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हनुमान जी की जन्म कथा: सूर्य को निगलने चला था बाल हनुमान, इंद्र के वज्र से हुए थे मूर्छित

Hanuman ji janam katha: हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। वे भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार और पवनपुत्र के नाम से भी जाने जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म माता अंजनी और वानरराज केसरी के घर हुआ था। माता अंजनी ने पुत्र प्राप्ति की कामना से भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें यह दिव्य पुत्र प्राप्त हुआ। इसी वजह से हनुमान जी को अंजनी पुत्र भी कहा जाता है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, वायुदेव ने भी हनुमान जी के जन्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिस कारण उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है। यही वजह है कि हनुमान जी को असीम शक्ति, गति और बल का स्वामी माना जाता है।

सूर्य को फल समझकर निगलने चल पड़े बाल हनुमान
हनुमान जी के बचपन से जुड़ी एक बेहद रोचक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि बचपन में हनुमान जी बेहद चंचल और शक्तिशाली थे। एक दिन सुबह के समय जब सूर्य उदय हो रहे थे, तो बालक हनुमान ने आकाश में चमकते हुए लाल-सुनहरे सूर्य को देखा। उस समय उन्हें तेज भूख भी लगी हुई थी, और उन्होंने सूर्य को एक पका हुआ मीठा फल समझ लिया।

अपनी दिव्य शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए बाल हनुमान आकाश की ओर छलांग लगाकर उड़ चले, ताकि वे सूर्य को निगल सकें। उनकी यह छलांग इतनी तेज और शक्तिशाली थी कि वे कुछ ही क्षणों में सूर्य के करीब पहुंच गए।

इंद्र के वज्र प्रहार से हुए मूर्छित
बालक हनुमान को सूर्य की ओर बढ़ता देख संपूर्ण सृष्टि में हलचल मच गई। उसी समय राहु नामक ग्रह भी सूर्य को ग्रहण लगाने के लिए आगे बढ़ रहा था, लेकिन हनुमान जी को देखकर राहु घबरा गया और देवराज इंद्र के पास जाकर पूरी घटना बताई।

यह सुनकर देवराज इंद्र स्वयं अपने ऐरावत हाथी पर सवार होकर वहां पहुंचे। उन्होंने देखा कि एक बालक अपनी शक्ति से सूर्य को निगलने की कोशिश कर रहा है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए इंद्र ने बालक हनुमान को रोकने के लिए अपने वज्र का प्रहार कर दिया।

वज्र की चोट हनुमान जी की ठुड्डी पर लगी, जिसके कारण वे बेहोश होकर सीधे धरती पर आ गिरे। इसी दिव्य घटना के कारण ही उन्हें "हनुमान" नाम मिला, क्योंकि संस्कृत में "हनु" का अर्थ ठुड्डी होता है और इसी अंग पर चोट लगने से उनका यह नाम पड़ा।

पुत्र को मूर्छित देख क्रोधित हुए वायुदेव
जब वायुदेव ने देखा कि उनके पुत्र को वज्र प्रहार से मूर्छित कर दिया गया है, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। क्रोध में आकर उन्होंने संपूर्ण सृष्टि से वायु का प्रवाह रोक दिया, जिससे स्वर्ग, धरती और पाताल तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। बिना वायु के प्राणियों का जीवित रहना असंभव होने लगा।

इस भयावह स्थिति को देखकर सभी देवतागण अत्यंत चिंतित हो उठे। वे सभी मिलकर वायुदेव के पास पहुंचे और उन्हें शांत करने का प्रयास करने लगे। सभी देवताओं ने मिलकर बालक हनुमान को पुनः जीवित करने और उन्हें विशेष शक्तियां व वरदान देने का निश्चय किया।

देवताओं ने दिए अनेक दिव्य वरदान
देवराज इंद्र ने स्वयं हनुमान जी को यह वरदान दिया कि उनका वज्र अब कभी भी उन्हें हानि नहीं पहुंचाएगा। इसके साथ ही अन्य देवताओं ने भी बालक हनुमान को अनेक अद्भुत शक्तियां प्रदान कीं, जिनमें अमरता, अपार बल, इच्छानुसार रूप बदलने की क्षमता और अग्नि से न जलने जैसी दिव्य शक्तियां शामिल थीं।

इन वरदानों के फलस्वरूप वायुदेव का क्रोध शांत हुआ और सृष्टि में वायु का प्रवाह पुनः सामान्य हो गया। इसी घटना के बाद से हनुमान जी को अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का स्वामी भी माना जाने लगा।

भक्ति और शक्ति के प्रतीक बने हनुमान जी
हनुमान जी की यह बाल्यकाल की कथा उनकी असीम शक्ति, निडरता और दिव्यता को दर्शाती है। आगे चलकर यही बालक भगवान श्रीराम का परम भक्त बना और रामायण काल में अपनी अद्भुत शक्ति, बुद्धि और समर्पण के बल पर माता सीता की खोज से लेकर लंका दहन तक कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

आज भी हनुमान जी को संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है, और उनकी भक्ति करने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करने पर हर संकट दूर हो जाता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-कथाओं पर आधारित है। Haribhoomi.com किसी भी तरह की मान्यता या तथ्य की पुष्टि नहीं करती है। इन्हें केवल सूचना के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय, व्रत या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।

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  Sports

India vs Sri Lanka: कोलंबो में गेंदबाजों की कड़ी परीक्षा, Kuldeep और Jadeja ने अभ्यास मैच में कराई वापसी

श्रीलंका दौरे पर पहुंची भारतीय टीम ने अपने एकमात्र अभ्यास मैच की शुरुआत संघर्षपूर्ण अंदाज में की। कोलंबो के एनसीसी मैदान पर पहले दिन श्रीलंका ने आठ विकेट खोकर 363 रन बना लिए। दिन का खेल खत्म होने तक दिलुम सुदीरा एक रन और केसरा नुवंथा नौ रन बनाकर क्रीज पर मौजूद रहे। मुकाबले के पहले दिन बल्लेबाजों का दबदबा जरूर रहा, लेकिन भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने समय-समय पर विकेट लेकर टीम को वापसी भी कराई।

बता दें कि श्रीलंका की ओर से सात बल्लेबाजों ने 30 से अधिक रन बनाए और तीन खिलाड़ियों ने अर्धशतक लगाया, लेकिन कोई भी बल्लेबाज बड़ी शतकीय पारी नहीं खेल सका। सबसे ज्यादा 71 रन रविंदु रसान्था के बल्ले से निकले। मौजूद जानकारी के अनुसार, श्रीलंका की टीम ने पूरे दिन लगभग चार रन प्रति ओवर की रफ्तार से रन बनाए और भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा।

श्रीलंका की शुरुआत बेहद शानदार रही। सलामी बल्लेबाज निशान फर्नांडो और रविंदु रसान्था ने पहले विकेट के लिए 110 रन जोड़कर भारतीय गेंदबाजी की कड़ी परीक्षा ली। निशान फर्नांडो ने केवल 65 गेंदों में 66 रन बनाए। हालांकि दोनों बल्लेबाजों के बीच तालमेल की कमी के कारण रन आउट होने से उनकी पारी खत्म हो गई। इसके बाद भी श्रीलंका के बल्लेबाज लगातार छोटी-छोटी साझेदारियां बनाते रहे, लेकिन कोई भी जोड़ी बहुत बड़ी साझेदारी नहीं कर सकी।

भारतीय टीम की ओर से सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन स्पिन गेंदबाजों का रहा। कुलदीप यादव ने सबसे अधिक 18 ओवर गेंदबाजी की और दो महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। रवींद्र जडेजा ने भी अपनी सटीक गेंदबाजी से दो बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। वहीं मानव सुथार ने भी दो विकेट लेकर प्रभावित किया। तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ को एक विकेट मिला, जबकि एक बल्लेबाज रन आउट हुआ। दूसरी ओर मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और सारांश जैन को पहले दिन कोई सफलता नहीं मिल सकी।

यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए आगामी टेस्ट श्रृंखला की तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। भारतीय टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी शामिल हैं जिन्हें लाल गेंद के प्रारूप में ज्यादा अनुभव नहीं है। ऐसे में अभ्यास मैच का उद्देश्य खिलाड़ियों को मैच जैसी परिस्थितियों में खुद को परखने का अवसर देना भी है।

श्रीलंका की ओर से सोनल दिनुषा ने 52 रन और रमेश मेंडिस ने उपयोगी योगदान दिया। दोनों ने छठे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी की, लेकिन भारतीय स्पिनरों ने इस जोड़ी को भी ज्यादा देर तक टिकने नहीं दिया। दिन के अंतिम सत्र में भारत ने लगातार विकेट लेकर मेजबान टीम की रफ्तार पर कुछ हद तक रोक लगाई।

अब दूसरे दिन भारतीय टीम की कोशिश श्रीलंका क्रिकेट एकादश को जल्द समेटने की होगी, जबकि मेजबान टीम 400 रन के आंकड़े तक पहुंचने का प्रयास करेगी। ऐसे में मुकाबले का दूसरा दिन दोनों टीमों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
Fri, 07 Aug 2026 19:38:46 +0530

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