Uttarakhand: Ravi Tamta ने Almora में Electric Helicar का सफल परीक्षण किया
पिथौरागढ़, सात अगस्त उत्तराखंड में अल्मोड़ा के काफलूखान क्षेत्र के रहने वाले 32 वर्षीय युवा अविष्कारक रवि टम्टा ने शुक्रवार को ड्रोन तकनीक में नवाचार करते हुए अपनी कार्यशाला में खुद तैयार की गयी एक सीट वाली इलेक्ट्रिक हेलीकार के प्रोटोटाइप का सफल उड़ान परीक्षण किया। अल्मोड़ा में मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक स्थानीय स्तर पर तैयार हेलीकार ‘हेपीडा स्काईनेक्स’ ने एक मिनट तक उड़ान भरी और एक स्थानीय हेलीपैड पर सुरक्षित रूप से उतर गयी। प्रत्यक्षदर्शी शेखर द्विवेदी ने बताया, चार रोटर ब्लेड और बीच में एक सीट वाली इस हेलीकार को टम्टा ने वहां जमा भीड़ के सामने एक मिनट तक सफलतापूर्वक उड़ाया।
शेखर के अनुसार, टम्टा ने 2014 में स्थानीय स्तर पर असेंबल किए गए हेलीकॉप्टर को भी उड़ाया था। बाद में मौके पर इकट्ठा पत्रकारों को जानकारी देते हुए टम्टा ने कहा कि उनकी बनाई इलेक्ट्रिक हेलीकार का इस्तेमाल राजमार्गों पर यातायात नियंत्रण के काम में किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार उन्हें इजाज़त देगी, तो वह इस उपकरण का पेटेंट लेना चाहेंगे।
अपनी हेलीकार की क्षमता के बारे में बात करते हुए टम्टा ने कहा कि अगर डीजीसीए से अनुमति मिली तो वह अल्मोड़ा शहर से 40 किलोमीटर दूर अपने गांव काफलूखान तक का सफ़र 40 मिनट में तय कर सकते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रवि टम्टा के प्रोटोटाइप के सफल उड़ान परीक्षण पर उन्हें बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उनकी यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि हमारे युवाओं में प्रतिभा, नवाचार और वैज्ञानिक सोच की कोई कमी नहीं है।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में धामी ने कहा, “आपका यह अभिनव प्रयास उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। विश्वास है कि आप भविष्य में भी अपने नवाचारों से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।
Delhi Police ने नकल गिरोह के 7 आरोपी दबोचे, भर्ती परीक्षा में Bluetooth का करते थे इस्तेमाल
नयी दिल्ली, सात अगस्त दिल्ली पुलिस ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को नैनो ईयरबड, ब्लूटूथ उपकरणों और विशेष रूप से तैयार किए गए मोबाइल फोन के जरिए नकल कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह का कथित सरगना चंडीगढ़ अग्निशमन विभाग में तैनात दमकलकर्मी है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
नकल गिरोह की मदद से अभ्यर्थी ऑनलाइन होने वाली सरकारी परीक्षाओं के दौरान ‘चैटजीपीटी’ जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का इस्तेमाल कर जवाब हासिल करते थे। पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हरेश्वर वी. स्वामी ने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच फिलहाल जारी है। उन्होंने एक बयान में कहा कि गिरोह ने अभ्यर्थियों से 12 लाख रुपये तक वसूले और खास तौर पर संशोधित (मॉडिफाए) इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध कराए, जिनकी मदद से परीक्षा हॉल के अंदर मौजूद उम्मीदवार बाहर से भेजे गए जवाब चुपके से हासिल कर सकते थे।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने 26 जुलाई को दर्ज कराई शिकायत में आरोप लगाया गया कि दिल्ली के जनकपुरी स्थित केंद्रीय विद्यालय में आयोजित कनिष्ठ लिपिक (एलडीसी) भर्ती परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया गया और इस मामले की जांच में गिरोह का पता चला। डीसीपी ने कहा, परीक्षा केंद्र पर तलाशी के दौरान, अधिकारियों ने एक महिला अभ्यर्थी के पास से विशेष तौर पर तैयार किया गया एक मोबाइल फोन बरामद किया, जबकि एक अन्य उम्मीदवार हेमंत के पास कथित तौर पर सिम कार्ड वाला ब्लूटूथ उपकरण और छिपाकर रखे गए नैनो ईयरबड्स मिले। छह पदों के लिए हुई इस परीक्षा में कुल 213 उम्मीदवार शामिल हुए।
शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर दोनों अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान, हेमंत ने खुलासा किया कि ब्लूटूथ उपकरण और सिम कार्ड की व्यवस्था उसके भाई रिंकू ने अपने जानकार वीरेंद्र के माध्यम से 12 लाख रुपये में की थी, ताकि परीक्षा हॉल के बाहर से उसे उत्तर बताएं जा सकें। बयान के मुताबिक, खुलासे पर कार्रवाई करते हुए एक टीम ने रिंकू और वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया।
महिला अभ्यर्थी ने पुलिस को बताया कि उसके दोस्त सन्नी ने 10 लाख रुपये में हुए सौदे के बाद उसे विशेष तौर पर तैयार मोबाइल फोन, ब्लूटूथ उपकरण, सिम कार्ड और नैनो ईयरबड दिए थे। जांच के बाद पुलिस सन्नी तक पहुंची, जिसने दीपक का नाम गिरोह के सहयोगी के रूप में लिया। पुलिस के मुताबिक, 12वीं कक्षा पास दीपक ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कथित तौर पर व्यवस्था की और परीक्षाओं के दौरान उत्तरों के प्रसारण का समन्वय किया।
इसके बाद पुलिस ने दीपक को पकड़ लिया जिसने खुलासा किया कि वह संदिग्ध सरगना सोनू कुमार उर्फ सोनू मान के निर्देशों के तहत काम कर रहा था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने सोनू को हरियाणा के चरखी दादरी से पकड़ लिया जहां वह एक अन्य सरकारी भर्ती परीक्षा में नकल कथित तौर पर नकल करा रहा था। पुलिस के मुताबिक, सोनू चंडीगढ़ अग्निशमन विभाग में दमकल कर्मी के पद पर कार्यरत है।
बयान में कहा गया है कि उसकी गिरफ्तारी के दौरान, टीम ने एक विदेशी खाते से जुड़ा एक टैबलेट, विशेष तौर पर तैयार किए गए मोबाइल फोन, ब्लूटूथ उपकरण, नैनो ईयरबड, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अपराध संकेती दस्तावेजों के साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। स्वामी ने बताया कि कथित सरगना सोनू कुमार ने एक कार को ‘मोबाइल कंट्रोल रूम’ में बदल दिया था, जहां से वह दूर से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की सहायता करता था। वाहन एक संपूर्ण तकनीकी सेट-अप से सुसज्जित था, जिसमें कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और इंटरनेट कनेक्टिविटी शामिल थी जिससे वह उम्मीदवारों के कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देने वाले प्रश्नों को हल कर सकता था।
अधिकारी ने कहा कि उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले अपने उपकरणों में दो अलग-अलग ऐप डाउनलोड करने का निर्देश दिया गया था। अधिकारी ने कहा कि एक ऐप है जिससे सोनू उम्मीदवार की ‘लाइव परीक्षा स्क्रीन’ को देख सकता था, जबकि दूसरा एक जासूसी कैमरा-आधारित ऐप है जो उपकरण की स्क्रीन निष्क्रिय होने पर भी वीडियो रिकॉर्ड करने और छवियों को दर्ज करने में सक्षम है। अधिकारी ने कहा कि सोनू ने इस काम के लिए प्रत्येक उम्मीदवार से 10 लाख रुपये से 12 लाख रुपये के बीच वसूले।
पुलिस ने कहा कि कई लाभार्थियों ने प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में नौकरियां हासिल कीं, जिनमें गिरफ्तार आरोपियों में से एक सन्नी भी शामिल है। सन्नी दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज में ‘लैब अटेंडेंट’ है। अधिकारी ने कहा कि संबंधित संस्थानों को सूचित करना शुरू कर दिया गया है ताकि कथित तौर पर फर्जी तरीकों से नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू की जा सके।
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