US-Iran War: अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के खिलाफ इस मुस्लिम देश का बड़ा एक्शन, उठाया ये सख्त कदम
US-Iran War: अमेरिका और इजरायल ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं. जिसके बदले में ईरान इजरायल और मध्य पूर्व के देशों को निशाना बना रहा है. इनमें ईराक, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब भी शामिल हैं. खाड़ी के देशों पर हो रहे हमलों के चलते पूरा मध्य पूर्व युद्ध की आग में जल रहा है. इस बीच सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. दरअसल, सऊदी अरब ने ईरान के दूतावास में तैनात सैन्य अटैशे समेत पांच ईरानी राजनयिकों को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' यानी अवांकछित व्यक्ति घोषित किया है. इसके साथ ही उन्हें 24 घंटे के भीतर सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया है. बता दें कि इससे पहले कतर भी ईरानी सैन्य अटैशे को देश से निकाल चुका है.
सऊदी अरब ने की ईरानी हमलों की निंदा
इसके साथ ही सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने ईरान द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों की निंदा की. सऊदी विदेश मंत्रालय ने ईरानी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का घोर उल्लंघन बताया. विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि ये हमले "इस्लामी भाईचारे" के मूल्यों और इस्लामी आस्था के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं.
सऊदी अरब ने दी ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी
बता दें कि सऊदी अरब ने ईरानी राजनयिकों का निष्कासन ऐसे समय में हुआ है जब उसने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. सऊदी अरब ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि ईरान की कार्रवाइयां संघर्ष को और बढ़ा सकती हैं और वर्तमान एवं भविष्य में राजनयिक संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. सऊदी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा कि, "सऊदी अरब अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा. यह अनुच्छेद राष्ट्रों को आत्मरक्षा का अधिकार देता है."
ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले जारी
बता दें कि राजनयिकों के निष्कासन के कुछ घंटों बाद, सऊदी अरब ने ईरान से नए सैन्य खतरों की सूचना दी. सऊदी अरब ने पूर्वी क्षेत्र में कई ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया गया साथ ही राजधानी रियाद की ओर दागी गई तीन मिसाइलों की भी सूचना मिली. इनमें से एक मिसाइल को रोक लिया गया, जबकि अन्य दो निर्जन इलाकों में गिरी, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ. देश में बढ़ते खतरों के बावजूद, सऊदी अरब ने अपने क्षेत्र और नागरिकों की रक्षा के अपने संकल्प को दोहराया है. सऊदी अरब ने साफ कहा है कि वह अपने हवाई क्षेत्र, निवासियों और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे की कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा.
विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद भारतीय शेयर बाजारों में 'संरचनात्मक लचीलापन'
नई दिल्ली, 22 मार्च (आईएएनएस)। विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय इक्विटी बाजार तीव्र वैश्विक मैक्रो आर्थिक दबावों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के बावजूद “संरचनात्मक मजबूती” दिखा रहे हैं।
20 मार्च को समाप्त सप्ताह के लिए, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के बीच लगातार ‘रिस्क-ऑफ’ भावना देखी गई, जिसमें साप्ताहिक शुद्ध निकासी 29,718.9 करोड़ रुपये रही।
इस बड़े पैमाने पर निकासी और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में उछाल के कारण भारतीय रुपया दबाव में आ गया और अस्थायी रूप से 93.71 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।
वेंचुरा के रिसर्च प्रमुख विनीत बोलिंजकर ने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि निफ्टी ने अपनी मजबूती बनाए रखी और 23,114.50 (+0.49 प्रतिशत) पर बंद हुआ, क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 30,269.23 करोड़ रुपये की साप्ताहिक शुद्ध खरीद के साथ एक मजबूत संतुलनकारी भूमिका निभाई।”
बाजार सप्ताह के अंत में लगभग सपाट रुख के साथ नकारात्मक झुकाव में बंद हुआ, जो निवेशकों में सतर्कता को दर्शाता है। पहले तीन सत्रों में सकारात्मक रुख रहा, लेकिन गुरुवार को तेज गिरावट ने बढ़त को मिटा दिया, जिसके बाद अंतिम सत्र में उतार-चढ़ाव देखा गया।
परिणामस्वरूप, निफ्टी 0.16 प्रतिशत गिरकर 23,114.50 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.04 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74,532.96 पर आ गया।
शुरुआती सत्रों में होरमुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही आंशिक रूप से बहाल होने से बाजार भावनाओं को समर्थन मिला।
रिलायंस ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा, “हालांकि, इज़राइल द्वारा ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले के बाद बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर से लगभग 119 डॉलर प्रति बैरल के हालिया उच्च स्तर के करीब पहुंचा दिया। हालांकि बाद में कीमतों में थोड़ी नरमी आई, लेकिन वे अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।”
इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार कमजोरी और विशेष रूप से अमेरिका से कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी दबाव बढ़ाया।
यह पूरे सप्ताह एफआईआई की लगातार निकासी में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
कमजोर निवेशक भावना, एफआईआई की निरंतर निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए निवेशकों को सतर्क और चयनात्मक रणनीति अपनानी चाहिए। विश्लेषकों ने कहा कि निवेश का झुकाव मजबूत मूलभूत आधार वाले लार्ज-कैप शेयरों और स्थिर आय वाले क्षेत्रों की ओर होना चाहिए।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास उतार-चढ़ाव में बना हुआ है, जबकि इंडिया वीआईएक्स का 22.81 पर स्थिर होना यह संकेत देता है कि बाजार में एक आधार बन रहा है।
बाजार विशेषज्ञों ने कहा, “हम 22,800 से 23,300 के बीच सीमित दायरे में बाजार रहने की उम्मीद करते हैं, जिसमें सकारात्मक रुख तभी संभव है जब वैश्विक ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आए और मुद्रा में उतार-चढ़ाव कम हो।”
--आईएएनएस
पीएम
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