Breaking News Today Live Updates: मिडिल ईस्ट के संकट पर PM मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के संग करेंगे बैठक
पश्चिम एशिया संकट पर पीएम नरेंद्र मोदी आज यानि शुक्रवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे. यह बातचीत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी. इसमें चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं किए जाएंगे. बातचीत में राज्यों की तैयारियों और योजनाओं को लेकर समीक्षा की जाएगी. अयोध्या में आज राम नवमी मनाई जाएगी. दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक होगा. हाईटेक व्यवस्था से भगवान राम के माथे पर सूर्य तिलक किया जाएगा. पश्चिम बंगाल में SIR के तहत दूसरी सप्लीमेंट्री लिस्ट के 27-28 मार्च तक जारी होने के आसार हैं. चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को इस बात की सूचना दी. 26 और 27 मार्च को विदेश मंत्री फ्रांस में एबे डेस-वॉक्स-डे-सेर्ने की यात्रा करेंगे. यहां वह साझेदार देशों के संग जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे. बैठक से अलग अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करने वाले हैं.
Ram Navami 2026: आज सिर्फ इतने बजे तक होगी श्रीराम की पूजा, जरूर करें राम चालीसा और रामरक्षा स्तोत्रम् का पाठ
Ram Navami 2026: प्रतिवर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर राम नवमी मनाई जाती है. राम नवमी के दिन हम राम लला का जन्मोत्सव मनाते हैं. इस वर्ष नवमी तिथि को लेकर लोगों में बहुत कंफ्यूजन चल रहा है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष राम नवमी तिथि का प्रारंभ 26 मार्च को 11 बजकर 13 मिनट से शुरू हो गया है. इस तिथि का समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर होगा. ऐसे में जो लोग उदयातिथि के अनुसार, राम नवमी मना रहे हैं तो उन्हें आज यानी 27 मार्च, 2026 को शुक्रवार के दिन सुबह 10 बजे से पहले ही पूजा कर लेनी चाहिए.
राम नवमी की पूजा के दौरान हमें उन्हें पीले फूल अर्पित करने चाहिए. पीले वस्त्र अर्पित करने चाहिए. चंदन का तिलक लगाएं और उन्हें पीली चीजों का भोग लगाएं. इस दिन रामलला का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपको श्रीराम चालीसा और राम रक्षा स्तोत्रम् का पाठ अवश्य करना चाहिए.
भगवान राम की चालीसा (Lord Rama Chalisa Lyrics in Hindi)
चौपाई
श्री रघुबीर भक्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशि दिन ध्यान धरै जो कोई।ता सम भक्त और नहीं होई॥
ध्यान धरें शिवजी मन मांही।ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना।जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥
जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला।सदा करो संतन प्रतिपाला॥
तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला।रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥
तुम अनाथ के नाथ गोसाईं।दीनन के हो सदा सहाई॥
ब्रह्मादिक तव पार न पावैं।सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥
चारिउ भेद भरत हैं साखी।तुम भक्तन की लज्जा राखी॥
गुण गावत शारद मन माहीं।सुरपति ताको पार न पाहिं॥
नाम तुम्हार लेत जो कोई।ता सम धन्य और नहीं होई॥
राम नाम है अपरम्पारा।चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥
गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो।तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥
शेष रटत नित नाम तुम्हारा।महि को भार शीश पर धारा॥
फूल समान रहत सो भारा।पावत कोऊ न तुम्हरो पारा॥
भरत नाम तुम्हरो उर धारो।तासों कबहूं न रण में हारो॥
नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा।सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥
लखन तुम्हारे आज्ञाकारी।सदा करत सन्तन रखवारी॥
ताते रण जीते नहिं कोई।युद्ध जुरे यमहूं किन होई॥
महालक्ष्मी धर अवतारा।सब विधि करत पाप को छारा॥
सीता राम पुनीता गायो।भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥
घट सों प्रकट भई सो आई।जाको देखत चन्द्र लजाई॥
जो तुम्हरे नित पांव पलोटत।नवो निद्धि चरणन में लोटत॥
सिद्धि अठारह मंगलकारी।सो तुम पर जावै बलिहारी॥
औरहु जो अनेक प्रभुताई।सो सीतापति तुमहिं बनाई॥
इच्छा ते कोटिन संसारा।रचत न लागत पल की बारा॥
जो तुम्हरे चरणन चित लावै।ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥
सुनहु राम तुम तात हमारे।तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥
तुमहिं देव कुल देव हमारे।तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥
जो कुछ हो सो तुमहिं राजा।जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥
राम आत्मा पोषण हारे।जय जय जय दशरथ के प्यारे॥
जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा।नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा॥
सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी।सत्य सनातन अन्तर्यामी॥
सत्य भजन तुम्हरो जो गावै।सो निश्चय चारों फल पावै॥
सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं।तुमने भक्तिहिं सब सिधि दीन्हीं॥
ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा।नमो नमो जय जगपति भूपा॥
धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा।नाम तुम्हार हरत संतापा॥
सत्य शुद्ध देवन मुख गाया।बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥
सत्य सत्य तुम सत्य सनातन।तुम ही हो हमरे तन-मन धन॥
याको पाठ करे जो कोई।ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥
आवागमन मिटै तिहि केरा।सत्य वचन माने शिव मेरा॥
और आस मन में जो होई।मनवांछित फल पावे सोई॥
तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै।तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥
साग पत्र सो भोग लगावै।सो नर सकल सिद्धता पावै॥
अन्त समय रघुबर पुर जाई।जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥
श्री हरिदास कहै अरु गावै।सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥
दोहा
सात दिवस जो नेम कर,पाठ करे चित लाय।
हरिदास हरि कृपा से,अवसि भक्ति को पाय॥
राम चालीसा जो पढ़े,राम चरण चित लाय।
जो इच्छा मन में करै,सकल सिद्ध हो जाय॥
श्रीरामरक्षास्तोत्रम् (Lord Rama Raksha Strotam)
श्रीगणेशायनमः।
अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य।
बुधकौशिक ऋषिः।
श्रीसीतारामचन्द्रो देवता।
अनुष्टुप् छन्दः।
सीता शक्तिः।
श्रीमद्हनुमान् कीलकम्।
श्रीसीतारामचन्द्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥
अथ ध्यानम
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं।
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्॥
वामाङ्कारूढ-सीता-मुखकमल-मिलल्लोचनं नीरदाभं।
नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
इति ध्यानम्
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥1॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम्॥2॥
सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तं चरान्तकम्।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्॥3॥
रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः॥4॥
कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः॥5॥
जिव्हां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः॥6॥
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित्।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः॥7॥
सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः।
ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्॥8॥
जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तकः।
पादौ बिभीषणश्रीदः पातु रामोSखिलं वपुः॥9॥
एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्॥10॥
पाताल-भूतल-व्योम-चारिणश्छद्मचारिणः।
न द्र्ष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः॥11॥
रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्।
नरो न लिप्यते पापैः भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति॥12॥
जगज्जेत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाऽभिरक्षितम्।
यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः॥13॥
वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्।
अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्॥14॥
आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः।
तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः॥15॥
आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्।
अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान् स नः प्रभुः॥16॥
तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ॥17॥
फलमूलशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥18॥
शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्।
रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ॥19॥
आत्तसज्जधनुषा विषुस्पृशावक्षया शुगनिषङ्ग सङिगनौ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतःपथि सदैव गच्छताम्॥20॥
संनद्धः कवचीखड्गी चापबाणधरो युवा।
गच्छन् मनोरथोऽस्माकंरामः पातु सलक्ष्मणः॥21॥
रामो दाशरथिः शूरोलक्ष्मणानुचरो बली।
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णःकौसल्येयो रघूत्तमः॥22॥
वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः।
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः॥23॥
इत्येतानि जपेन्नित्यंमद्भक्तः श्रद्धयान्वितः।
अश्वमेधाधिकं पुण्यंसम्प्राप्नोति न संशयः॥24॥
रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम्।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः॥25॥
रामं लक्ष्मण-पूर्वजंरघुवरं सीतापतिं सुन्दरं।
काकुत्स्थं करुणार्णवंगुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्।
राजेन्द्रं सत्यसन्धं दशरथ-तनयंश्यामलं शान्तमूर्तिं।
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकंराघवं रावणारिम्॥26॥
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥27॥
श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम।
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम।
श्रीराम राम शरणं भव राम राम॥28॥
श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये॥29॥
माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः।
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुर्।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने॥30॥
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम्॥31॥
लोकाभिरामं रणरङ्गधीरंराजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरन्तंश्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥32॥
मनोजवं मारुततुल्यवेगंजितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यंश्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥33॥
कूजन्तं राम-रामेतिमधुरं मधुराक्षरम्।
आरुह्य कविताशाखांवन्दे वाल्मीकिकोकिलम्॥34॥
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥35॥
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम्॥36॥
रामो राजमणिः सदाविजयते रामं रमेशं भजे।
रामेणाभिहता निशाचरचमूरामाय तस्मै नमः।
रामान्नास्ति परायणं परतरंरामस्य दासोऽस्म्यहम्।
रामे चित्तलयः सदा भवतुमे भो राम मामुद्धर॥37॥
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥38॥
॥ इति श्रीबुधकौशिकमुनिविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम्॥
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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