एक तरफ ईरान के साथ अमेरिका इजराइल की भिड़ंत है तो दूसरी तरफ रूस ने पीएम मोदी को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। जी हां, इस साल पीएम मोदी का रूस दौरा संभव है और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने खुद इसकी जानकारी दी है। लावरोव ने इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स अ न्यू बाइलेट्रल एजेंडा (भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर) शीर्षक वाले सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि हम 2026 में प्रधानमंत्री मोदी के रूस दौरे का इंतजार कर रहे हैं। इस सम्मेलन को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी संबोधित किया है। यह रूस का स्ट्रेटेजिक सिग्नल है पूरी दुनिया को। मार्च 2026 में ठीक उसी वक्त जब भारत ने नॉर्थ ईस्ट में सिक्योरिटी थ्रेट को निपटा दिया। लावरोब ने बताया कि साल 2026 में हम प्रधानमंत्री मोदी का इंतजार कर रहे हैं।
अब यह बयान क्यों आया? दरअसल इसको गहराई से समझिए। पहले तो टाइमिंग देखिए। अमेरिकी ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के तहत इंडिया पर रशियन ऑयल खरीदने का टेरिफ थोप दिया गया। हालांकि बाद में हटा दिया गया। 50% लगाया था। यह पूरा भारत याद रखेगा। अब चीन भी ब्रिक्स में अपना दबदबा बढ़ा रहा है। लेकिन रूस क्या कह रहा है? वो कह रहा है कि हम भारत के साथ हैं। चाहे जो हो जाए। यह बयान इसलिए आया क्योंकि भारत रशियन ऑयल से 35% प्लस जरूरत पूरी करता है और पुतिन ने दिसंबर 2025 में भारत आकर फ्यूल शिपमेंट का बड़ा वादा किया था। लावरोव अब कह रहे हैं कि पीएम मोदी आएंगे तो नेक्स्ट लेवल डील्स होगी, न्यूक्लियर्स पर होगी, मून मिशन पर होगी, हथियारों पर होगी जिसमें S400 ब्रह्मोस अपग्रेडेड आकाश मिसाइल टेक ट्रांसफर पर चर्चा होगी। इंडिया सेल्फ रिलायंस आत्मनिर्भर के साथ रशिया जॉइंट प्रोडक्शन चाहता है। यूक्रेन वॉर में इंडिया न्यूट्रल रहा। रशिया को कभी साइड नहीं किया। यूएन में इंडिया ने डायलॉग की बात कही।
रूस इसे ट्रू फ्रेंडशिप मानता है। यही वजह है कि वह चीन को भी पीछे छोड़ चुका है। अब सबसे बड़ी बात यह है कि यह बयान तब सामने आया जब मार्च 2026 में भारत के एनआईए ने एक बहुत बड़ा काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन चलाया। 13 मार्च की रात को तीन अलग-अलग एयरपोर्ट पर छापेमारी की गई। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तीन यूक्रेनी नागरिक, लखनऊ एयरपोर्ट पर तीन यूक्रेनी नागरिक और कोलकाता एयरपोर्ट पर एक अमेरिकी नागरिक गिरफ्तार किया गया। पकड़ा गया। कुल सात विदेशी नागरिक गिरफ्तार हुए। यह लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। लेकिन उनका असली मकसद कुछ और ही था भारत के खिलाफ साजिश बुनना। एनआईए के मुताबिक यह लोग मिजोरम राज्य में बिना किसी रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट के घुसे। मिजोरम भारत बॉर्डर पर है और यह इलाका रिस्ट्रिक्टेड प्रोटेक्टेड है और वहां से उन्होंने अवैध रूप से बॉर्डर क्रॉस करके म्यांमार में प्रवेश किया। म्यांमार में जाकर उन्होंने जाति सशस्त समूहों को ट्रेनिंग भी दी। यह ग्रुप म्यांमार की मिलिट्री जुटा के खिलाफ लड़ रहे हैं और इनमें पीपल्स डिफेंस फोर यानी कि पीडीएफ जैसे संगठन भी शामिल है।
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इजरायली मीडिया ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तेहरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने के फैसले के बाद, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए 9 अप्रैल की संभावित तारीख तय की है। ट्रंप ने ईरानी बिजली और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों पर पांच दिन का विराम लगाते हुए तनाव कम करने के उद्देश्य से हुई "सकारात्मक" बातचीत का हवाला दिया। इजरायल के सबसे बड़े अखबारों में से एक, दैनिक येदियोथ अहरोनोथ ने एक अज्ञात सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया, "वाशिंगटन ने युद्ध समाप्त करने के लिए 9 अप्रैल को लक्ष्य तिथि निर्धारित की है, जिससे लड़ाई और बातचीत जारी रखने के लिए लगभग 21 दिन बचे रहेंगे।
अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की इसी महीने के अंत में राष्ट्रीय इजरायल पुरस्कार प्राप्त करने के लिए इजरायल यात्रा से पहले युद्ध समाप्त हो जाएगा। अज्ञात अधिकारी ने आगे कहा, "9 अप्रैल को युद्ध समाप्त होने से ट्रंप को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इजरायल पहुंचने और इजरायल पुरस्कार प्राप्त करने का मौका मिलेगा।
अमेरिका-ईरान वार्ता पाकिस्तान में होगी
द टाइम्स ऑफ इज़राइल ने एक अज्ञात इज़राइली अधिकारी के हवाले से बताया कि मध्यस्थ देश अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बैठक कराने की कोशिश कर रहे हैं - संभवतः इसी सप्ताह के अंत तक। हालांकि, इज़राइल को इन चर्चाओं या वाशिंगटन के ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़ से कथित संपर्कों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। क़लीबाफ़ ने इसमें शामिल होने से साफ इनकार करते हुए ट्रंप के दावों को वित्तीय बाज़ारों में हेरफेर करने के उद्देश्य से फैलाई गई "फर्जी खबर" बताया है।
व्हाइट हाउस का कहना है 'मामला संवेदनशील है
इस बीच, अमेरिकी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने उन खबरों पर अभी कोई पुख्ता बयान नहीं दिया है जिनमें दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, शांति मिशन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और व्यवसायी तथा अमेरिका के राष्ट्रपति के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। लीविट ने कहा कि व्हाइट हाउस द्वारा औपचारिक घोषणा होने तक इसे अंतिम नहीं माना जाना चाहिए। लीविट ने जवाब दिया, "ये संवेदनशील राजनयिक चर्चाएं हैं, और अमेरिका प्रेस के माध्यम से बातचीत नहीं करेगा। यह एक परिवर्तनशील स्थिति है, और बैठकों के बारे में अटकलों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि व्हाइट हाउस द्वारा औपचारिक घोषणा नहीं हो जाती।"
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