Bhabhua Road स्टेशन का नाम बदलने का Home Ministry से प्रस्ताव नहीं मिला: Ashwini Vaishnaw
नयी दिल्ली, सात अगस्त रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा को बताया कि बिहार के कैमूर जिले में स्थित भभुआ रोड रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘मां मुंडेश्वरी धाम’’ करने के संबंध में गृह मंत्रालय से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। भाजपा सांसद शिवेश कुमार के सवाल के लिखित जवाब में रेल मंत्री ने उच्च सदन को यह जानकारी दी। कुमार ने सवाल किया था, ‘‘ क्या बिहार के कैमूर जिले में स्थित भभुआ रोड रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर सुप्रसिद्ध और प्राचीन धार्मिक स्थल के नाम पर मां मुंडेश्वरी धाम रेलवे स्टेशन करने के संबंध में प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं?’’ रेल मंत्री वैष्णव ने इसके जवाब में कहा, ‘‘वर्तमान में, गृह मंत्रालय से भभुआ रोड रेलवे स्टेशन के नाम में परिवर्तन के लिए रेल मंत्रालय की टिप्पणियां/विचार मांगने का कोई भी प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।’’ उन्होंने कहा कि मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, गृह मंत्रालय भारतीय रेल के किसी भी रेलवे स्टेशन के नाम में परिवर्तन को मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी है।
यह संबंधित मंत्रालयों/विभागों की टिप्पणियों व सुझावों पर विचार करने के बाद संबंधित राज्य सरकार की सिफारिश पर ऐसी मंजूरी देता है। रेल मंत्री ने कहा, ‘‘गृह मंत्रालय की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद, संबंधित राज्य सरकार रेलवे स्टेशन के नाम में परिवर्तन के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी करती है। इसके बाद, संबंधित क्षेत्रीय रेल द्वारा रेलवे स्टेशन के नाम में परिवर्तन किया जाता है।
Arunachal Pradesh के 27 स्थानों के मानक नाम आधिकारिक Map में शामिल किए गए
नयी दिल्ली, सात अगस्त चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बार-बार बदले जाने के बीच भारत ने शुक्रवार को राज्य के 27 स्थानों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं के मानक नामों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र में शामिल किया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र पर इन्हें औपचारिक रूप से चिह्नित करने का उद्देश्य, इनकी सटीक पहचान को सुगम बनाना और जन-सामान्य के बीच बेहतर जागरूकता पैदा करना है।’’ अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की हरकत को भारत ने हमेशा स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारत ने लगातार ऐसे कदमों को ‘‘निरर्थक और बेतुका’’ बताया है और कहा है कि इस तरह के प्रयास इस ‘‘अटल’’ सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश ‘‘हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, है और रहेगा।’’ भारत के आधिकारिक मानचित्र में शामिल किए गए 27 स्थानों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित लोंग जू भी शामिल है।
यह क्षेत्र 1959 में भारत और चीन के बीच शुरुआती टकराव वाले स्थानों में से एक था, जब चीनी सेना ने इस इलाके में प्रवेश किया था। बयान में कहा गया है कि अपर सुबनसिरी जिले में लोंग जू के पास स्थित माजा गांव को भी मानचित्र में चिह्नित किया गया है। इस सूची में बिसा गांव के अलावा क्षेत्र के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला को भी शामिल किया गया है।
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ऊंचाई वाले दर्रों में से एक थाग ला को भी आधिकारिक मानचित्र में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के शुरुआती संघर्षों में से एक इसी क्षेत्र में हुआ था। जयरामपुर को भी इसमें शामिल किया गया है।
यह चांगलांग जिले का एक महत्वपूर्ण रसद केंद्र है, जिसे पूर्वी सीमा क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमा सीमा क्षेत्र की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस सूची में पूर्वी अरुणाचल प्रदेश स्थित शंभू सरोवर, बड़ा कुंडुन और छोटा कुंडुन भी शामिल हैं।
इसके अलावा धन बाड़ी, प्रीतनगर, तेरितनगर, तवांग रोड पर स्थित रामनगर जसवंतगढ़ (जहां भारतीय शहीद जसवंत सिंह रावत का स्मारक है), सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी गांवों को भी शामिल किया गया है। इस सूची में 1962 के युद्ध के नायक त्रिलोक सिंह थापा की याद में बनाए गए शेर-ए-थापा स्मारक, छोटा रोपुक और बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग अभयारण्य के पास स्थित कमलांग नगर और बुद्ध मंदिर भी शामिल हैं। चीन की ओर से भारतीय क्षेत्रों को ‘‘काल्पनिक नाम’’ देने के प्रयासों को भारत लगातार खारिज करता रहा है।
भारत का कहना है कि इस तरह ‘‘बेबुनियाद विमर्श’’ गढ़ने की कोशिशें ‘‘अटल सच्चाई’’ को नहीं बदल सकतीं और इससे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में जांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की थी। इसके बाद 2021 में 15 स्थानों के नामों वाली दूसरी सूची जारी की गई और 2023 में 11 अन्य स्थानों के नामों की एक और सूची जारी की गई।
चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है।
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