अब पेट्रोल पंप पर भी खरीद सकेंगे शराब, जानें किस शहर में बनी नई पॉलिसी
देशभर में शराब के शौकीनों की कमी नहीं है. हालांकि कई राज्य ऐसे हैं जहां शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है. इनमें बिहार-गुजरात प्रमुख रूप से शामिल हैं. लेकिन कुछ राज्यों या शहरों में शराब की जमकर बिक्री होती है. इस बीच शराब पीने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल चंडीगढ़ प्रशासन ने एक्साइज पॉलिसी 2026-27 को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत शराब बिक्री व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं. इस नई नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा देना, पारदर्शिता बढ़ाना और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण करना है. ऐसे में उपभोक्ता पेट्रोल पंप से भी शराब खरीद सकेंगे.
अब नए स्थानों पर भी मिलेगी शराब
नई नीति के तहत अब शराब केवल पारंपरिक ठेकों तक सीमित नहीं रहेगी. उपभोक्ता अब पेट्रोल पंप, शॉपिंग मॉल, लोकल मार्केट और बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स से भी शराब खरीद सकेंगे.
इस फैसले से शहर में शराब की उपलब्धता बढ़ेगी और लोगों को खरीद के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे. खासतौर पर संगठित खुदरा स्थानों पर बिक्री से खरीद प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित होने की उम्मीद है.
डिजिटल पेमेंट और सख्त नियम
प्रशासन ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर शराब की दुकान पर डिजिटल पेमेंट अनिवार्य कर दिया है. अब सभी दुकानों पर कार्ड और POS मशीन की सुविधा उपलब्ध होगी. इसके अलावा बार, होटल और रेस्टोरेंट में अल्कोहल मीटर लगाना जरूरी किया गया है, ताकि शराब की मात्रा और गुणवत्ता की जांच की जा सके और जिम्मेदार खपत को बढ़ावा मिले.
निगरानी के लिए हाई-टेक इंतजाम
नई पॉलिसी में निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है. शराब की सप्लाई करने वाली गाड़ियों में GPS ट्रैकिंग अनिवार्य कर दी गई है, जिससे उनकी आवाजाही पर नजर रखी जा सके. साथ ही, सभी बिक्री केंद्रों पर CCTV कैमरे और लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाएगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी.
दुकानों की संख्या और कीमतों में बदलाव
चंडीगढ़ में इस पॉलिसी के तहत कुल 97 शराब की दुकानों को मंजूरी दी गई है. वहीं भारतीय शराब, बीयर और वाइन की कीमतों में अधिकतम 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है. इसके अलावा, बोतलिंग प्लांट्स को हफ्ते में 6 दिन संचालन की अनुमति दी गई है, जिससे सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी.
सरकार का उद्देश्य
प्रशासन का कहना है कि इस नई नीति से जहां एक ओर लोगों को शराब खरीदने में सुविधा होगी, वहीं दूसरी ओर अवैध कारोबार पर भी लगाम लगेगी. संगठित और नियंत्रित बिक्री व्यवस्था से राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव देने का लक्ष्य रखा गया है.
चंडीगढ़ की नई एक्साइज पॉलिसी 2026-27 आधुनिक जरूरतों के अनुरूप एक बड़ा बदलाव है. यह नीति सुविधा, पारदर्शिता और नियंत्रण तीनों पहलुओं को संतुलित करने की कोशिश करती है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और शहर के शराब बाजार को किस दिशा में ले जाती है.
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भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था: सरकार
नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे जानबूझकर अफवाह और गलत जानकारी फैलाने वाले अभियान से गुमराह न हों, जिनका उद्देश्य बेवजह डर पैदा करना है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है और फिलहाल करीब 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पाद और रणनीतिक भंडारण शामिल हैं, जबकि हम मध्य पूर्व संकट के 27 वें दिन में हैं। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि देश के सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद है।
सरकार ने एक बयान में कहा कि देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक की सप्लाई सुनिश्चित है, चाहे वैश्विक हालात कैसे भी हों।
इसके अलावा, अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले से तय कर ली गई है। सरकार ने कहा कि भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है और भंडार कम होने जैसी बातें पूरी तरह गलत हैं।
दुनिया के कई देशों में जहां ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, राशनिंग लागू की जा रही है और पेट्रोल पंप बंद हो रहे हैं, वहीं भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार ने कहा कि कुछ जगहों पर घबराहट में खरीदारी सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों के कारण हुई है।
सरकार ने यह भी बताया कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को मिलने वाला क्रेडिट बढ़ाकर 3 दिन कर दिया है, ताकि किसी भी पंप पर कामकाजी पूंजी की कमी के कारण ईंधन की कमी न हो।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और पहले से ज्यादा सप्लाई मिल रही है। देश की सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिनों की सप्लाई पहले से तय है।
एलपीजी को लेकर भी सरकार ने कहा कि कोई कमी नहीं है। घरेलू उत्पादन 40 प्रतिशत बढ़ाकर रोजाना 50 टीएमटी कर दिया गया है, जबकि कुल जरूरत लगभग 80 टीएमटी है। यानी अब आयात की जरूरत कम होकर सिर्फ 30 टीएमटी रह गई है।
इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टीएमटी एलपीजी पहले ही भारत के लिए भेजा जा चुका है, जो देश के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगा। सरकार के अनुसार, कम से कम एक महीने की एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सुनिश्चित है और आगे भी लगातार व्यवस्था की जा रही है।
तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।
सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दे रही है, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है। भारत रोजाना 92 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह (एमएमएससीएमडी) गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में गैस पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है।
देश में पीएनजी नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। 2014 में जहां 57 क्षेत्र थे, वहीं अब 300 से ज्यादा क्षेत्रों में यह सुविधा पहुंच चुकी है। वहीं घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं।
सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी को बढ़ावा एलपीजी की कमी के कारण नहीं दिया जा रहा है, बल्कि यह एक बेहतर और सस्ता विकल्प है। एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है।
मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ईंधन और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ सरकारी आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
--आईएएनएस
डीबीपी
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