अमेरिका में 1971 बांग्लादेश नरसंहार को मान्यता देने की मांग वाला प्रस्ताव पेश, पाकिस्तानी सेना पर कार्रवाई की मांग
वॉशिंगटन, 21 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका ने 1971 के बांग्लादेश नरसंहार को मान्यता देने की मांग करने वाले एक प्रस्ताव को पेश किया। इस प्रस्ताव में हिंदुओं की टारगेट किलिंग को लेकर पाकिस्तानी सेना और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
कांग्रेसी ग्रेग लैंड्समैन ने प्रतिनिधि सभा में यह बिल पेश किया, जिसमें पाकिस्तान आर्मी और जमात-ए-इस्लामी पर हुए अत्याचारों को अमेरिका से औपचारिक मान्यता देने और कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए उनकी जवाबदेही तय करने की मांग की गई।
यह प्रस्ताव 25 मार्च, 1971 की शाम को शुरू किए गए ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान किए गए अत्याचारों की निंदा करता है। इसमें कहा गया है कि जहां सभी धर्मों के बंगाली मूल के लोगों को निशाना बनाया गया, वहीं हिंदुओं को खास तौर पर बड़े पैमाने पर हत्या, गैंगरेप, जबरन धर्म परिवर्तन और देश निकाला देकर खत्म कर दिया गया।
लैंड्समैन ने कहा, “इतिहास सच मांगता है। 25 मार्च, 1971 को पाकिस्तानी सेना द्वारा शुरू किया गया आतंक का सिस्टमैटिक कैंपेन संयुक्त राष्ट्र की नरसंहार की परिभाषा को पूरा करता है। इस प्रस्ताव को अमेरिकी डिप्लोमैट्स, पत्रकारों और इंटरनेशनल ऑब्जर्वर ने डॉक्यूमेंट किया है।”
यह कदम किसी भी जातीय या धार्मिक समूह की सामूहिक गलती को भी खारिज करता है और अमेरिका के राष्ट्रपति से इन कामों को नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के तौर पर औपचारिक रूप से मान्यता देने की मांग करता है।
उन्होंने कहा, “पीड़ितों, बचे हुए लोगों और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम इस भयानक घटना को मानें, खासकर बंगाली हिंदुओं को जानबूझकर निशाना बनाने की घटना को। अमेरिका की औपचारिक मान्यता बहुत पहले मिल जानी चाहिए थी और इससे यह साफ संदेश जाता है कि हम धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों को अनदेखा नहीं करेंगे।”
प्रस्ताव में बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की भी मांग की गई है, जहां हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
हिंदू एक्शन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर उत्सव चक्रवर्ती ने कहा कि कानूनी समूह ने इस मुद्दे पर ध्यान दिलाने के लिए प्रवासी समुदायों के साथ काम किया है। उन्होंने कहा, “हिंदू एक्शन में हमारी टीम ने बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक धर्मों के लोगों की बुरी हालत को दूर करने के लिए वहां रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों और अमेरिकी हिंदू समुदाय के साथ बहुत मेहनत की है। हम उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रपति इस ऐतिहासिक जुल्म को मानेंगे ताकि लाखों लोग जो इससे पीड़ित हुए हैं और बांग्लादेश में अब भी पीड़ित 1.5 करोड़ हिंदुओं, ईसाइयों और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।”
इस प्रस्ताव में 1971 के डॉक्युमेंटेड फैक्ट्स बताए गए हैं, जिसमें लाखों आम लोगों की हत्या, 200,000 से ज्यादा महिलाओं का रेप, घरों और पूजा की जगहों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना और लाखों लोगों का बेघर होना शामिल है।
इसमें इस बात के सबूत दिए गए हैं कि लगभग 80 फीसदी पीड़ित हिंदू थे, हालांकि वे आबादी का लगभग 20 फीसदी थे। जिन ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स का जिक्र किया गया है। उनमें अमेरिकी डिप्लोमैटिक केबल, पत्रकारों के अकाउंट, कांग्रेस के नतीजे और इंटरनेशनल लीगल असेसमेंट शामिल हैं।
उनमें से एक रिपोर्ट में कहा गया, “इससे ज्यादा साफ कुछ नहीं है। सबसे ज्यादा असर हिंदू समुदाय के लोगों पर पड़ा।” एक और असेसमेंट में इस बात के बहुत ज्यादा सबूत मिले कि हिंदुओं को सिर्फ इसलिए मारा गया, क्योंकि वे हिंदू थे।”
--आईएएनएस
केके/वीसी
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'बोरिंग, टाइम वेस्ट', इस एक्ट्रेस ने 'धुरंधर 2' पर बोला तीखा हमला, बोलीं- 'अपना समय और पैसा बर्बाद न करे'
South Actress Ramya Slams Dhurandhar 2: जहां एक ओर धुरंधर: द रिवेंज सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन करते हुए बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और दर्शकों के साथ-साथ इंडस्ट्री के दिग्गजों से भी सराहना बटोर रही है, वहीं दूसरी ओर इस फिल्म को लेकर आलोचनाओं का दौर भी तेज हो गया है. खासकर कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस और पूर्व राजनेता रम्या ने इस फिल्म पर तीखा हमला बोला है और इसे लेकर बेहद नेगेटिव प्रतिक्रिया दी है.
सोशल मीडिया पर रम्या का तीखा रिव्यू
रम्या ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर रणवीर सिंह की हालिया रिलीज फिल्म धुरंधर 2 को लेकर लंबा और कड़ा रिव्यू साझा किया, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी. उन्होंने फिल्म को सब्र का इम्तिहान बताते हुए लिखा कि यह ऐसी फिल्म है, जो दर्शकों को बांधने के बजाय उन्हें थका देती है. रम्या के अनुसार, फिल्म का अनुभव किसी बेहद बोरिंग किताब को पढ़ने जैसा है, जिसके अध्याय खत्म होने का नाम ही नहीं लेते.
उन्होंने दर्शकों को सलाह देते हुए यहां तक कह दिया कि अगर कोई यह फिल्म देखना चाहता है, तो वह थिएटर में अपना समय और पैसा बर्बाद न करे, बल्कि इसे किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ही देखे, जहां बीच में रोककर इससे बच निकलना आसान हो.
तकनीकी पहलुओं पर भी उठाए सवाल
रम्या ने फिल्म के निर्देशन, लेखन और तकनीकी गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि फिल्म का निर्देशन, डायलॉग्स, एडिटिंग, बैकग्राउंड स्कोर और यहां तक कि एक्टिंग भी औसत से नीचे है. उनके मुताबिक, ऐसा लगता है जैसे फिल्म को जल्दबाजी में रिलीज किया गया हो और मेकर्स ने इसकी क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने पहले पार्ट की तुलना में इस फिल्म को काफी कमजोर बताया और कहा कि जहां पहले भाग में दर्शकों की भागीदारी और ऊर्जा साफ दिखाई देती थी, वहीं इस बार थिएटर में निराशा का माहौल महसूस होता है.
रणवीर सिंह की एक्टिंग पर निशाना
रम्या ने खास तौर पर रणवीर सिंह के प्रदर्शन को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने सरकास्टिक अंदाज में कहा कि अगर कोई यह दावा कर रहा है कि रणवीर ने फिल्म को संभाला है, तो यह समझ से परे है कि उन्होंने ऐसा क्या किया. उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि इस फिल्म में उन्हें रणवीर की एक्टिंग से ज्यादा उनके बाल नजर आए, जो सीन के बीच में ध्यान भटकाते हुए लगे. उनके अनुसार, अभिनेता का प्रदर्शन इस बार प्रभावशाली नहीं रहा.
Just watched Dhurandhar 2 and wow! what a masterclass in how to turn something promising into an endurance test.
— Ramya/Divya Spandana (@divyaspandana) March 20, 2026
It’s like reading a textbook of the most boring subject with never-ending chapters and at some point, your brain just gives up and starts laughing out of sheer despair…
हिंसा और ‘अंध-राष्ट्रवाद’ पर सवाल
रम्या ने फिल्म में दिखाई गई अत्यधिक हिंसा को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने इसे विज़ुअल हैंडबुक करार देते हुए कहा कि फिल्म में हर चीज को हथियार बनाकर हिंसा को दिखाया गया है- चाहे वह सिरिंज हो, स्पैनर, चाकू, चेन या बंदूकें. उनके मुताबिक, फिल्म में हिंसा का स्तर इतना बढ़ा दिया गया है कि वह प्रभावशाली होने के बजाय बेतुका लगने लगता है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ सीन इतने अवास्तविक हैं कि मेडिकल साइंस भी उन्हें देखकर हैरान रह जाए. इसके साथ ही उन्होंने फिल्म में दिखाए गए कथित “अंध-राष्ट्रवाद” और प्रोपेगैंडा जैसे तत्वों पर भी सवाल उठाए और निर्देशक आदित्य धर को इस तरह के विषयों से आगे बढ़ने की सलाह दी.
‘धुरंधर 2’ को बताया बड़ी निराशा
अपने रिव्यू के अंत में रम्या ने साफ तौर पर कहा कि धुरंधर 2 एक बहुत बड़ी निराशा है. उन्होंने इसे ज्यादा से ज्यादा एक उबाऊ फिल्म या अनजाने में बनी कॉमेडी करार दिया. उन्होंने यह भी कहा कि अगर पहले भाग ने दर्शकों को प्रभावित किया था, तो यह दूसरा भाग उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि इसकी जरूरत ही क्या थी. साथ ही उन्होंने रणवीर सिंह से कहा कि वो इससे कहीं बेहतर काम करने में सक्षम हैं.
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