मध्य प्रदेश में घूसखोरों पर लगातार हो रहे एक्शन के बाद भी रिश्वतखोरी कम नहीं हो रही, इस बार लोकायुक्त पुलिस की टीम ने बिजली कंपनी के लाइनमेन (हेल्पर) को रंगे हाथ पकड़ा है वो एक आवेदक से आटा चक्की में मीटर लगाने के बदले 5000/- रुपये रिश्वत ले रहा था।
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक ग्वालियर निरंजन शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि अशोकनगर जिले के ग्राम कुकरेथा तहसील पिपरई के रहने वाले किसान श्रीराम बैरागी ने एक शिकायती आवेदन दिया था जिसमें उन्होंने बिजली कंपनी के लाइनमेन पर 10,000 /- रुपये रिश्वत मांगने के आरोप लगाये थे।
आवेदक श्रीराम बैरागी ने 3 अगस्त को दिए आवेदन में बताया कि वो किसान है और गांव में ही आटा चक्की लगाकर आय का एक और स्रोत बना रहा है, उसके लिए मीटर लगाने हेतु उसने बिजली कंपनी प्रबंधक अशोकनगर के कार्यालय में आवेदन दिया था यहां पदस्थ लाइनमेन बाबूराम पटेल ने उससे मीटर लगाने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।
शिकायत सत्यापन के दौरान ही ले लिए 5000/- रुपये
रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मिलने के बाद इसका सत्यापन कराया गया, एसपी के निर्देश पर जब शिकायत का सत्यापन कराया गया तो उसने इसी दौरान आवेदक से 5000/- रुपये ले लिए और शेष राशि 5000/- आज देने के लिए कहा, लोकायुक्त ग्वालियर की टीम उसे लेकर अशोकनगर पहुंची।
लोकायुक्त पुलिस ग्वालियर की टीम ने रंगे हाथ पकड़ा
ट्रैप प्लान के तहत टीम ने शिकायतकर्ता किसान श्रीराम बैरागी को बिजली कंपनी प्रबंधक कार्यालय अशोकनगर में भेजा, वहां लाइनमेन ने उसे बिल काउंटर कक्ष में बुलाया और 5000/- रुपये ले लिए , उसने जैसे ही रिश्वत की राशि ली लोकायुक्त पुलिस की टीम ने उसे दबोच लिया। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर जाँच में ले लिया है।
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शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कामकाज पर चर्चा की, जहाँ अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। न तो बादल और न ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कोई बयान जारी किया है, लेकिन इस बैठक से नई अटकलें शुरू हो गई हैं कि अकाली दल एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन कर सकता है और नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल हो सकता है।
अकाली दल और BJP लंबे समय से सहयोगी रहे थे, लेकिन सितंबर 2020 में खेती से जुड़े तीन विवादित कानूनों को लेकर मतभेदों के कारण वे अलग हो गए थे; इन कानूनों को बाद में केंद्र सरकार ने वापस ले लिया था। उन्होंने छह लोकसभा (1998, 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019) और पांच पंजाब विधानसभा चुनाव (1997, 2002, 2007, 2012 और 2017) एक साथ लड़े हैं। 2022 के पंजाब चुनावों में, जब दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा, तो अकाली दल का प्रदर्शन अब तक का सबसे खराब रहा और उसे सिर्फ़ तीन सीटें मिलीं। वहीं, बीजेपी को सिर्फ़ दो सीटें ही मिल पाईं।
2017 के पंजाब चुनावों में, जब दोनों पार्टियां साथ थीं, तब अकाली दल ने 15 सीटें जीती थीं और बीजेपी को तीन सीटें मिली थीं। लेकिन हाल ही में ऐसी खबरें आती रही हैं कि ये पार्टियां फिर से साथ आ सकती हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए उनके बीच गठबंधन की भी काफी चर्चा थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। बाद में, अकाली दल ने पंजाब में सिर्फ़ एक सीट जीती, जबकि बीजेपी राज्य में अपना खाता भी नहीं खोल पाई।
जुलाई में, पीएम मोदी ने जालंधर में एक रैली को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने AAP, कांग्रेस और अकाली दल की आलोचना की। लेकिन बादल ने उनका बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी पार्टी के खिलाफ़ नहीं, बल्कि अकाली दल के एक दूसरे गुट के खिलाफ़ बात की थी। इससे राजनीतिक जानकारों को लगा कि ये पुराने सहयोगी गठबंधन करने में दिलचस्पी रखते हैं। बादल के मुताबिक, पीएम मोदी ने SAD (पुनर्जीवित) के खिलाफ़ बात की थी, जो अकाली दल से अलग हुआ एक गुट है।
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