ईरान ने भी मान ली अमेरिकी की ये बात, जानें युद्ध विराम पर क्या आया अपडेट
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक अहम खबर सामने आई है. दरअसल ये दावा किया जा रहा है कि युद्ध विराम को लेकर कोशिशें शुरू हो गई है. एक दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पांच दिन तक ईरान पर हमला न करने का ऐलान किया. इसके साथ ही उन्होंने ईरान से बातचीत का दावा किया. इस बीच एक और जानकारी सामने आई है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव मान लिया है.
मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में नई दिशा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, मोजतबा खामेनेई जिन्हें ईरान का नया सुप्रीम लीडर बताया जा रहा है, अमेरिका के साथ संवाद के लिए तैयार दिख रहे हैं. यह बदलाव तब आया है जब उनके पिता अली खामेनेई की 28 फरवरी को कथित अमेरिका-इजरायल संयुक्त हमले में मौत हो गई थी. यदि यह सच है, तो यह ईरान की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है.
बैक-चैनल बातचीत के दावे
इजरायली अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी मध्यस्थ स्टीव वीटकॉफ के बीच बातचीत हुई है. बताया गया कि इस बातचीत को तेहरान के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी भी प्राप्त थी, जिससे संकेत मिलता है कि बैक-चैनल कूटनीति शुरुआती चरण से आगे बढ़ रही है.
ट्रंप के बयान और युद्धविराम के संकेत
डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच “सकारात्मक और गहन बातचीत” हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि इस सकारात्मक माहौल को देखते हुए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले पांच दिनों के लिए रोक दिए गए हैं.
इसके अलावा, उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द खोलने की संभावना जताई और यहां तक कहा कि भविष्य में इसे अमेरिका और ईरान मिलकर प्रबंधित कर सकते हैं.
होर्मुज स्ट्रेट, वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है. यहां से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 फीसदी है.
इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है.
बढ़ता तनाव और अनिश्चित भविष्य
इस बीच, Israel में ईरान की ओर से किए गए हमलों में कई लोग घायल हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है. एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें हैं, तो दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर संघर्ष जारी है. इससे यह स्पष्ट होता है कि हालात अभी स्थिर नहीं हैं और किसी भी समय स्थिति और बिगड़ सकती है.
कूटनीति बनाम टकराव
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बयानबाजी और विरोधाभासी दावों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. जहां एक ओर संवाद की संभावना दिख रही है, वहीं दूसरी ओर अविश्वास और टकराव भी कायम है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश कूटनीति के रास्ते आगे बढ़ते हैं या फिर यह तनाव किसी बड़े संघर्ष में बदल जाता है.
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"पीपल सेंट्रिक ग्रीन बजट": शिक्षा मंत्री ने दिल्ली बजट 2026-27 की सराहना की
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश बजट 2026-27 को जनहितकारी हरित बजट बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह बजट जनता की आकांक्षाओं और शिक्षा क्षेत्र पर सरकार के विशेष ध्यान को दर्शाता है।
शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए सूद ने कहा कि कुल बजट में सबसे अधिक (18.64 प्रतिशत) यानी 19,148 करोड़ रुपए का आवंटन सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली की भाजपा सरकार आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में लगातार ठोस प्रयास कर रही है और विकसित दिल्ली संकल्प पत्र 2025 को जमीनी स्तर पर लागू कर रही है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है। यह बिजली, सड़क और परिवहन जैसे आर्थिक क्षेत्रों और शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल कल्याण जैसे सामाजिक क्षेत्रों दोनों की दिशा और स्थिति निर्धारित करता है।
सूद ने बताया कि जहां पिछली आम आदमी सरकार के कार्यकाल में 2024-25 का बजट 76,000 करोड़ रुपए था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1,00,000 करोड़ रुपए हो गया और अब 2026-27 में 1,03,700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो विकास पर सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाता है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय किसी भी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह 2024-25 में 15,089 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 28,115 करोड़ रुपए और 2026-27 में और बढ़कर 30,800 करोड़ रुपए हो गया, जो मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक विकास का संकेत देता है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, दिल्ली की जीडीपी वृद्धि दर 2025-26 में 8.53 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है। तुलनात्मक रूप से, 2024-25 में यह 6.21 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से कम थी। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि औसत मासिक आय 2024-25 में 23,676 रुपए से बढ़कर 2025-26 में 25,453 रुपए हो गई, जो 7.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है, यह स्पष्ट रूप से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार को प्रतिबिंबित करती है।
हालांकि, सूद ने इस बात पर जोर दिया कि जीडीपी वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय और पूंजीगत व्यय जैसे आर्थिक संकेतक तभी सार्थक होते हैं जब उनका लाभ आम नागरिक तक पहुंचता है।
--आईएएनएस
एमएस/
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