हिमाचल-पूर्व CPS के सरकारी बंगले पर हाईकोर्ट सख्त:सरकार ने बिना आवेदन आवास रेगुलर किए, कोर्ट ने जताई नाराजगी; मुख्य सचिव से जवाब तलब
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) की नियुक्तियां रद्द होने के बावजूद इन्हें सरकारी बंगले दे रखे है। हाईकोर्ट ने इस पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि इन्होंने सरकारी आवास के लिए आवेदन भी नहीं किया, फिर भी सरकार ने 4 मई, 2026 को इनका ठहराव रेगुलर कर दिया है। चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की बैंच ने मुख्य सचिव को हलफनामा देने के निर्देश दिए है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि मानो मुझे चेहरा दिखाओ, मैं तुम्हें नियम दिखा दूंगा की नीति पर काम हो रहा है। इन नियमों के तहत दिए आवास सरकार ने सरकारी आवास आवंटन (जनरल पूल) नियम 1994 के नियम 24 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए 14 नवंबर 2024 से सामान्य लाइसेंस शुल्क पर पूर्व सीपीएस के इन आवासों में उनके प्रवास को नियमित कर दिया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि पूर्व सीपीएस को विशेष छूट देने वाले चार मई के फैसले पर क्यों न रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट ने नोट किया कि यदि इस संबंध में नोटिस जारी न किया होता तो सरकार इस पूरे मुद्दे को कालीन के नीचे दबाए रखती। वर्ष 2023 में नियुक्त किए थे छह सीपीएस दरअसल, हिमाचल में 8 जनवरी 2023 को कांग्रेस के छह विधायक सीपीएस नियुक्त किए गए। इनमें कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर, रोहडू से मोहन लाल ब्राक्टा, अर्की से संजय अवस्थी, पालमपुर से आशीष बुटेल, दून से राम कुमार चौधरी और बैजनाथ से किशोरी लाल शामिल हैं। भाजपा और दो अन्य ने इन नियुक्तियों को संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने रद्द की थी सीपीएस की नियुक्तियां कोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने सभी छह सीपीएस की नियुक्ति को असांविधानिक करार देते हुए रद्द कर उनसे सभी सरकारी सुविधाएं वापस लेने का आदेश दिया था। 22 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के कुछ हिस्सों पर अंतरिम राहत दी, लेकिन मुख्य संसदीय सचिव का पद बहाल नहीं हुआ। अब इस मामले में अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
120 साल पुराना स्कूल, पहाड़ की चोटी पर आज भी गूंजती है बच्चों की पढ़ाई, राजा मोहन सिंह ने कराया था निर्माण
एमपी के छतरपुर जिले के सीमा से लगे यूपी बार्डर में बसा श्रीनगर गांव(महोबा जिला) जहां आज भी आजादी के पहले का विद्यालय मौजूद है. इस विद्यालय का इतिहास 120 साल पुराना बताया जाता है. इस विद्यालय का इतिहास बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल के परिवार से माना जाता है.
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