एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन फ्लाइट तकनीकी खराबी के चलते बीच रास्ते से वापस लौटी, सभी यात्री सुरक्षित
नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। एयर इंडिया की दिल्ली से लंदन हीथ्रो जाने वाली एक फ्लाइट को गुरुवार दोपहर बीच रास्ते से वापस दिल्ली लौटना पड़ा। उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी का शक होने पर यह फैसला लिया गया।
यह फ्लाइट एआई111 सुबह करीब 6 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी और लगभग 7 घंटे तक हवा में रहने के बाद वापस लौटी। यह विमान दोपहर करीब 12:30 बजे सुरक्षित दिल्ली एयरपोर्ट पर उतर गया।
एयर इंडिया के प्रवक्ता के मुताबिक, यात्रा के दौरान तकनीकी समस्या का संदेह होने पर एहतियात के तौर पर विमान को वापस बुलाया गया। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है, इसलिए यह निर्णय लिया गया।
एयरलाइन ने बताया कि विमान पूरी तरह सुरक्षित तरीके से उतरा और सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
फिलहाल विमान की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है, जिसमें कुछ समय लग सकता है। इसके बाद ही आगे की उड़ान को लेकर फैसला लिया जाएगा।
एयर इंडिया ने इस घटना से यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है और कहा है कि प्रभावित यात्रियों को जल्द से जल्द लंदन पहुंचाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।
तकनीकी खराबी की असली वजह क्या थी, इसकी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
इससे पहले पिछले हफ्ते भी एयर इंडिया की एक फ्लाइट, जो दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर जा रही थी, 9 घंटे बाद वापस लौट आई थी, क्योंकि उस रूट पर तैनात किए गए विमान (बी777) को कनाडा के एविएशन रेगुलेटर से वहां उड़ान भरने की अनुमति नहीं थी।
एयर इंडिया की फ्लाइट, जिसका कॉल साइन एआई185 था, 20 मार्च को दोपहर 12.18 बजे दिल्ली से यात्रियों से पूरी तरह भरी हुई वैंकूवर के लिए बोइंग 777-200एलआर विमान से रवाना हुई, जबकि एयर इंडिया को इस मार्ग पर केवल अपने बोइंग 777-300ईआर विमानों के लिए ही कनाडा से अनुमति प्राप्त है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
वांग यी ने 'समुद्री जैव विविधता पर समझौते' की तीसरी तैयारी बैठक में वीडियो संबोधन दिया
बीजिंग, 26 मार्च (आईएएनएस)। 25 मार्च को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने समुद्री जैव विविधता पर समझौते के पक्षकारों के सम्मेलन की तैयारी समिति के तीसरे सत्र को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि इस समझौते का पूरा होना और उसका लागू होना बहुपक्षवाद की जीत है और वैश्विक महासागर शासन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस समझौते का पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन पूरी मानवता के साझा हितों के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि चीन संयुक्त राष्ट्र का मजबूत समर्थक, रक्षक और सहभागी रहा है। मौजूदा जटिल और अस्थिर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच, चीन संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका का दृढ़ समर्थन करता है और बहुपक्षवाद का एक अहम स्तंभ बना हुआ है।
वांग यी ने यह भी कहा कि चीन की समुद्री सभ्यता लंबी और समृद्ध रही है। लगभग 600 वर्ष पहले, चीनी नाविक चंग हे ने सात समुद्री यात्राएं की थीं, जिनके जरिए विभिन्न देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध और आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला। आज चीन आधुनिकीकरण के साथ-साथ महासागरों की सुरक्षा और उनके सतत उपयोग को समान महत्व दे रहा है, और पृथ्वी पर जीवन के साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक महासागर शासन में योगदान देने के लिए चीन की इच्छाशक्ति और क्षमता दोनों मजबूत हैं। चीन ने समुद्री जैव विविधता पर समझौते के सचिवालय को दक्षिण चीन के फूच्येन प्रांत के श्यामन शहर में स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया है, जो एक प्रमुख विकासशील देश के रूप में उसकी जिम्मेदारी को दर्शाता है। चीन सभी पक्षों के साथ मिलकर इस समझौते के प्रभावी कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने और अधिक न्यायसंगत व संतुलित वैश्विक महासागर शासन व्यवस्था के निर्माण के लिए तैयार है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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