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भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग 2047 तक 250 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। एफआईसीसीआई-डीयूए की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग 2047 तक 250 अरब डॉलर के अनुमानित बाजार आकार के साथ एक ग्लोबल पावरहाउस के रूप में उभरने की उम्मीद है।
यह रिपोर्ट मेडिकल इक्विपमेंट के रखरखाव के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और टिकाऊ इकोसिस्टम बनाने का एक व्यापक रोडमैप पेश करती है।
एफआईसीसीआई के साथ मिलकर डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स द्वारा आयोजित इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026 के उद्घाटन सत्र में जारी व्हाइट पेपर में कहा गया है कि भारत का मेडिकल डिवाइस सेक्टर, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 14 बिलियन डॉलर है, इस दशक में 30-50 बिलियन डॉलर तक पहुंचने और 2047 तक 250 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस कंसल्टिंग व्हाइट पेपर का शीर्षक है भारतीय हेल्थकेयर में मेडिकल इक्विपमेंट की सर्विसिंग और रखरखाव – एक सुरक्षित, भरोसेमंद और टिकाऊ मेडिकल डिवाइस रखरखाव इकोसिस्टम की ओर।
इसमें कहा गया है कि हेल्थकेयर की बढ़ती मांग, एडवांस्ड मेडिकल टेक्नोलॉजी को अपनाने में बढ़ोतरी, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के लिए सरकारी समर्थन और ग्लोबल मेडटेक हब बनने की देश की महत्वाकांक्षा से इस सेक्टर में तेजी से विकास होने की संभावना है।
व्हाइट पेपर के अनुसार, भारत ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम और मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री स्कीम को मजबूत करने जैसी पहलों के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं बढ़ी हैं और भारत की ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस में सुधार हुआ है।
हालांकि, रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि सेक्टर का लगातार विकास न केवल मैन्युफैक्चरिंग पर, बल्कि मेडिकल इक्विपमेंट की सर्विसिंग, रखरखाव, कैलिब्रेशन और लाइफसाइकिल मैनेजमेंट के लिए वर्ल्ड-क्लास इकोसिस्टम बनाने पर भी निर्भर करेगा।
रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि मेडिकल इक्विपमेंट आज आधुनिक हेल्थकेयर की रीढ़ हैं, जो समय पर बीमारी का पता लगाने, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, सर्जरी और एडवांस्ड इलाज में मदद करते हैं।
इसमें कहा गया है कि इन टेक्नोलॉजी की वैल्यू केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके ऑपरेशनल लाइफसाइकिल के दौरान भरोसेमंद सर्विसिंग पर भी निर्भर करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, सही रखरखाव से मरीजों की सुरक्षा बेहतर होती है, क्लिनिकल प्रभावशीलता बढ़ती है, इक्विपमेंट का डाउनटाइम कम होता है, इक्विपमेंट की उम्र बढ़ती है और हेल्थकेयर इन्वेस्टमेंट का सही इस्तेमाल होता है।
इन मुद्दों को हल करने के लिए, व्हाइट पेपर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) के डिवाइस क्लासिफिकेशन सिस्टम पर आधारित एक रिस्क-टियर्ड हाइब्रिड रखरखाव फ्रेमवर्क का प्रस्ताव करता है।
यह डिवाइस रिस्क कैटेगरी के आधार पर रखरखाव प्रोटोकॉल, सर्विस इंजीनियरों के लिए नेशनल सर्टिफिकेशन आर्किटेक्चर बनाने, टेक्निकल ट्रेनिंग को मजबूत करने, कमर्शियल मॉडल इनोवेशन को बढ़ावा देने और नियमों के अनुसार रखरखाव प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए फिस्कल फ्रेमवर्क को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश करता है।
रिपोर्ट इक्विपमेंट की विश्वसनीयता को बेहतर बनाने और डाउनटाइम को कम करने के लिए प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग और लाइफसाइकिल मैनेजमेंट सिस्टम सहित डिजिटल टेक्नोलॉजी को व्यापक रूप से अपनाने की भी वकालत करती है।
--आईएएनएस
एससीएच/पीएम
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