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हरियाणा मंडियों में सरसों खरीद की धीमी शुरुआत, किसानों को करना पड़ा लंबा इंतजार- अनुराग ढांडा
Haryana News: हरियाणा की मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद के पहले दिन व्यवस्थाओं की सुस्त शुरुआत देखने को मिली, जिससे कई किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा. विभिन्न जिलों से मिली जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंचे, लेकिन खरीद प्रक्रिया अपेक्षित गति से शुरू नहीं हो सकी.
अनुराग ढांडा ने जताई चिंता
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य की कई मंडियों में पहले दिन खरीद प्रक्रिया काफी सीमित रही. उन्होंने बताया कि सरसों की आवक अच्छी मात्रा में होने के बावजूद खरीद का प्रतिशत कम रहा, जिससे किसानों को इंतजार करना पड़ा.
लंबी कतारों में लगने को मजबूर किसान
राज्य के जींद, हिसार, फतेहाबाद, रेवाड़ी और रोहतक जैसे जिलों में किसानों की लंबी कतारें देखने को मिलीं. कई किसान सुबह जल्दी मंडियों में पहुंच गए थे, लेकिन देर शाम तक भी उनकी फसल की खरीद नहीं हो सकी. कुछ जगहों पर किसानों को आवश्यक प्रक्रियाओं के पूरा न होने के कारण वापस लौटना पड़ा.
ई-खरीद प्रणाली में भी तकनीकी दिक्कतें
इस दौरान ई-खरीद प्रणाली में भी तकनीकी दिक्कतें सामने आईं. किसानों को गेट पास लेने और अपने रिकॉर्ड सत्यापित कराने में परेशानी हुई. कई मामलों में डेटा मिलान न होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे किसानों को अतिरिक्त समय लगाना पड़ा. इस स्थिति ने यह संकेत दिया कि तकनीकी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है.
मंडी स्तर पर भी बुनियादी सुविधाओं में कमी
मंडी स्तर पर भी कुछ बुनियादी सुविधाओं की कमी सामने आई. किसानों ने बताया कि बारदाना, तुलाई के उपकरण और श्रमिकों की उपलब्धता सीमित रही. इसके अलावा पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं में भी सुधार की जरूरत महसूस की गई.
नहीं मिल सका अपेक्षित मूल्य
सरकार द्वारा सरसों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया गया है, लेकिन खरीद की धीमी प्रक्रिया के कारण कुछ किसानों ने निजी व्यापारियों को अपनी फसल बेचने का विकल्प चुना. इससे किसानों को अपेक्षित मूल्य नहीं मिल सका.
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि सरसों खरीद के शुरुआती दिन में आई इन चुनौतियों से सीख लेते हुए आने वाले दिनों में व्यवस्था को बेहतर किया जा सकता है. जल्द ही गेहूं की फसल भी मंडियों में पहुंचने वाली है, ऐसे में खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाना बेहद जरूरी होगा ताकि किसानों को किसी तरह की असुविधा न हो.
फिलहाल, पहले दिन की स्थिति ने यह स्पष्ट किया कि मंडियों में बेहतर समन्वय, तकनीकी मजबूती और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर और ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि किसानों को समय पर और उचित तरीके से अपनी फसल बेचने का अवसर मिल सके.
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