Exim Bank संभालेगा निर्यातकों की ब्याज सहायता योजना, DGFT ने दी मंजूरी
नयी दिल्ली, सात अगस्त निर्यात संवर्धन मिशन के तहत निर्यात-पूर्व और निर्यात-पश्चात ऋण पर ब्याज सहायता योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अब भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एक्जिम बैंक) निभाएगा। वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को यह बात कही। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा कि ब्याज सहायता योजना को शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से प्रायोगिक आधार पर लागू किया गया था।
योजना की संचालन समिति की बैठक में लिए गए संस्थागत बदलाव के निर्णय के बाद, एक अप्रैल 2026 से योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी आरबीआई से भारतीय निर्यात-आयात बैंक को सौंपने की औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, एक अप्रैल 2026 से योजना के संचालन, पोर्टल प्रबंधन, सत्यापन और दावों के निपटान से जुड़े सभी कार्यों की जिम्मेदारी एक्जिम बैंक के पास होगी। हालांकि, भागीदारी करने वाले बैंकों के जनवरी-मार्च 2026 तिमाही से संबंधित अतिरिक्त या पूरक दावों का निपटारा आरबीआई ही करेगा।
Delhi HC ने FSSAI के 100 प्रतिशत दावा बैन आदेश पर लगाई रोक, Dabur को राहत
नयी दिल्ली, सात अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को खाद्य नियामक एफएसएसएआई के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें डाबर इंडिया को शहद, गाय का घी और खाद्य तेल जैसे उत्पादों को 100 प्रतिशत दावों के साथ बेचने से प्रतिबंधित किया गया था। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि डाबर लंबे समय से इन उत्पादों की बिक्री कर रही है और प्रथम दृष्टया उसे राहत देने का मामला बनता है, क्योंकि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आदेश पारित करने से पहले कंपनी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया था। न्यायमूर्ति महाजन ने कहा, “न्यायालय का प्रथम दृष्टया यह मत है कि सुनवाई का अवसर दिए बिना प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए था।
अगली सुनवाई तक विवादित आदेश पर रोक रहेगी।” इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध की है। डाबर की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि एफएसएसएआई का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई के पारित किया गया है। वहीं, केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने खाद्य नियामक के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि कंपनी को पहले ‘सुधार नोटिस’ एवं परामर्श जारी किए गए थे तथा उसके उत्पादों पर 100 प्रतिशत का दावा भ्रामक है।
एफएसएसएआई ने सोमवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है, जिन पर 100 प्रतिशत जैसे भ्रामक दावे किए गए हैं। इनमें शहद, सेब का सिरका, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं।
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