नई दिल्ली में जयशंकर ने ईरान के राजदूत से की मुलाकात, पश्चिम एशिया संकट पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में ईरान के राजदूत से मुलाकात की, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा केंद्रित रही।
मुलाकात के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “मंगलवार दोपहर भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली से मुलाकात की। पश्चिम एशिया के संघर्ष पर चर्चा की। इन चुनौतीपूर्ण समय में ईरान में भारतीयों को दिए गए समर्थन की सराहना करता हूं।”
पिछले सप्ताह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की, जिसमें क्षेत्रीय घटनाक्रम और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियन को ईद और नवरोज के शुभ अवसरों पर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने आशा व्यक्त की कि यह उत्सव का समय पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हालिया हमलों की निंदा की और कहा कि ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं। प्रधानमंत्री ने नौवहन की स्वतंत्रता की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खुले और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व को दोहराया। उन्होंने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ईरान के निरंतर सहयोग की सराहना भी की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात की और ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं। हमने आशा व्यक्त की कि यह त्योहार पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाएगा। क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं। नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री मार्गों को खुले और सुरक्षित रखने के महत्व को दोहराया। ईरान में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ईरान के सहयोग की सराहना की।”
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहा यह युद्ध एक गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर रहा है, जिसका भारत पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष से भारत के व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं और पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बाधित हो रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत ने सक्रिय कूटनीतिक प्रयास किए हैं। उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के अधिकांश देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो बार फोन पर बातचीत की है और भारत खाड़ी देशों के साथ-साथ ईरान, इजरायल और अमेरिका के संपर्क में लगातार बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाल करना है, और तनाव कम करने तथा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर विशेष रूप से चर्चा की गई है।
भारत के स्पष्ट रुख पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर हमले और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा डालना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि भारत ने नागरिकों, नागरिक ढांचे तथा ऊर्जा और परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर सभी हमलों का स्पष्ट रूप से विरोध किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस युद्ध में मानव जीवन को किसी भी प्रकार का खतरा मानवता के हितों के खिलाफ है, और इसलिए भारत का निरंतर प्रयास है कि सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान की ओर प्रेरित किया जाए।”
--आईएएनएस
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"सिर्फ दुश्मनों के लिए बंद है रास्ता...", ईरान ने भारतीय जहाजों के लिए दिखाई हरी झंडी
भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों की मौजूदगी और उनकी सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए प्रतिबद्ध है. जब उनसे पूछा गया कि फिलहाल वहां कितने भारतीय जहाज मौजूद हैं और उन्हें भारत की ओर आने के लिए कब क्लीयरेंस मिलेगा, तो उन्होंने कहा कि उनके पास जहाजों की सटीक संख्या की जानकारी तो नहीं है, लेकिन जिन मामलों की रिपोर्ट मिली है, उन पर लगातार फॉलोअप लिया जा रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि कुछ भारतीय जहाजों को पहले ही सेफ पैसेज (सुरक्षित रास्ता) दे दिया गया है और वे अपनी यात्रा पर आगे बढ चुके हैं.
आवाजाही में देरी के कारणों का खुलासा
राजदूत डॉ. फताली ने जहाजों के ट्रांजिट में होने वाली देरी के कारणों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही में जो भी रुकावट या देरी आ रही है, वह ईरान की ओर से जानबूझकर पैदा नहीं की गई है. बल्कि, यह उन स्थितियों की वजह से है जो ईरान के विरोधियों ने इस क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए पैदा की हैं. उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्र में बढते तनाव और विरोधी ताकतों की गतिविधियों के कारण समुद्री रास्तों के ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें आ रही हैं, जिसे सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं. ईरान का मानना है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा उनके लिए प्राथमिकता है, लेकिन बाहरी हस्तक्षेप इसमें बाधा डाल रहा है
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद नहीं है
ईरानी राजदूत ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह जलमार्ग सभी के लिए बंद नहीं है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह रास्ता खुला है, लेकिन कुछ देशों पर ईरान ने सख्ती बरती है. उन्होंने कहा कि केवल हमलावर देशों के जहाजों को ही यहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है. राजदूत ने साफ तौर पर अमेरिका और इजरायल (जायोनी शासन) का नाम लेते हुए कहा कि इन देशों के जहाजों के साथ-साथ उन देशों के जहाजों को भी रोका जा रहा है जो ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में शामिल हैं.
इंटरनेशनल लॉ और सेफ नेविगेशन पर ईरान का रुख
डॉ. फताली ने अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए कहा कि जो देश आक्रामकता या हमले में शामिल हैं, वे 'इनोसेंट पैसेज' (शांतिपूर्ण आवाजाही) के हकदार नहीं रह जाते हैं. इसीलिए उन्हें इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं दी जा रही है. हालांकि, उन्होंने दूसरे देशों को बडी राहत देते हुए कहा कि जिन देशों ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया है या हमले का समर्थन नहीं किया है, वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सेफ नेविगेशन यानी सुरक्षित आवाजाही का लाभ उठा सकते हैं. भारत के संदर्भ में ईरान का यह रुख सकारात्मक है, जिससे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद बढी है.
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