Delhi High Court ने अस्पतालों में बंद उपकरणों पर रिपोर्ट मांगी; स्वास्थ्य सचिव देंगे जवाब
नयी दिल्ली, सात अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार के अस्पतालों में करोड़ों रुपये के उपकरणों के इस्तेमाल नहीं होने पर चिंता जताई और इस समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पी. एस. अरोड़ा की पीठ ने कहा कि दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और जीटीबी जैसे अस्पतालों में विश्व की प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा निर्मित महत्वपूर्ण उपकरणों का उपयोग बड़ी संख्या में नहीं किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि उसे प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, इन उपकरणों के इस्तेमाल नहीं होने के कारणों में तकनीकी कर्मचारियों की कमी के साथ-साथ सहायक उपकरणों और मुख्य मशीनों का उपलब्ध नहीं होना शामिल है।
पीठ ने कहा, ‘‘कैंसर अस्पताल में 50-60 करोड़ रुपये के उपकरण बिना इस्तेमाल के पड़े हुए हैं। जीटीबी अस्पताल की स्थिति भी चौंकाने वाली है, जहां 400 वेंटिलेटर और 910 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बेकार पड़े हैं। ये उपकरण कोविड-19 के दौरान दान किए गए थे... यहां तक कि ईसीजी मशीन भी काम नहीं कर रही है और रिपोर्ट में किसी अन्य ईसीजी मशीन का उल्लेख भी नहीं है।’’ अदालत ने कहा, ‘‘बिना इस्तेमाल पड़े उपकरणों की संख्या बेहद अधिक है।
यह स्पष्ट नहीं है कि भारी निवेश के बाद इन उपकरणों को बेकार पड़े रहने की अनुमति क्यों दी जा रही है और अस्पताल या सेवा विभाग ने आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए हैं।’’ अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को इस मुद्दे पर अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों और सेवा विभाग के सचिव के साथ बैठक करने तथा रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अधिकारी प्रत्येक अस्पताल की स्थिति का विश्लेषण करेंगे और जहां जरूरत हो वहां कर्मचारियों की व्यवस्था, उपयोग में नहीं आ रहे उपकरणों का पुन: आवंटन, सहायक उपकरणों तथा मुख्य मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में कदम उठाने पर विचार करेंगे। अदालत ने आदेश दिया, ‘‘यह बैठक 17 अगस्त को सुबह 11:30 बजे स्वास्थ्य सचिव के कार्यालय में होगी।
स्वास्थ्य सचिव सभी पहलुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करेंगे।’’ इससे पहले तीन जुलाई को अदालत ने दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सभी अस्पतालों को खरीदी गई, लेकिन इस्तेमाल में नहीं लाई जा रही सभी मशीनों का ऑडिट करने और उसकी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत यह सुनवाई 2017 में शुरू किए गए स्वतः संज्ञान मामले में कर रही थी। यह मामला दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में गंभीर देखभाल से जुड़ी सुविधाओं की कथित कमी को लेकर शुरू किया गया था।
इस मामले में अधिवक्ता अशोक अग्रवाल को अदालत की सहायता के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया गया है।
एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा, पाक-सऊदी-तुर्की समझौते पर भारत क्या बोला?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की (तुर्किए) के बीच रक्षा समझौते के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस पर हमारी नजर है। उन्होंने कहा कि हम इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi
Hindustan










