Responsive Scrollable Menu

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का असर! गोल्डमैन सैश ने 2026 के लिए कच्चे तेल के अनुमान में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की

नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। दुनिया के बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैश ने 2026 के लिए कच्चे तेल की कीमतों के अनुमान में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है। इसकी वजह ईरान के पास मौजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होना है।

गोल्डमैन सैश में एनालिस्ट डैन स्ट्रुवेन ने कहा कि 2026 में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का दाम औसत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जो कि पहले के अनुमान 77 डॉलर प्रति बैरल से 10.38 प्रतिशत अधिक है।

डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम औसत 79 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जो कि पिछले अनुमान 72 डॉलर प्रति बैरल से 9.72 प्रतिशत अधिक है।

यह संशोधन इस अनुमान पर आधारित है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग से तेल का प्रवाह अगले छह हफ्तों तक सामान्य क्षमता के केवल 5 प्रतिशत पर ही रहेगा, जिसके बाद अगले महीने धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगा।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने तेल बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है और अब यह चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और जिसका अंत भी नजर नहीं आ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सप्ताहांत में तेहरान को महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग को फिर से खोलने के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया, अन्यथा उन्हें अपने ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों का सामना करना पड़ेगा। इसके जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

गोल्डमैन सैश के अनुसार, अभूतपूर्व व्यवधान नीति निर्माताओं और निवेशकों को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संरचनात्मक कमजोरियों, विशेष रूप से मध्य पूर्व में उत्पादन और अतिरिक्त क्षमता के अत्यधिक संकेंद्रण का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए मजबूर कर सकता है।

एशिया में आपूर्ति की स्थिति कठिन होने के बावजूद, अमेरिका और यूरोप सहित ओईसीडी देशों की अर्थव्यवस्थाओं में कच्चे तेल का भंडार लगातार बढ़ रहा है, जो इस तथ्य को दर्शाता है कि संघर्ष शुरू होने से पहले वैश्विक आपूर्ति मांग से अधिक थी।

बैंक ने यह भी अनुमान लगाया है कि मध्य पूर्व में कच्चे तेल के उत्पादन में होने वाली हानि वर्तमान में 11 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़कर 17 मिलियन बैरल प्रति दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच सकती है।

सामान्य परिचालन फिर से शुरू होने के बाद चार सप्ताह में पूर्ण सुधार की स्थिति में, कुल संचयी हानि 800 मिलियन बैरल से अधिक होने की आशंका है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

Chaiti Chhath 2026: आज खरना के साथ छठ महापर्व का दूसरा दिन, छठी मैय्या की इस कथा के बिना अधूर है व्रत

Chaiti Chhath 2026: चैती छठ महापर्व का दूसरे दिन की शुरुआत हो चुकी है. इस दिन को खरना कहा जाता है. पहले दिन नहाय-खाय के साथ हुई थी. खरना के दिन व्रती अपने घर की साफ-सफाई करते हैं. शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा करते हैं. छठ माता को गुड की खीर, रोटी और मौसमी फलों का भोग लगाते हैं. इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे लंबे उपवास की शुरुआत होती है. अगर आप भी चैती छठ का व्रत रख रहे हैं तो इस त्योहार पर ये कथा जरूर पढ़ें.

छठ महापर्व से जुड़ी कथाएं

द्रिक पंचांग के अनुासार, साल में दो बार छठ का पर्व आता है. एक बार चैत्र माह में और दूसरा दिवाली के छह दिन बाद. छठ पर्व बड़े श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने वाला पर्व है. यह व्रत अत्यंत पुण्यदायक माना गया है. सूर्य उपासना का यह महापर्व चार दिनों तक चलता है, जिसमें नियम, संयम और शुद्धता का विशेष महत्व होता है. छठ पर्व का विशेष महत्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में देखने को मिलता है, जहां इसे बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया जाता है. इस पर्व में सूर्य देव की उपासना की जाती है, जिन्हें जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य का स्रोत माना जाता है.

पांडवों से जुड़ी कथा

छठ व्रत से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक कथा महाभारत काल से संबंधित मानी जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सारा राज्य हार गए थे, तब द्रौपदी ने कठिन परिस्थितियों में छठ व्रत का पालन किया था. 

द्रौपदी ने रखा था व्रत

पौराणिक कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हार गए और उन्हें वनवास झेलना पड़ा, तब वे अत्यंत कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे थे. एक राजा होने के नाते युधिष्ठिर के सामने सबसे बड़ी समस्या तब आई, जब वन में उनके आश्रम पर कई ऋषि-मुनि अतिथि बनकर आए. सीमित संसाधनों के कारण उनके भोजन और सत्कार की व्यवस्था करना उनके लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया.

अपने पतियों को इस प्रकार व्याकुल देखकर माता द्रौपदी बेहद चिंतित हो गईं. उन्होंने अपने कुल गुरु धौम्य ऋषि से विनम्र निवेदन किया कि वे ऐसा उपाय बताएं, जिससे उनके पतियों की परेशानियां दूर हों, उनका खोया हुआ सम्मान लौट आए और जीवन में फिर से सुख-समृद्धि आ सके.

द्रौपदी की प्रार्थना सुनकर गुरु धौम्य ने उन्हें 'रवि षष्ठी व्रत' की महिमा बताई, जिसे आज छठ पूजा के नाम से जाना जाता है. उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में भी इस व्रत को करने से कई लोगों के कष्ट दूर हुए हैं. उदाहरण के रूप में उन्होंने सुकन्या की कथा सुनाई, जिन्होंने इस व्रत के प्रभाव से अपने जीवन की सभी बाधाओं को दूर किया था.

गुरु के निर्देशों का पालन करते हुए द्रौपदी ने पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और शुद्धता के साथ सूर्य देव और षष्ठी माता की आराधना की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने पांडवों को ‘अक्षय पात्र’ प्रदान किया, जिससे भोजन की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो गई.

इस व्रत के पुण्य प्रभाव से अंततः पांडवों को शक्ति और सफलता प्राप्त हुई. उन्होंने युद्ध में विजय हासिल की और अपना खोया हुआ राज्य और वैभव पुनः प्राप्त किया. यही कारण है कि छठ व्रत को सुख, समृद्धि और संकटों से मुक्ति दिलाने वाला अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है.

राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी से जुड़ी कथा

छठ पूजा से जुड़ी एक और प्रसिद्ध पौराणिक कथा राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी के जीवन से संबंधित मानी जाती है. मान्यता है कि राजा प्रियव्रत को संतान सुख प्राप्त नहीं था, जिसके कारण वे और उनकी रानी बेहद दुखी रहते थे. संतान की इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने महर्षि कश्यप के मार्गदर्शन में यज्ञ करवाया.

यज्ञ संपन्न होने के बाद रानी मालिनी ने प्रसाद के रूप में खीर ग्रहण की, जिसके परिणामस्वरूप वे गर्भवती हुईं. लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने एक मृत शिशु को जन्म दिया. इस घटना से राजा प्रियव्रत गहरे शोक में डूब गए और निराश होकर अपने जीवन का अंत करने का विचार करने लगे.

इसी दौरान उनके सामने एक दिव्य देवी प्रकट हुईं. देवी ने स्वयं को ब्रह्मा जी की पुत्री और सृष्टि की छठी शक्ति बताते हुए कहा कि उन्हें षष्ठी देवी या छठी मैया के नाम से जाना जाता है. देवी ने राजा से कहा कि यदि वे सच्चे मन से उनकी पूजा-अर्चना करेंगे और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे, तो उन्हें संतान सुख अवश्य प्राप्त होगा.

देवी के निर्देशानुसार राजा प्रियव्रत ने षष्ठी तिथि को विधिपूर्वक षष्ठी देवी की पूजा की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्र रत्न का आशीर्वाद दिया.

तभी से छठी मैया की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी श्रद्धा और आस्था के साथ छठ पूजा के रूप में मनाई जाती है.

ये भी पढ़ें- Chaiti Chhath Puja Geet: ' कांच ही बांस के बहंगिया...', चैती छठ के दूसरे दिन खरना पर गाये शारदा सिन्हा का ये स्पेशल गीत

Continue reading on the app

  Sports

SA vs NZ: साउथ अफ्रीका ने 42 महीने बाद किया बड़ा कमाल, न्यूजीलैंड के खिलाफ जीती T20 सीरीज

South Africa win T20 Series: साउथ अफ्रीका ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 5वां T20 33 रन से जीता, उसी के साथ उसने सीरीज पर भी कब्जा कर लिया. साउथ अफ्रीका ने 3-2 से सीरीज जीती. Wed, 25 Mar 2026 15:17:16 +0530

  Videos
See all

War Update: इजरायल ने ईरानी हमलों के जवाबी कार्रवाई की खाई कसम | #mojtabakhamenei #worldwar3 #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-25T09:35:24+00:00

News Ki Pathshala Live : Iran के दनादन अटैक से हड़कंप ! | Iran America War | World News |Trump IIran #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-25T09:34:09+00:00

Nishikant Dubey: "Most Unserious लीडर ऑफ अपोजिशन हैं Rahul Gandhi"। Congress। BJP। #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-25T09:30:27+00:00

Isreal-Iran War:अमेरिका में ट्रंप के लिए खतरे की घंटी| Hormuz | Trump | Khamenei #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-25T09:30:33+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers