CM Mohan Yadav ने Chhindwara में 3 अधिकारी निलंबित किए, जनसुनवाई में दिए निर्देश
छिंदवाड़ा, सात अगस्त मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को यहां ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ की शुरुआत की और कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान लापरवाही के आरोप में तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यादव ने छिंदवाड़ा में कहा कि ‘जन विश्वास अभियान’ के तहत जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से सीधे संवाद करेंगे। जनसुनवाई के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. नरेश गुन्नाडे, स्थानीय तहसीलदार तथा एक पटवारी को कथित कर्तव्यहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने चौरई जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और श्रम अधिकारी की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मनवती वर्मा नामक महिला को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत करने के बावजूद पिछले चार वर्षों से सरकारी योजना के तहत अंत्येष्टि सहायता और वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। एक अन्य मामले में गोविंद नायक नामक व्यक्ति के भूमि अभिलेखों में सुधार नहीं किए जाने पर चौरई के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) और संबंधित पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
भावना डेहरिया नामक महिला ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अनुदान नहीं मिलने की शिकायत की। इस पर यादव ने अधिकारियों को नियमानुसार शीघ्र कार्रवाई कर योजना का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इससे पहले मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय स्थित लोक सेवा केंद्र का निरीक्षण किया तथा उद्यमियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से बातचीत कर क्षेत्र के विकास, औद्योगिक संभावनाओं और प्रगति पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रत्येक शुक्रवार को जिला से लेकर तहसील स्तर तक ‘जनता दरबार’ आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मंत्री, विधायक, कलेक्टर और संभागायुक्त उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को किसी भी प्रकार की आधिकारिक बैठक आयोजित नहीं की जाएगी। यादव ने दावा किया कि मध्यप्रदेश इस तरह का अभियान शुरू करने वाला देश का पहला राज्य है।
यादव ने कहा कि उनकी सरकार प्राकृतिक खेती, पशुपालन और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे जैसी पहल कर रही है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
Sangeetha ने वापस ली divorce petition, तमिलनाडु सीएम जोसेफ विजय केस का हुआ निपटारा
चेन्नई, सात अगस्त तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पत्नी संगीता ने शुक्रवार को चेंगलपट्टू के निकट एक कुटुम्ब अदालत में तलाक के लिए दायर अपनी अर्जी वापस ले ली। तलाक याचिका पर सुनवाई के दौरान संगीता के वकील ने याचिका वापस लेने संबंधी अर्जी दाखिल की। संगीता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश हुईं और उन्होंने मामले को आगे नहीं बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।
अदालत ने उनके बयान को दर्ज कर लिया और प्रतिवादी पक्ष के वकील ने याचिका वापस लेने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने संगीता की याचिका को स्वीकार करते हुए मामले का निपटारा कर दिया। अदालत ने उन्हें भविष्य में जरूरत पड़ने पर नए सिरे से याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी।
संगीता ने पिछले वर्ष कुटुम्ब अदालत में दाखिल अपनी तलाक याचिका में अपने पति पर एक अभिनेत्री के साथ विवाहेतर संबंध होने का आरोप लगाया था। संगीता ने आरोप लगाया था कि उनके पति ने उन्हें ‘‘लगातार मानसिक प्रताड़ना, उपेक्षा और परित्याग’’ का सामना कराया। उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर वह संबंधित अभिनेत्री को मामले में दूसरी प्रतिवादी के रूप में शामिल करेंगी।
संगीता ने तलाक याचिका में कहा था कि उनका वैवाहिक संबंध पूरी तरह से टूट चुका है और अब इसे ठीक नहीं किया जा सकता। उन्होंने विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत तलाक का अनुरोध किया था।याचिका के अनुसार, वर्ष 2021 से विजय ‘‘भावनात्मक रूप से दूर हो गए’’, याचिकाकर्ता के साथ अपमानजनक व्यवहार किया और उन्हें ‘‘इस तरह से अलग-थलग कर दिया कि उन्हें वैवाहिक घर में रहते हुए भी अलग जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’ याचिका के अनुसार, संगीता और विजय के विवाह का पंजीकरण 10 जुलाई, 1998 को ब्रिटेन में हुआ था। विजय उस समय के प्रमुख अभिनेताओं में से एक थे।
इसके बाद 25 अगस्त, 1999 को चेन्नई में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार दोनों ने विवाह किया था।
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