उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने तारिक रहमान से की मुलाकात, भारत-बांग्लादेश रिश्तों को आगे बढ़ाने पर हुई चर्चा
ढाका, 22 मार्च (आईएएनएस)। भारत के बांग्लादेश में उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की और उन्हें ईद की शुभकामनाएं दीं।
बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने ढाका में प्रधानमंत्री महामहिम तारिक रहमान के साथ गर्मजोशी से ईद की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया।”
मुसलमानों का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार ईद-उल-फितर शनिवार को पूरे बांग्लादेश में उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया।
शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह से मुलाकात की थी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में जयशंकर ने कहा, “बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह से मुलाकात की। हमारी बातचीत द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही।”
इस महीने की शुरुआत में भारत के उच्चायुक्त ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार के नवगठित मंत्रियों के साथ कई बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई।
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, प्रणय वर्मा ने स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर से मुलाकात की और स्थानीय शासन संरचनाओं तथा ग्रामीण विकास में सहयोग मजबूत करने जैसे साझा हितों के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की।
दोनों पक्षों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि सहकारिताओं और जमीनी स्तर पर वित्तीय सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई।
उच्चायुक्त ने रेखांकित किया कि भारत-बांग्लादेश संबंध लोगों के बीच के संबंधों पर आधारित हैं और भारत आपसी हित और पारस्परिक लाभ के आधार पर सभी क्षेत्रों में जन-केंद्रित सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक, रचनात्मक और दूरदर्शी तरीके से बांग्लादेश के साथ जुड़ने के लिए तैयार है।”
वर्मा ने मुक्ति संग्राम मामलों के मंत्री हाफिज उद्दीन अहमद से भी मुलाकात की और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान साझा बलिदानों पर आधारित दोनों देशों के मजबूत ऐतिहासिक संबंधों की पुष्टि की।
उच्चायोग ने कहा, “उन्होंने आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर मिलकर काम करने के महत्व को रेखांकित किया, ताकि दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संबंध और मजबूत हो सकें।”
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियां बढ़ा रही भारत से रिश्तों में तनाव : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 22 मार्च (आईएएनएस)। कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्वों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है। भारत की ओर से लगातार उठाई जा रही चिंताओं के बीच अब कनाडा पर दबाव बढ़ रहा है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए होने से रोके।
यह मुद्दा भारत और कनाडा के संबंधों में लंबे समय से तनाव का कारण बना हुआ है। नई दिल्ली बार-बार खालिस्तान समर्थक समूहों की ओर से आयोजित कार्यक्रमों, प्रचार और भारतीय कूटनीतिक मिशनों को निशाना बनाने को लेकर चिंता जताती रही है।
खालसा वॉक्स में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि ओटावा अब खालिस्तान की मांग करने वाले उग्रवादी तत्वों की गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं कर सकता और, उसे हिंसा और डर फैलाने वाले नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने चाहिए।
टिप्पणी में कहा गया कि यह मुद्दा वैध राजनीतिक अभिव्यक्ति को सीमित करने का नहीं है, बल्कि उन व्यक्तियों और संगठनों से निपटने का है जो हिंसा का महिमामंडन करते हैं, धमकियां देते हैं और प्रवासी समुदाय के कुछ वर्गों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश करते हैं।
इसमें यह भी कहा गया कि हाल के वर्षों में भारतीय राजनयिकों और संस्थानों के खिलाफ उग्रवादी बयानबाजी और अभियान जारी रहे हैं, जिससे इन गतिविधियों के प्रति कनाडा की प्रतिक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
लेख में यह भी जोर दिया गया कि कनाडा में रहने वाले अधिकांश सिख अलगाववादी उग्रवाद का समर्थन नहीं करते हैं। पूरे समुदाय को कुछ चरमपंथी तत्वों के साथ जोड़ना गलत और हानिकारक होगा।
टिप्पणी के अनुसार, उग्रवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई न करने से उन्हें लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दुरुपयोग कर विभाजनकारी और हिंसक एजेंडा फैलाने का मौका मिल सकता है, जिससे द्विपक्षीय संबंध भी प्रभावित होते हैं।
भारत ने कई मौकों पर विदेशों में सक्रिय खालिस्तान समर्थक संगठनों की गतिविधियों को लेकर अपनी चिंता जताई है और कनाडा से ऐसे समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
लेख में कहा गया कि उग्रवादी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने से न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा होगी, बल्कि भारत और कनाडा के संबंधों में भरोसा बहाल करने में भी मदद मिल सकती है।
इसमें यह भी कहा गया कि इस मुद्दे को सख्ती से संबोधित करने से यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि हिंसा और धमकी की वकालत का लोकतांत्रिक समाज में कोई स्थान नहीं है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation




















