भारत बोला- FCRA भारत का आंतरिक मामला:दूसरे देश कमेंट न करें; अमेरिकी सांसद ने कहा था- ये बिल ईसाइयों पर सीधा हमला
भारत सरकार ने FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन) संशोधन विधेयक पर साफ कर दिया कि यह भारत का आतंरिक मामला है। किसी दूसरे देश को इस पर कमेंट करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों जिनमें अमेरिका भी शामिल है। वहां विदेशी फंड और विदेशी अंशदान को नियंत्रित करने के लिए कानून और नियम मौजूद हैं। दरअसल भारत ने अमेरिकी सांसद रिले मूर की टिप्पणी का जवाब दिया है। मूर ने 4 अगस्त को सोशल मीडिया X पर लिखा था कि FCRA बिल ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है। FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन) संशोधन विधेयक इसी साल बजट सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था। मानूसन सत्र में इस पर चर्चा होनी है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह चर्चा का जवाब दे सकते हैं। 4 अगस्त को अमेरिकी सांसद का पोस्ट, लिखा- बिल आया तो संबंध बिगड़ेंगे अमेरिकी सांसद रिले एम मूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ईसाई धर्म भारत में तब से मौजूद है। जब प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ दशकों बाद संत थॉमस मलाबार तट पर पहुंचे थे। लेकिन ईसाई धर्म के इस लंबे इतिहास के बावजूद, भारत की संसद FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन) कानून में ऐसा संशोधन करने पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की अनुमति मिल सकती है। यह ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है। यदि यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। FCRA क्या है, कानून क्यों बना, 2026 में क्या बदलाव, 3 सवाल-जवाब… सवाल-1: FCRA कानून में सरकार क्या बदलाव करना चाहती है और क्यों? जवाब: 1976 में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, यानी FCRA बनाया। मकसद- विदेशी ताकतें NGOs, शिक्षण संस्थानों और ट्रस्टों को पैसा देकर भारत के अंदरूनी मामलों को प्रभावित न कर सकें। 2010 में मनमोहन सिंह सरकार और 2020 में मोदी सरकार ने इसे और सख्त किया। जैसे- NGOs अब सिर्फ 20% विदेशी पैसा प्रशासनिक खर्च में लगा सकते हैं, पहले 50% की लिमिट थी। यह पैसा सिर्फ दिल्ली की एक तय SBI ब्रांच के खाते में ही आ सकता है। सब-ग्रांट पर भी रोक लगा दी गई, यानी बड़ी एनजीओ छोटी एनजीओं को फंड नहीं दे सकतीं। अब 2026 में सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए… 1. संस्थाओं को अपना काम और इलाका साफ बताना होगा: विदेशी पैसा किस खास काम के लिए और किस राज्य या UT में इस्तेमाल होगा। ये रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर लिखा जाएगा। पहले सामाजिक, धार्मिक जैसी ब्रॉडर कैटेगरी लिख दी जाती थी। ये नियम जून 2026 में लागू हो चुका है। 2. विदेशी चंदे से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकेगाः धार्मिक गतिविधियों की लिस्ट में कई काम जैसे- पूजा स्थल बनवाना, धार्मिक शिक्षा, सत्संग वगैरह करवाने की अनुमति है, लेकिन अब विदेशी पैसे से दूसरों का धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ये नियम भी जून 2026 में लागू हो चुका है। 3. रजिस्ट्रेशन नहीं, तो प्रॉपर्टी अथॉरिटी मैनेज करेगीः अगर किसी संस्था के FCRA रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म हो जाए, रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो जाए या रद्द हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी प्रॉपर्टीज की सुरक्षा, मैनेजमेंट और रखरखाव सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी करेगी। यही वो मुख्य प्रावधान है, जिसे FCRA संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। 25 मार्च को लोकसभा में विधेयक पेश हुआ था और अभी संसद में पास होना बाकी है। सरकार ने संशोधन विधेयक पेश करते हुए तर्क दिया था कि ये बदलाव FCRA के ऑपरेशनल गैप भरने के लिए किए जा रहे हैं। अब तक कोई साफ कानून नहीं था कि जब किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द या खत्म हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी संपत्ति और बचा पैसा किसके पास जाएगा? डेजिग्नेटेड अथॉरिटी इसी खाली जगह को भरती है। सरकार ने बताया कि उसका मकसद पूरी तरह पारदर्शिता, जवाबदेही व राष्ट्रीय सुरक्षा है। सवाल-2: ईसाई मिशनरीज और NGO’s इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? जवाब: संशोधन विधेयक को लेकर 3 चिंताएं हैं… 1. सालों पुरानी जमीन खोने का डर अगर NGO रजिस्ट्रेशन रिन्यू करवाने के लिए समय पर आवेदन नहीं भेजते हैं या गृह मंत्रालय से उनका आवेदन खारिज हो जाता है, तो संपत्ति सरकार की तरफ से नामित अधिकारी के पास चली जाएगी। NGO को डर है कि इससे सालों में तैयार किया गया इंफ्रास्ट्रक्चर उनके हाथ से निकल जाएगा। कैथोलिन बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने गृह मंत्री अमित शाह को विधेयक से जुड़ी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि NGO के कामकाज से जुड़े फॉर्म भरने में कुछ छोटी-मोटी गलतियां हो जाती है। ऐसी गलतियों पर लाइसेंस रद्द करने या संपत्ति जब्त करने जैसा सख्त एक्शन न लिया जाए। सिर्फ देश-विरोधी गतिविधियों पर ऐसा एक्शन हो। यह भी आशंका जताई जा रही है कि जिनका लाइसेंस बरसों पहले ही खत्म हो चुका, उन पर भी नियम लागू होगा। हालांकि गृह मंत्री शाह ने साफ कहा कि ये संशोधन रेट्रोस्पेक्टिव नहीं होंगे, यानी पुराने मामलों पर लागू नहीं होंगे। सवाल-3: क्या सरकार इसे पारित करा पाएगी? जवाब: FCRA संशोधन बिल एक सामान्य विधेयक है। इसे पास कराने के लिए सदन में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों का सिर्फ साधारण बहुमत, यानी 50%+1 की जरूरत है। लोकसभा में 543 सदस्य हैं। 3 सीटें खाली हैं। अगर सभी सदस्य मौजूद रहते हैं, तो बहुमत के लिए चाहिए 271 वोट। NDA के पास अभी 318 सीटें हैं। राज्यसभा में 245 सदस्य हैं। बहुमत के लिए 123 वोट चाहिए। NDA के पास 152 है। यानी दोनों सदनों में बिल पारित कराने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… क्या चर्च-मस्जिद की संपत्ति जब्त होगी, FCRA बिल पर अमेरिका तक में हंगामा; सरकार दुविधा में, क्या पास करा पाएगी विदेशी चंदे से जुड़े कानून में सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। विपक्षी नेताओं के साथ-साथ अमेरिका तक से ऐतराज आ रहा है। अमेरिकी सांसद रिले मूर ने तो कह दिया- ये ईसाइयों पर सीधा हमला है। रिपोर्ट्स हैं कि FCRA संशोधन बिल पर 12 अगस्त को चर्चा होगी, जिसका जवाब गृहमंत्री अमित शाह दे सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
कॉकरोच आंदोलन, PAK लिंक बताने वाले अमृतसर पुलिस कमिश्नर हटाए:आतंकी साजिश कहे जाने पर BJP ने बनाया था मुद्दा; नई पोस्टिंग नहीं दी
दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और आतंकी साजिश को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर को पंजाब सरकार ने हटा दिया है। गृह विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर उनका तबादला कर दिया। उनकी जगह डीआईजी बॉर्डर रेंज हरमनबीर सिंह को अमृतसर पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। 4 अगस्त को भुल्लर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने धरने के दौरान आतंकी हमले की साजिश रची थी। आरोपी ट्रेन से दिल्ली पहुंचे थे। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के निर्देश पर उन्हें पेट्रोल बम उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस की मौजूदगी के कारण वो साजिश को अंजाम नहीं दे सके। इसमें शामिल चार नाबालिगों समेत कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद BJP ने भुल्लर के वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर लिखा था कि गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने खुलासा किया कि इस प्रदर्शन के पीछे ISI समर्थित मॉड्यूल सक्रिय है। इस पर एक दिन पहले अमृतसर पुलिस ने स्पष्टीकरण दिया था। पुलिस ने कहा था कि सोशल मीडिया पर वायरल किए गए कुछ दावे और वीडियो भ्रामक हैं। उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। पूर्व पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर को आगामी आदेशों तक डीजीपी कार्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी नई तैनाती को लेकर अलग से आदेश जारी किया जाएगा। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने इस पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में तबादले की वजह प्रशासनिक आधार बताई गई है। BJP नेता रवनीत बिट्टू ने उठाए सवाल गुरप्रीत सिंह भुल्लर के अचानक तबादले के बाद सियासत गरमा गई है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एंव BJP नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर भुल्लर के तबादले के सवाल उठाए हैं। बिट्टू ने पूछा है कि क्या भुल्लर द्वारा जंतर-मंतर से जुड़ी कथित साजिश को लेकर किए गए खुलासों के बाद उनका तबादला किया गया है। IPS अधिकारी गुरप्रीत सिंह भुल्लर को हटाने का ऑर्डर… भाजपा के सोशल मीडिया हैंडल से यह पोस्ट शेयर की गई पंजाब पुलिस ने ये बातें बताईं… ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… CJP प्रोटेस्ट में ब्लास्ट की साजिश रच रही थी ISI:जंतर-मंतर पर पेट्रोल बम लेकर आए थे, पंजाब पुलिस ने 9 आरोपी पकड़े पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ चल रहे धरने के दौरान आतंकी हमले की साजिश रची थी। पंजाब पुलिस ने साजिश में शामिल चार नाबालिगों समेत कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
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