Odisha को Food Processing क्षेत्र में 41,748 करोड़ का निवेश प्रस्ताव मिला
नयी दिल्ली, सात अगस्त ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 27 कंपनियों से 41,748 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। राज्य सरकार और उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा आयोजित निवेशक सम्मेलन में इन कंपनियों ने समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। माझी ने कहा, ‘‘22 कंपनियों के साथ 31,648 करोड़ रुपये के एमओयू पर आज हस्ताक्षर हुए हैं, जो इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की दिशा में हमारी प्रगति का प्रमाण हैं।’’ बाद में ओडिशा सरकार ने एक बयान जारी कर समझौतों के तहत निवेश के ताजा आंकड़ें जारी किए।
इसमें कुल निवेश प्रस्ताव 41,748 करोड़ रुपये बताया गया, जबकि 12 निवेश आशय फॉर्म (आईआईएफ) के जरिए 1,689 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश का प्रस्ताव है। राज्य सरकार को पहले दिन कुल मिलाकर 43,437 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनसे 43,316 नौकरियां सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक ओडिशा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था खनन और खनिजों पर आधारित रही, लेकिन अब राज्य खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण सहित चार प्रमुख क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय से सीधे जुड़े होने के कारण खाद्य प्रसंस्करण सरकार की प्राथमिकता में है। राज्य सरकार सभी जिलों में इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है और निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए अलग नीति लागू की गई है। माझी ने कहा कि नीति आयोग के निवेश-अनुकूल सूचकांक में ओडिशा शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है और सरकार कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी बनाने पर काम कर रही है।
राज्य के उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वैन ने कहा कि ओडिशा में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं और सरकार निवेशकों को परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन में हरसंभव सहयोग देगी। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि वर्तमान में 130 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला ओडिशा वर्ष 2036 तक 500 अरब डॉलर और 2047 तक 1,500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।
NBFC Gold Loan में 69 प्रतिशत की वृद्धि, आंकड़ा 3.42 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
मुंबई, सात अगस्त गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का स्वर्ण आभूषण पर दिया गया कर्ज जून में 69 प्रतिशत उछलकर 3.42 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह एक साल पहले 2.02 लाख करोड़ रुपये था और कर्ज से जुड़े सभी बड़े खंडों में यह सबसे तेज बढ़ोतरी है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
जून 2024 में यह आंकड़ा 1.44 लाख करोड़ रुपये था। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की कुल कर्ज वृद्धि में खुदरा ऋण प्रमुख चालक बना रहा। जून 2026 में खुदरा ऋण में सालाना आधार पर 20.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह वृद्धि 14.3 प्रतिशत थी।
खुदरा कर्ज श्रेणी में आवास ऋण, वाहन ऋण और सोने के आभूषण गिरवी रखकर दिए जाने वाले ऋण में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे उपभोक्ता ऋण की रफ्तार बनी रही। वहीं, कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए दिए गए ऋण में जून 2026 में सालाना आधार पर 17.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 5.1 प्रतिशत थी। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण की वृद्धि धीमी पड़ी।
जून 2026 में इसमें 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले यह 10.3 प्रतिशत थी। इसकी मुख्य वजह बुनियादी ढांचा क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण में सुस्ती रही, जिसका औद्योगिक ऋण में सबसे बड़ा हिस्सा है। इसी तरह, सेवा क्षेत्र को एनबीएफसी द्वारा दिए जाने वाले ऋण की वृद्धि भी घटकर 17.6 प्रतिशत रह गई, जो जून 2025 में 22.4 प्रतिशत थी।
मुख्य रूप से व्यापार और परिवहन क्षेत्र के परिचालकों को दिए जाने वाले ऋण में धीमी वृद्धि के कारण सेवा क्षेत्र के कर्ज में वृद्धि कम रही। हालांकि वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में ऋण वृद्धि मजबूत बनी रही।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








