एक ही होटल में स्पॉट हुए मोहम्मद सिराज और माहिरा, सालभर पहले डेटिंग से किया था इंकार, अब खुल गई पोल?
Mahira Sharma-Mohammed Siraj Dating Rumours: इस समय पूरे देश में आईपीएल (IPL 2026) की धूम देखने को मिल रही है. ऐसे में गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) के मोहम्मद सिराज को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल, बिग बॉस 13 फेम और एक्ट्रेस माहिरा शर्मा संग मोहम्मद की अफेयर की खबरों ने सालभर बाद फिर से तूल पकड़ लिया है. चलिए जानते हैं, क्यों फिर से उड़ रही इनके अफेयर की खबरें.
एक होटल में स्पॉट हुए माहिरा-सिराज
दरअसल, सोशल मीडिया पर माहिरा शर्मा और क्रिकेटर सिराज के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं. जिसमें दोनों को एक ही रेस्टोरेंट में स्पॉट किया है. इस दौरान माहिरा ने अपना चेहरा छिपाती भी दिखीं. दोनों के जो वीडियो सामने आए हैं, उसमें हूबहू एक ही जैसे रेस्टोरेंट हैं. वहीं, रेस्टोरेंट के बाहर भी अलग-अलग दोनों को स्पॉट किया गया. इसके बाद से ही फैंस ये दावा करने लगे कि दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं और सीक्रेटली साथ में क्वालिटी टाइम स्पेंड करने होटल में पहुंचे थे.
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डेट कर रहे, या फिर है को-इंसिडेंस?
बता दें, एक ही जगह पर सेलिब्रिटीज का स्पॉट होना आम बात है. लेकिन जब दो पॉपुलर चेहरे हों और वो भी उनके अफेयर की चर्चाएं हो तो ये बात कहानी बन जाती है. वहीं, माहिरा शर्मा और सिराज के वायरल वीडियो में दिलचस्प बात ये है कि दोनों ने साथ में कोई पब्लिक इंटरैक्शन नहीं दिखाया. कैमरे के सामने आने से दोनों बचते नजर आए. लेकिन दोनों की टाइमिंग इतनी सटीक थी कि इत्तेफाक पर लोग सवाल उठाने लगे हैं.
पिछले साल तोड़ी थी चुप्पी
बता दें, पिछले साल इसी महीने दोनों की अफेयर की खबरें सामने आई थी, जिसके बाद दोनों स्टार्स ने पोस्ट शेयर कर इन उफवाहों का खंडन किया था. माहिरा ने पोस्ट में लिखा था- ''अफवाह फैलाना बंद करें. मैं किसी को डेट नहीं कर रही हूं.' वहीं, क्रिकेटर मोहम्मद सिराज ने भी स्टोरी में लिखा था- 'मैं पैपराजी से रिक्वेस्ट करता हूं कि मुझे लेकर सवाल पूछना बंद करें. ये पूरी तरह से झूठ और बेसेलस है. मुझे उम्मीद है कि ये सब खत्म हो जाएगा.'
कैसे शुरू हुई थी डेटिंग की अफवाह?
बता दें, साल 2024 में दोनों ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो किया. दोनों के पोस्ट्स पर लाइक्स कमेंट्स को फैंस ने नोटिस किया और इसके बाद से ही इनके अफेयर की खबरें उड़ने लगी थी. . दोनों ने पोस्ट शेयर कर तो अफवाहों को झूठा करार दिया था. वहीं, माहिरा ने एक इंटरव्यू में भी कहा था कि वो सिंगल हैं. वहीं, एक बार फिर से दोनों के अफेयर ने तूल पकड़ लिया है. हालांकि अभी तक दोनों ने लेटेस्ट वीडियो पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है. सारी अफवाहें बस सोशल मीडिया और पब्लिक स्पॉटिंग पर ही आधारित हैं.
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ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच दुनिया को इंटरनेट ब्लैक आउट का खतरा? भारत पर भी पड़ सकता है असर
नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस भीषण संघर्ष का असर इंटरनेट केबल लाइन या सबमरीन केबल्स पर भी पड़ सकता है। अगर इस संघर्ष में इंटरनेट केबल्स को निशाना बनाया जाता है तो पूरी दुनिया एक तरीके से रुक जाएगी। दरअसल, आज के दौर में दुनिया के सभी देश पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर हैं। इंटरनेट की वजह से दुनिया का एक कोना दूसरे कोने से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अगर हमलों में सबमरीन केबल्स को निशाना बनाया जाता है, तो इससे होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा।
आइए जानते हैं कि सबमरीन केबल्स का इंटरनेशनल रूट कौन-कौन सा है और होर्मुज स्ट्रेट में ताजा स्थिति का इस पर क्या असर हो सकता है। अगर सबमरीन केबल्स कट होते हैं, तो उन्हें वापस से शुरू करने में कितना समय लगता है? दुनिया में लगभग 95-97 फीसदी इंटरनेट की सप्लाई इन्हीं सबमरीन केबल्स के जरिए होती है। अगर संघर्ष और तेज होता है और इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत सहित कई देशों में इंटरनेट की रफ्तार बहुत कम हो सकती है या कुछ क्षेत्रों में पूरी तरह ठप भी हो सकती है। इंटरनेट ठप होने से बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, ई-कॉमर्स, क्लाउड सर्विसेज और एआई हब्स पर सीधा असर पड़ेगा। इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऐसी चोट मिलेगी, जिससे उबरने में लंबा वक्त लगेगा।
इन इंटरनेट केबल्स का रूट तीन प्रमुख महासागर, प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागर से होते हुए गुजरती है। इनमें सबसे अहम रूट लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट का है।
दरअसल, हिंद महासागर में सबमरीन केबल्स के होर्मुज स्ट्रेट के रूट से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 15 से 30 फीसदी तक का इंटरनेट सप्लाई होता है। सीमीवी-6, 2अफ्रीका (मेटा/फेसबुक) और ब्लू रमन (गूगल का प्रोजेक्ट) इसी रूट के जरिए भारत और यूरोप को जोड़ते हैं। 2अफ्रीका (मेटा/फेसबुक) दुनिया का सबसे लंबा सबमरीन केबल सिस्टम (45,000 किमी) है। इस प्रोजेक्ट का खास हिस्सा पूरा हो चुका है। हालांकि, हूतियों के हमले और असुरक्षा के कारण पर्शियन गल्फ और लाल सागर में प्रोजेक्ट का आगे का काम रुका हुआ है। ब्लू रमन प्रोजेक्ट का ज्यादातर हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन लाल सागर के रूट में काम रुका है।
सीमवी-6, 21,700 किमी लंबी केबल सिंगापुर से फ्रांस तक बिछाई जा रही है। भारत में भारती एयरटेल इसके मुख्य पार्टनर्स में से एक है। भारती एयरटेल ने चेन्नई और मुंबई में इस केबल लाइन की लैंडिंग पूरी की है।
हिंद महासागर में रिलायंस जियो का प्रोजेक्ट काम कर रहा है। रिलायंस जियो भारत-एशिया-एक्सप्रेस (आईएएक्स) और इंडिया-यूरोप-एक्सप्रेस (आईईएक्स) जैसे प्रोजेक्ट इस रूट में हैं। यह केबल लाइन पूर्व में सिंगापुर और पश्चिम में यूरोप की ओर बिछाई जा रही है। रिलायंस जियो आईईएक्स को इस तरह से तैयार कर रहा है, ताकि लाल सागर में किसी भी तरह की परेशानी आने पर ट्रैफिक को अन्य रास्तों पर डायवर्ट किया जा सके।
अटलांटिक महासागर में मौजूद केबल लाइन अमेरिका और यूरोप के बीच एक अहम कड़ी है। यूरोप और यूएस के बीच यह सबसे व्यस्त रूट है। इस रूट में 1858 में दुनिया की पहली ट्रांसअटलांटिक केबल बिछाई गई थी। इस रूट में एमएआरईए और एमिटी, गूगल के नूवेम जैसे प्रोजेक्ट हैं। इनकी क्षमता को बढ़ाने के लिए अभी काम हो रहा है।
इसके अलावा प्रशांत महासागर में मौजूद इंटरनेट लाइन केबल्स अमेरिका और पूर्वी एशिया के लिए अहम हैं। यह रूट अमेरिका को जापान, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे पूर्वी एशियाई देशों से जोड़ता है। जापान और अमेरिका के बीच इस रूट से फॉस्टर नाम की लाइन केबल मौजूद है, जो दोनों देशों को जोड़ता है। पैसिफिक कनेक्ट इनिशिएटिव (गूगल) प्रोजेक्ट के जरिए इस रूट में 1 अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा है। इसमें प्रोआ और तैहेई जैसे नए केबल्स पर काम चल रहा है।
इसके अलावा इको और बिफ्रॉस्ट (मेटा/गूगल) के प्रोजेक्ट भी यहां हैं। ये केबल्स अमेरिका को सीधे इंडोनेशिया और सिंगापुर से जोड़ेंगे। पहली बार दक्षिण-पूर्वी एशिया डायरेक्ट अमेरिका से जुड़ेगा। हवाईकी नुई के जरिए ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका के बीच डाटा क्षमता को कई गुना बढ़ाने पर काम चल रहा है।
वर्तमान समय में जो तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं, इसका सबसे ज्यादा असर लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट के रूट में होने वाला है। लाल सागर, एशिया और यूरोप के लिए सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी है और यहां से लगभग 17 बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण केबल्स गुजरते हैं। मौजूदा संघर्ष की स्थिति में सबमरीन केबल से संबंधित कई प्रोजेक्ट पर विराम लग गया है।
ताजा मामले में फरवरी 2024 में हूती के हमलों की वजह से लाल सागर में सीकॉम, टीजीएन, और एएई-1 जैसी 4 प्रमुख केबल कट गई थी। इसकी वजह से एशिया और यूरोप के बीच का 25 फीसदी इंटरनेट ट्रैफिक प्रभावित हुआ। इन केबल्स को पूरी तरह ठीक होने में लगभग 5 महीने (जुलाई 2024 तक) लग गए। युद्ध क्षेत्र होने के कारण बीमा कंपनियों और मरम्मत करने वाले जहाजों (केबल शिप) ने वहां जाने से मना कर दिया था। परमिट मिलने और सुरक्षा सुनिश्चित करने में महीनों लग गए।
इससे पहले जनवरी 2022 में टोंगा ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से प्रशांत महासागर में टोंगा देश को दुनिया से जोड़ने वाली एकमात्र सबमरीन केबल कट गई। पूरा देश पूरी तरह से इंटरनेट ब्लैकआउट में चला गया। केबल को फिर से जोड़ने में 5 हफ्ते (37 दिन) का समय लगा। समुद्र के नीचे जमा ज्वालामुखी की राख और मलबे के कारण केबल के सिरों को ढूंढना मुश्किल था।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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