Death Signs in Garud Puran: मरने से पहले इंसान को दिखते हैं ये संकेत, गरुड़ पुराण में छिपे हैं जवाब
Death Signs in Garud Puran: सनातन धर्म में गरुड़ पुराण को जरूरी ग्रंथ माना गया है. इसमें मनुष्य के जीवन, जन्म, मृत्यु, आत्मा की यात्रा, पाप-पुण्य और कर्मों के फल के बारे में भी बताया गया है. माना जाता है कि इंसान को अपने कर्मों की सजा सिर्फ इस जीवन में नहीं मिलती है बल्कि मृत्यु के पश्चात भी भुगतनी पड़ती है. यही वजह है कि किसी व्यक्ति के देहांत के बाद घर में गरुड़ पुराण का पाठ कराया जाता है. इससे आत्मा को शांति मिलती है और सही मार्ग प्रशस्त होता है. गरुड़ पुराण ऐसा ग्रंथ है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मृत्यु अचानक कभी नहीं आती है. मौत से पहले हमेशा कुछ संकेत दिखते हैं, लोग अक्सर इन्हें सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं. आइए आपको आज इस खबर में बताते हैं कि मौत आने से पहले हमें क्या-क्या संकेत देती है किस्मत.
गरुड़ पुराण में बताए गए मौत के संकेत (Death Signs In Garud Puran)
1.सांस लेने में दिक्कत
कहते हैं कि जब इंसान का आखिरी समय आता है तो व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है. उसकी सांस लेने की गति बदल जाती है. उनकी श्वास प्रणाली कभी तेज तो कभी धीरे होने लगती है. कुछ लोगों को ऐसा महसूस होता है कि उनका मन दुनिया से हटकर कहीं और जा रहा है.
2.सपनों में अजीब संकेत दिखना
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि अंतिम समय आने से पहले इंसान को अजीबोगरीब सपने आने लगते हैं. वे प्रतीकात्मक सपने देखता है, जो मौत से संबंधित लगता है. उसे ऐसे सपने आते हैं जैसे कि दीया बुझ गया हो, अंधेरानुमा दृश्य दिखना. जीवन की लौ बुझ जाने जैसे संकेत सपनों में आना.
3.हथेली की रेखाओं का हल्का होना
गरुड़ पुराण में एक और संकेत बताया गया है, जो अंत समय में आता है. व्यक्ति को अपनी हाथों की हथेलियों की रेखाएं हल्की और धुंधली दिखने लगती है. इस संकेत को जीवन की ऊर्जा कम होने का लक्षण कहा जाता है.
4.अपनी परछाई न दिखना
कहते हैं कि यह संकेत सबसे खतरनाक होता है. माना जाता है कि जब इंसान की मृत्यु पास होती है तो व्यक्ति को पानी या तेल में अपनी छाया नहीं दिखाई देती है. इसे छाया का हमारे जीवन के साथ संबंध छूटने का संकेत कहते हैं.
5.आसपास अदृश्य शक्ति को देखना
गरुड़ पुराण की कुछ मान्यताओं के अनुसार, इंसान के अंत समय में व्यक्ति को अपने पूर्वजों की या किसी अदृश्य शक्ति के आसपास होने की उपस्थिति महसूस होती है. ऐसा आभास होना सही नहीं होता है. ये आत्मा के अगले सफर की तैयारी के सूचक माना जाता है.
6.अपनी नाक का न दिखना
गरुड़ पुराण की एक और धारणा भी लोगों के बीच मौजूद है. इसमें बताया जाता है कि व्यक्ति को अपनी नाक सही से नहीं दिखाई देती है. हालांकि, सामान्य स्थिति में रहने पर इंसान अपनी दोनों आंखों से अपनी नाक को देख सकता है लेकिन जब मृत्यु निकट होती है तो इसे देखना कठिन हो जाता है.
कुछ अन्य संकेत
- गरुड़ पुराण के अनुसार, सपनों में पूर्वजों को देखना भी मृत्यु के समीप होने का संकेत होता है.
- यदि किसी रात के समय ऐसी अनुभूति होती है कि उन्हें लेने यमदूत आ रहे हैं तो यह भी मौत का संकेत हो सकता है.
- अचानक अपने अच्छे-बुरे कर्मों की याद आना भी मृत्यु का संकेत हो सकता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
'धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलेगा', कन्वर्जन पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा, हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपनाने वाले ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं. ईसाई आदि, किसी अन्य धर्म में कन्वर्ट होने पर शख्स अपना अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा. ये ऐतिहासिक फैसला है सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी.के. मिश्रा और एन.वी.अंजारी की बेंच की ओर से सुनाया गया है. इसमें कहा गया कि ईसाई धर्म में कन्वर्ट होने वाला दलित व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का लाभ नहीं ले पाएगा.
कन्वर्जन पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलने वाला है. अगर कोई शख्स जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा अन्य किसी धर्म को मानता है तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता. अदालत ने साफ किया कि ईसाई बने शख्स को SC/ST एक्ट का लाभ नहीं मिलने वाला है.
ईसाई बनने पर SC का दर्जा खत्म हो जाएगा
सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय में कहा कि जो शख्स हिंदू धर्म से ईसाई में कन्वर्ट हो जाता है, उसे अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता है. वह SC/ ST Act, 1989 के तहत संरक्षण का दावा नहीं कर सकता है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस ए वी अंजारिया की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को जारी रखा. इसमें कहा गया था कि जो शख्स ईसाई धर्म अपना चुका है. इसके साथ सक्रिय रूप से उसका पालन करता है, वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं हो सकता है. पादरी चिंथदा आनंद के आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया.
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