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ट्रंप का ईरान को 'अल्टीमेटम' या 'शांति प्रस्ताव'? 15 शर्तों के साथ युद्धविराम का प्लान, जानें क्या है अमेरिका की मांग
US-Iran War Ceasefire Plan: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष को रोकने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। 'द एसोसिएटेड प्रेस' (AP) और इजरायली मीडिया 'चैनल 12' की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव (15-Point Ceasefire Plan) भेजा है। इस प्रस्ताव को ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर ने तैयार किया है, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य और परमाणु केंद्र का कमर तोड़कर क्षेत्र में शांति स्थापित करना है।
एक तरफ शांति का हाथ, दूसरी तरफ '82nd एयरबोर्न' की तैनाती
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ अमेरिका 15 शर्तों के साथ बातचीत की मेज सजा रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध की तैयारी भी तेज है। पेंटागन अपनी '82nd एयरबोर्न डिवीजन' से लगभग 1,000 अतिरिक्त सैनिकों को तुरंत मध्य पूर्व भेज रहा है। इसके साथ ही, दो मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट्स के जरिए करीब 5,000 मरीन और हजारों नाविक भी तैनात किए जा रहे हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र में पहले से ही 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं।
युद्धविराम प्रस्ताव की सभी 15 प्रमुख शर्तें (15-Point Proposal)
प्रस्ताव के अनुसार, ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए निम्नलिखित शर्तों का पालन करना होगा:
- परमाणु क्षमता का पूर्ण विनाश: ईरान को अपनी वर्तमान की सभी परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह से नष्ट करना होगा।
- परमाणु हथियार पर आजीवन प्रतिबंध: ईरान को भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने की लिखित प्रतिबद्धता देनी होगी।
- यूरेनियम संवर्धन पर रोक: ईरानी क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की अनुमति नहीं होगी।
- भंडार की वापसी: 60 प्रतिशत तक संवर्धित लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार तुरंत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना होगा।
- नतांज परमाणु केंद्र: नतांज (Natanz) स्थित प्रमुख परमाणु सुविधा को पूरी तरह नष्ट या बंद करना होगा।
- इस्फ़हान केंद्र: इस्फ़हान (Isfahan) स्थित परमाणु प्रतिष्ठानों को भी पूरी तरह से हटाना होगा।
- फोर्डो परमाणु केंद्र: फोर्डो (Fordow) की विवादित परमाणु साइट को पूरी तरह से समाप्त करना होगा।
- पूर्ण पारदर्शिता और IAEA एक्सेस: ईरान को अपनी सभी परमाणु गतिविधियों में IAEA को पूर्ण और बिना किसी बाधा के पारदर्शिता देनी होगी।
- क्षेत्रीय प्रॉक्सी वार का अंत: ईरान को मध्य पूर्व में सक्रिय अपने सभी प्रॉक्सी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह, हमास आदि) की गतिविधियों को रोकना होगा।
- मिलिशिया को समर्थन बंद: ईरान को सहयोगी मिलिशिया समूहों को मिलने वाली वित्तीय और सैन्य मदद तुरंत बंद करनी होगी।
- होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक शिपिंग के लिए 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बिना किसी शर्त और बाधा के हमेशा खुला रखना होगा।
- मिसाइल कार्यक्रम पर नकेल: ईरान के मिसाइल कार्यक्रम की रेंज (दूरी) और मात्रा पर सख्त सीमाएं लागू की जाएंगी।
- मिसाइल का सीमित उपयोग: भविष्य में ईरान मिसाइलों का उपयोग केवल और केवल आत्मरक्षा (Self-Defence) के लिए ही कर सकेगा।
- अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण: ईरान की सैन्य गतिविधियों की निगरानी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय टीम को स्थायी पहुंच देनी होगी।
- सुरक्षा गारंटी और समझौता: ईरान को अमेरिका और इजरायल के सभी घोषित सुरक्षा उद्देश्यों के साथ पूर्ण समन्वय करना होगा।
पाकिस्तान की भूमिका
इस प्रस्ताव ने इजरायली अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। तेल अवीव को उम्मीद थी कि अमेरिका सैन्य दबाव जारी रखेगा, लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा तेजी से 'सिद्धांतिक समझौता' (Framework Agreement) पेश करने से इजरायल थोड़ा असहज है। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने वाशिंगटन और तेहरान के बीच नई वार्ता की मेजबानी की पेशकश भी की है।
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