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UPI इस्तेमाल पर नहीं लगेगा शुल्क, PCI ने छोटे व्यापारियों और ग्राहकों को दी राहत

नयी दिल्ली, सात अगस्त भारतीय भुगतान परिषद (पीसीआई) ने शुक्रवार को कहा कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के बावजूद उपभोक्ता और छोटे कारोबारी एकीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई का इस्तेमाल किसी शुल्क के बगैर करते रहेंगे। यह बयान लोकसभा में संशोधन विधेयक पारित होने के एक दिन बाद आया है, जिसमें सरकार को यूपीआई सहित अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। पीसीआई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि 2016 में शुरू होने के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और आगे भी बिना किसी लेनदेन शुल्क के डिजिटल भुगतान जारी रहेगा।

परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि किराना दुकानों सहित छोटे व्यापारियों को यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क नहीं देना होगा। इसके साथ ही पीसीआई ने कहा कि भविष्य में यदि बड़े कारोबारियों पर मर्चेंट सेवा शुल्क लगाया जाता है, तब भी उपभोक्ताओं को यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। परिषद ने स्पष्ट किया कि जहां भी लागू हो, एमडीआर शुल्क व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होती है और इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा था कि एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर नहीं, बल्कि कारोबारियों पर लागू होता है और इससे मिलने वाली राशि का उपयोग बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनियां अवसंरचना एवं सुरक्षा सुधार में करती हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता जयराश रमेश के उस दावे को भी खारिज किया था, जिसमें कहा गया था कि आम लोगों पर यूपीआई इस्तेमाल का बोझ बढ़ सकता है।

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Google से विदाई के बाद Jeff Dean ने शुरू किया Discovery Loop, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ AI Startup का Pitch Deck

गूगल में लगभग 27 वर्षों तक काम करने के बाद कंपनी से अलग हुए दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञ जेफ डीन एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका नया एआई आधारित उद्यम और उसके लिए तैयार किया गया प्रस्तुति दस्तावेज़ है। मौजूद जानकारी के अनुसार जेफ डीन ने यह दस्तावेज़ सार्वजनिक कर दिया है, जिसे उन्होंने कुछ चुनिंदा निवेश कंपनियों के सामने अपने नए उद्यम के लिए निवेश जुटाने के दौरान इस्तेमाल किया था। दस्तावेज़ सामने आने के बाद यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और तकनीकी जगत में इसकी काफी चर्चा हो रही है।

बता दें कि जेफ डीन लंबे समय तक गूगल के सबसे प्रभावशाली इंजीनियरों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने अपने नए उद्यम का नाम डिस्कवरी लूप रखा है। यह संस्थान विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एआई की मदद से रिसर्च की प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने पर काम करेगा।

प्रस्तुति दस्तावेज़ में जेफ डीन और उनकी टीम ने उन प्रमुख परियोजनाओं का भी उल्लेख किया है, जिनके विकास में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनमें दुनिया का सबसे बड़ा खोज मंच, विज्ञापन प्रणाली, सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली ईमेल सेवा, जेमिनी, अल्फाफोल्ड और गूगल का शुरुआती तंत्रिका आधारित डायलॉग प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं। इन उपलब्धियों को देखकर तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने टीम की जमकर सराहना की है।

जेफ डीन ने सामाजिक माध्यम पर कहा कि उन्होंने कुछ निवेश कंपनियों को अपने काम और भविष्य की योजना समझाने के लिए यह प्रस्तुति तैयार की थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस दस्तावेज़ को तैयार करना उनके लिए एक रोचक अनुभव रहा। साथ ही उन्होंने उन लोगों की सूची भी तैयार की, जिन्होंने उनकी टीम के साथ काम करने के बाद आगे चलकर कई सफल तकनीकी कंपनियों की स्थापना की।

गौरतलब है कि इस प्रस्तुति दस्तावेज़ पर कई प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने इसे अब तक के सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति दस्तावेज़ों में से एक बताया। कुछ लोगों का कहना है कि इसमें शामिल उपलब्धियां किसी भी नए उद्यम के लिए भरोसा पैदा करने के लिए काफी हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार इस नए उद्यम में भारतीय मूल के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ संजय घेमावत भी जेफ डीन के साथ जुड़े हैं। इसके अलावा एआई के जाने-माने शोधकर्ता ओरियोल विन्याल्स और क्वोक ले भी इस टीम का हिस्सा हैं। निवेश के क्षेत्र की प्रसिद्ध कंपनी खोसला वेंचर्स ने भी इस उद्यम का समर्थन किया है। कंपनी के संस्थापक विनोद खोसला ने टीम की उपलब्धियों को असाधारण बताते हुए कहा कि इतनी मजबूत तकनीकी टीम का साथ मिलना अपने आप में बड़ी बात है।

बता दें कि डिस्कवरी लूप को सार्वजनिक हित में काम करने वाली कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे एआई सिस्टम विकसित करना है, जो एक साथ हजारों वैज्ञानिक और अभियांत्रिकी प्रयोगों का सुझाव दे सकें, उन्हें पूरा कर सकें और उनके परिणामों का मूल्यांकन भी कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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Explained: ऋषभ पंत को नहीं मिल रही जमीन, उत्तराखंड में लैंड परचेज के क्या नियम, क्या UP-बिहार वाले ले सकते हैं?

ऋषभ पंत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से एक अपील की है. इस अपील में उन्होंने सीएम धामी से उत्तराखंड में सुविधाजनक और बड़ी जमीन दिलवाने में मदद करने की बात कही. साथ ही इसे सरकारी रेट पर खरीदने को भी कहा है. उन्होंने बताया कि वह पिछले 3 साल से जमीन ढूंढ रहे हैं, लेकिन अब तक नहीं मिल पाई है. क्या इसके पीछे कोई कानून है? क्या उत्तराखंड का भू-कानून नियम 2025 उनके जमीन खरीदने के आड़े आ रहा है? क्या कोई यूपी-बिहार या अन्य राज्यों से आए लोगों भी इस तरह का सामना करना पड़ता है? यहां हम आपको विस्तार से बता रहे हैं. Sat, 8 Aug 2026 09:14:27 +0530

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