किस्मत नहीं, हिम्मत लिखती है कहानी, 99% लाकर चंद्रिका ने परिवार पर लगे 'कलंक' को मिटाया
राजस्थान के जालोर जिले की एक बेटी ने वह कमाल कर दिखाया है, जिसकी चर्चा आज पूरे प्रदेश में हो रही है. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 10वीं के नतीजों में चंद्रिका गोपालजी बिश्नोई ने 99 परसेंट नंबर लाकर जिले में टॉप किया है. यह कामयाबी इसलिए बहुत बड़ी और खास है क्योंकि चंद्रिका ने न केवल मुश्किल हालातों का सामना किया, बल्कि परिवार पर लगे 'दाग' को भी अपनी मेहनत की स्याही से धो डाला है. जालोर के चितलवाना उपखंड के एक छोटे से गांव 'परावा' की रहने वाली इस बेटी ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो विरासत में मिली बदनामी भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती.
पिता के 'पेपर लीक' कांड से नहीं टूटी हिम्मत
चंद्रिका की यह जीत कतई आसान नहीं थी. उनके पिता गोपाल सारण इस समय पेपर लीक मामले में जेल में बंद हैं. उन पर राजस्थान पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रहते हुए भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया था. घर की इन परेशानियों, आर्थिक तंगी और समाज में हुई बदनामी के बीच चंद्रिका ने हार नहीं मानी. उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि पिता के किए गए गलत कामों की सजा बच्चों के फ्यूचर को नहीं रोक सकती. चंद्रिका ने विपरीत हालातों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया और दिन-रात पढ़ाई में जुट गईं.
स्कूल में हमेशा रहीं अव्वल
चितलवाना के परावा गांव की रहने वाली चंद्रिका बचपन से ही पढ़ाई में बेहद होशियार रही हैं. सिवाड़ा स्थित सनराइज पब्लिक स्कूल के टीचर्स का कहना है कि जब से चंद्रिका ने 8वीं क्लास में एडमिशन लिया था, वे हमेशा अपनी क्लास में पहले नंबर पर रहीं. स्कूल के प्रधानाध्यापक बताते हैं कि उनकी लगन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी खूबी है. चंद्रिका रोजाना बस से स्कूल जाती थीं और घर आकर कई घंटों तक रेगुलर सेल्फ स्टडी करती थीं. उनकी इसी निरंतरता का नतीजा है कि आज उन्होंने 99 परसेंट का जादुई आंकड़ा छू लिया है.
परिवार का मिला भरपूर साथ
चंद्रिका की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा हाथ रहा है. उनके दादा पाबूराम सारण, जो खुद एक रिटायर्ड हेडमास्टर हैं, उन्होंने घर में हमेशा पढ़ाई का एक पॉजिटिव माहौल बनाए रखा. वहीं उनकी मां इंदुबाला ने एक साये की तरह हर कदम पर अपनी बेटी का हौसला बढ़ाया और उसे बाहरी दुनिया की बातों से बचाकर रखा. घर के बड़े-बुजुर्गों के मार्गदर्शन और मां के प्रोत्साहन ने चंद्रिका को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा, जिससे वह अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस कर सकीं.
पढ़ाई के साथ लेखन में भी है माहिर
आपको जानकर हैरानी होगी कि चंद्रिका सिर्फ पढ़ाई में ही तेज नहीं हैं, बल्कि वे एक टैलेंड राइटर भी हैं. इतनी कम उम्र में उन्होंने एक साल पहले “छू ले अब वो नभ, नभ दूर नहीं” नाम की एक प्रेरणादायक किताब लिखी है. यह किताब उनके बड़े सपनों, ऊंचे हौसलों और कभी न हार मानने वाली सोच को बयां करती है. आज पूरे गांव में जश्न का माहौल है और लोग चंद्रिका की इस जांबाजी को सलाम कर रहे हैं. चंद्रिका ने वाकई दिखा दिया है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, इंसान अपना भाग्य खुद लिख सकता है.
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पीएम मोदी ने टीबी उन्मूलन में प्रगति की सराहना की, जन भागीदारी पर दिया जोर
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को टीबी उन्मूलन में हुई प्रगति को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की भी तारीफ की।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा देश से टीबी को खत्म करने की दिशा में हुई प्रगति के बारे में लिखते हैं, जिसकी नींव ‘जन भागीदारी’ पर टिकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि भारत ने रिसर्च और डेवलपमेंट में लगातार निवेश किया है, अपनी साझेदारियों को मजबूत बनाया है और ‘मेड-इन-इंडिया’ टीबी डायग्नोस्टिक्स की एक पूरी श्रृंखला तैयार की है।
इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने विश्व टीबी दिवस के अवसर पर एक्स पर पोस्ट करके विस्तार से सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने लिखा, विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर, हम टीबी को खत्म करने और सभी के लिए, विशेष रूप से सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों के लिए, बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने ‘राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम’ के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति की है। इसके तहत रोकथाम, पहचान और उपचार के प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
उन्होंने आगे बताया, इस वर्ष की थीम, हां! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं। भारत के नेतृत्व में। जनभागीदारी की शक्ति से।, टीबी-मुक्त भविष्य के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता और विश्वास को दर्शाती है। सभी स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति उनकी अथक सेवा और करुणापूर्ण देखभाल के लिए हार्दिक आभार। आइए, हम सब मिलकर एक टीबी मुक्त भारत और एक स्वस्थ, सशक्त राष्ट्र के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य करते रहें।
वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एक्स पर लिखा, टीबी के खिलाफ भारत का अभियान सिर्फ एक जन-स्वास्थ्य प्रयास नहीं है। यह हमारे राष्ट्र की उस क्षमता का प्रमाण है, जिसके तहत हम एक ऐसे उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं जो लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करता है।
--आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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