02 दिसंबर का दिन असम के लिए काफी खास दिन है। यह भारत में असम राज्य की स्थापना की याद में मनाया जाने वाला उत्सव है। ऐतिहासिक दृष्टि से साल 1963 असम राज्य के गठन का प्रतीक है। साल 1963 में अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड और मेघालय को मिलाकर बड़े राज्य का हिस्सा था। वहीं 02 दिसंबर 1963 को 1956 के राज्य पुनर्गठ अधिनियम लागू होने के बाद से नागालैंड और मेघालय, असम से अलग हो गए। जिससे आज के समय में असम राज्य का जन्म हुआ।
इतिहास
बता दें कि असम राज्य का इतिहास काफी समृद्धि और प्राचीन है। जोकि मुख्य रूप से कामरूप साम्राज्य और अहोम वंश के 600 सालों के शासनकाल के लिए जाना जाता है। मुगलों को कई बार हराने वाले अहोम राजाओं के बाद यह साल 1826 में ब्रिटिश शासन के अधीन आया था। फिर बाद में चाय उत्पादन और प्राकृतिक संसाधन के केंद्र के रूप में यह राज्य विकसित हुआ।
भाषा और धर्म
असम राज्य की कुल आबादी में करीब 61.47% आबादी हिंदू है। वहीं 34.22% आबादी मुस्लिम है। वहीं 3.74% आबादी ईसाई और बाकी अन्य धर्म से संबंधित जैसे- बौद्ध, जैन आदि शामिल हैं। आजादी के बाद असम एक बड़ा राज्य है। उस समय असम की राजधानी शिलांग थी। असम की राजधानी दिसपुर हो गया। असम में ब्रह्मपुत्र नदी काफी फेमस है। यह करीब 100 किमी चौड़ी है।
राजनीतिक पार्टियां
असम में राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कई अहम बदलाव हुए हैं। जोकि मुख्य रूप से पार्टी पुनर्गठन, चुनाओं और जनमत की वजह से हुए हैं। असम में मुख्य सियासी दल में भारतीय जनता पार्टी, असम गण परिषद, कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट शामिल हैं। बता दें कि साल 2021 से हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य में भाजपा सत्तारूढ़ है। वहीं अन्य क्षेत्रीय पार्टियों में यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट शामिल हैं।
लोकसभा और विधानसभा सीटें
असम राज्य में कुल 126 विधानसभा सीटें हैं। वहीं हाल ही में निर्वाचन आयोग ने परिसीमन के बाद भी विधानसभा सीटों की संख्या 126 और लोकसभा सीटों की संख्या 14 पर बरकरार रखा है। वर्तमान समय में असम में हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा (NDA) की सरकार है।
लोकसभा सीटें- 14
विधानसभा सीटें - 126
वर्तमान सीएम- हिमंत बिस्वा सरमा
अनुमानित जनसंख्या- 3,12,05,576
अनुमानित पुरुष जनसंख्या- 1,59,39,443
अनुमानित महिला जनसंख्या- 1,52,66,133
साक्षरता दर- करीब 72.19%
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शुक्रवार को अयोध्या में राम नवमी का पवित्र पर्व अत्यंत श्रद्धापूर्वक मनाया गया और राम मंदिर में भव्य सूर्य तिलक समारोह आयोजित किया गया। इस वर्ष अयोध्या में भव्य उत्सव का आयोजन राम जन्मभूमि मंदिर में बहुप्रतीक्षित सूर्य तिलक समारोह के साथ किया जा रहा है। उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण सूर्य तिलक अनुष्ठान है, जो ठीक दोपहर 12:00 बजे संपन्न होता है। इस अनूठे समारोह के दौरान, मंदिर के भीतर स्थित राम लल्ला प्रतिमा के माथे पर वैज्ञानिक विधि से सूर्य की किरण डाली जाती है।
राम नवमी पर, पीएम नरेंद्र मोदी ने भगवान राम लला से प्रार्थना की और अयोध्या राम मंदिर में सूर्य तिलक समारोह का अवलोकन किया। दर्पणों और लेंसों की उन्नत प्रणाली की बदौलत सूर्य की रोशनी गर्भगृह में प्रवेश करती है और कुछ मिनटों के लिए देवता के माथे पर एक चमकदार तिलक बनाती है। यह समारोह दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक है और परंपरा एवं आधुनिक विज्ञान का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। भक्तों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मंदिर अधिकारियों ने अयोध्या भर में लाइव स्क्रीनिंग की व्यवस्था की, जिससे हजारों भक्त इस क्षण के साक्षी बन सके।
आज सुबह अयोध्या में राम नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, क्योंकि हजारों लोग दूर-दराज के क्षेत्रों से धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए अत्यंत उत्साह के साथ पहुंचे। पवित्र स्नान करने के बाद, श्रद्धालु अयोध्या के राम मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में प्रार्थना करने के लिए उमड़ पड़े। पूरा शहर गहरी भक्ति के वातावरण में डूबा रहा और "जय श्री राम" के जयकारे गूंजते रहे। भगवान श्री राम की जयंती मना रहे श्रद्धालुओं में उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। जिला प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की और पुलिस बलों को विभिन्न स्थानों पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया।
अयोध्या मंडल के आयुक्त राजेश कुमार ने कहा कि आज राम नवमी के अवसर पर अयोध्या में आस्था की लहर दौड़ गई है; हर जगह श्रद्धालु नजर आ रहे हैं और चारों ओर ‘जय श्री राम’ के जयकारे गूंज रहे हैं। इसी को देखते हुए प्रशासन के सभी उच्च अधिकारी लगातार मेला मैदान का दौरा कर रहे हैं। वे व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी कर रहे हैं और स्वयं जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
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