झारखंड में उत्साह से मनाया गया प्रकृति पूजा का महापर्व ‘सरहुल’, सीएम हेमंत सोरेन ने पत्नी संग की पूजा-अर्चना
Jharkhand News: झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी हुई है. इन्हीं परंपराओं में सरहुल एक बेहद महत्वपूर्ण और खास पर्व है, जिसे प्रकृति पूजा का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. हर साल की तरह इस वर्ष भी 21 मार्च को पूरे राज्य में सरहुल बड़े उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यवासियों को शुभकामनाएं दीं और रांची के सिरमटोली पहुंचकर अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ पूजा-अनुष्ठान में भाग लिया.
रांची में प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम... https://t.co/gPM7Y6n0qc
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) March 21, 2026
सीएम ने साझा की तस्वीरें
सीएम हेमंत सोरेन ने इस पर्व की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि सरहुल हमें प्रकृति के साथ हमारे गहरे और अटूट संबंध की याद दिलाता है. यह पर्व हमें सिखाता है कि मानव जीवन और सभी जीव-जंतुओं का अस्तित्व प्रकृति से जुड़ा हुआ है, इसलिए हमें इसे सहेजना और संरक्षित करना चाहिए.
निश्चित रूप से यह परंपरा हमें प्रकृति के साथ हमारे अटूट संबंध की याद दिलाती है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जो मानव जीवन और समस्त जीव-जंतुओं के अस्तित्व से जुड़ी हुई है।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) March 21, 2026
यहीं से हमारी जीवन यात्रा प्रारंभ होती है और अंततः हम इसी प्रकृति में विलीन हो जाते हैं।
आज, हम सब इस प्रकृति के… pic.twitter.com/UnYoFh6jhb
सरहुल पर्व के बारे में जानकारी
सरहुल पर्व को सूरज और पृथ्वी के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है. इस दिन साल वृक्ष की विशेष पूजा की जाती है और गांव के पाहन (पुजारी) सरना स्थल पर विधि-विधान से पूजा करते हैं. इस पर्व से जुड़ी एक खास परंपरा बारिश की भविष्यवाणी की भी है. पूजा के बाद मिट्टी के बर्तन में रखे पानी को देखकर अनुमान लगाया जाता है कि आने वाले समय में वर्षा कैसी होगी. पानी कम होने पर कम बारिश और समान रहने पर अच्छी बारिश की संभावना मानी जाती है.
आज भी हमारी सभ्यता इस परंपरा को गाँव-गाँव और दूर-दराज क्षेत्रों तक जीवित रखे हुए है।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) March 21, 2026
लोग एकत्रित होकर अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रख रहे हैं।
आइये, इसी संकल्प के साथ, हम यह सुनिश्चित करें कि यह अमूल्य परंपरा आगे भी सशक्त… pic.twitter.com/F5sKF02fab
रांची में सरहुल शोभा यात्रा की शुरुआत 1967 में कार्तिक उरांव के नेतृत्व में हुई थी, जिसका उद्देश्य आदिवासी संस्कृति और जमीन की रक्षा करना था. आज यह पर्व पूरे झारखंड में एकता, संस्कृति और प्रकृति प्रेम का प्रतीक बन चुका है.
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ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को बताया युद्ध रोकने का फॉर्मूला! की ये खास मांग
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. दोनों नेताओं के बीच यह हालिया संघर्ष के बाद दूसरी चर्चा है, जो इस बात का संकेत है कि भारत इस संकट को लेकर लगातार सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है. खास बात यह है कि इस बातचीत में ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को युद्ध रोकने का फॉर्मूला बताते हुए खास मांग की है.
क्षेत्रीय सुरक्षा फ्रेमवर्क का प्रस्ताव
ईरान की ओर से यह भी प्रस्ताव रखा गया कि पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय देशों को शामिल कर एक संयुक्त सुरक्षा ढांचा तैयार किया जाए. इसका उद्देश्य सहयोग के माध्यम से स्थायी शांति स्थापित करना और बाहरी हस्तक्षेप को सीमित करना होगा. यही नहीं ईरान ने पीएम मोदी के एक खास मांग भी की. उन्होंने कहा कि तत्काल आक्रामकता समाप्त करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस गारंटी दी जाए.
परमाणु नीति पर ईरान का रुख
बातचीत में ईरान ने अपनी परमाणु नीति को लेकर भी स्पष्ट रुख दोहराया. पेजेश्कियान ने बताया कि अयातुल्ला अली खामेनेई ने परमाणु हथियारों के खिलाफ सख्त निर्देश दिए थे और ईरान इसी सिद्धांत का पालन करता रहा है.
शांति और स्थिरता पर जोर
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि युद्ध किसी भी पक्ष के हित में नहीं है. उन्होंने सभी देशों से संयम बरतने और तत्काल शांति की दिशा में कदम उठाने की अपील की. इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया.
मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि मौजूदा समय में संवाद और सहयोग ही इस संकट का स्थायी समाधान निकाल सकते हैं.
ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट पर चिंता
प्रधानमंत्री ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता जताई. यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है.
भारत की ऊर्जा जरूरतें भी इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं. मौजूदा हालात में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है.
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर आभार
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान सरकार की ओर से किए जा रहे सहयोग की सराहना की. उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस बातचीत का जिक्र करते हुए ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र में शांति की कामना की.
हमलों की निंदा और वैश्विक चिंता
मोदी ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों, खासकर ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि ऐसे हमले न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं.
वहीं, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को 'अमानवीय और गैरकानूनी' करार देते हुए तत्काल आक्रामकता समाप्त करने की मांग की.
भारत की संतुलित भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका संतुलित और जिम्मेदार दिखाई दे रही है. प्रधानमंत्री मोदी उन चुनिंदा वैश्विक नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने इस संकट के दौरान संवाद बनाए रखा है. भारत की यह पहल न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.
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