचर ब्यूटी को नाम दिया ग्लोरी।
नासा के टेरा उपग्रह ने 21 जून 2012 को इस आश्चर्यजनक ऑप्टिकल घटना की तस्वीर कैद की। ग्लोरी जिसे स्ट्रैटोक्यूम्यलस स्काई की पतली परत में देखा जा सकता है।
वैज्ञानिक विस्तार से बताते हैं कि ग्लोरी क्या है और इसके पीछे का विज्ञान क्या है? ग्लोरी एक खास प्रकार की ऑप्टिकल घटना है जो आमतौर पर धुंध, कोहरे या पतले बादलों के सामने रंगीन संकेंद्रित छल्लों के रूप में दिखाई देती है। यह तब बनती है जब बादलों में मौजूद छोटी-छोटी पानी की बूंदें सूरज की रोशनी को वापस सूरज की ओर बिखेर देती हैं। यह प्रक्रिया पश्च विवर्तन या बैकवर्ड डिफरेक्शन कहलाती है। सूरज की रोशनी बादलों की बूंदों से टकराती है और पीछे की ओर मुड़कर वापस आती है, जिससे रंगीन छल्ले बन जाते हैं। सबसे सुंदर और चमकदार ग्लोरी तब बनती है, जब बादलों की बूंदों का आकार 10 से 30 माइक्रोन के बीच हो और सभी बूंदें लगभग एक समान हों।
देखने में ग्लोरी इंद्रधनुष जैसी लगती है, लेकिन दोनों के बनने का तरीका पूरी तरह अलग है। इंद्रधनुष प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन से बनता है, जबकि ग्लोरी विवर्तन की वजह से बनती है। ग्लोरी हमेशा सूरज के ठीक विपरीत दिशा में दिखाई देती है, जिसे एंटी-सोलर पॉइंट कहते हैं।
जमीन या हवाई जहाज से ग्लोरी गोलाकार छल्लों के रूप में दिखती है। हालांकि नासा के मोडिज उपकरण से पृथ्वी को स्कैन किया गया, इसलिए ग्लोरी यहां रंगीन पट्टियों के दो लंबे बैंड के रूप में दिखाई दी थी। इन पट्टियों के बीच में ही एंटी-सोलर पॉइंट स्थित है। ग्लोरी को साफ दिखने के लिए सफेद बादलों की पृष्ठभूमि जरूरी होती है। बादल सफेद इसलिए दिखते हैं क्योंकि उनमें मौजूद बूंदें सूरज की रोशनी को बार-बार बिखेरती हैं। अगर सफेद बादल न हों तो ग्लोरी बन ही नहीं सकती।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दक्षिण कोरिया में 80 फीसदी से ज्यादा किशोर-युवा एआई की वजह से परेशान, ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार
सोल, 30 मार्च (आईएएनएस)। दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के साथ इससे संबंधित खतरा भी दोगुनी रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। दक्षिण कोरिया में सोमवार को एक सर्वे किया गया। इस सर्वे में पता चला है कि दक्षिण कोरिया के 80 फीसदी से ज्यादा किशोरों और युवाओं ने ऑनलाइन उत्पीड़न पर चिंता जताई है। इसमें जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का गलत इस्तेमाल शामिल है, जैसे डीपफेक वीडियो बनाना और गलत जानकारी फैलाना।
कोरिया मीडिया एंड कम्युनिकेशंस कमीशन (केएमसीसी) ने पिछले साल सितंबर से नवंबर के बीच किशोरों और युवाओं पर एक सर्वे किया था। इसके मुताबिक, 89.4 फीसदी किशोरों ने कहा कि वे एआई से होने वाली साइबर हिंसा की गंभीरता को समझते हैं। इसके साथ ही 87.6 फीसदी युवाओं ने भी इस बात को स्वीकार किया।
योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सर्वे चौथी क्लास के एलिमेंट्री स्कूल से लेकर तीसरे साल के हाई स्कूल तक के 9,296 स्टूडेंट्स और 19 से 69 साल के 7,521 बड़ों पर किया गया था।
जवाब देने वालों ने एआई टूल्स से कॉन्टेंट बनाने में आसानी को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया, जबकि बड़ों ने एआई से बने मटेरियल से बार-बार नुकसान होने के खतरे को लेकर डर जताया।
सर्वे में यह भी पता चला कि 2025 में 42.3 फीसदी किशोरों ने किसी न किसी तरह का साइबर उत्पीड़न झेला, जो एक साल पहले के मुकाबले 0.5 फीसदी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ों के लिए यह आंकड़ा 15.8 फीसदी रहा, जो इसी समय में 2.3 फीसदी ज्यादा है।
चैनल के हिसाब से, किशोरों ने कहा कि वे ज्यादातर टेक्स्ट मैसेज और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर उत्पीड़न के संपर्क में आए, जबकि बड़ों ने बताया कि उन्हें ज्यादातर टेक्स्ट मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए ऐसा ही अनुभव हुआ।
किशोरों और युवाओं दोनों के लिए, ऑनलाइन उत्पीड़न करने वालों में सबसे ज्यादा अजनबी थे, उसके बाद दोस्त थे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि केएमसीसी के चेयरमैन किम जोंग-चियोल ने कहा, साइबर उत्पीड़न सिर्फ ऑनलाइन नैतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो लोगों की इज्जत को नुकसान पहुंचा सकता है और संविधान में दिए गए खुशी के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म के सही तरीके से इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश करेगी।
--आईएएनएस
केके/एएस
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