मिडिल ईस्ट जंग में क्या ईरान निकलाने वाला है ट्रंप कार्ड? ग्लोबल ऑयल मार्केट में खलबली के बाद मिल रहे हैं संकेत?
दुनिया भर के बाजारों के लिए एक बेहद जरूरी बफर के रूप में काम करने वाला समुद्र में जमा तेल का स्टॉक (फ्लोटिंग स्टोरेज) अब बहुत तेजी से कम हो रहा है. फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से होने वाली सप्लाई पिछले तीन हफ्तों से लगातार बाधित है, जिसके कारण खरीदार अब विकल्प तलाशने पर मजबूर हैं. डेटा इंटेलिजेंस फर्म वोर्टेक्स के अनुसार, जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से फ्लोटिंग स्टोरेज में हर दिन 18 लाख बैरल की कमी आ रही है. यह पिछले कई सालों में सबसे तेज गिरावट में से एक है. फिलहाल समुद्र में करीब 7.8 करोड़ बैरल तेल ही बचा है, जिसमें से एक तिहाई हिस्सा ईरान का बताया जा रहा है.
ईरानी तेल पर पाबंदी हटाने की तैयारी
इस बीच, अमेरिका की ओर से एक बड़ा संकेत मिला है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें ईरानी तेल पर लगी पाबंदियों को हटाने की बात कही गई है. अगर अमेरिका इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के बैरल ग्लोबल मार्केट में आ सकते हैं. बेसेंट का अनुमान है कि इस समय समुद्र में करीब 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह डेटा केवल ट्रांजिट में मौजूद तेल का हो सकता है और इसकी असल उपलब्धता कितनी होगी, यह कहना अभी मुश्किल है.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का असर
तेल की सप्लाई में आई इस भारी कमी का सबसे बड़ा कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का लगभग बंद होना है. पिछले तीन हफ्तों से यह महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता बंद पड़ा है और यहां से केवल मुट्ठी भर ईरानी और चीनी टैंकर ही गुजर पा रहे हैं. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा तेल सप्लाई व्यवधान करार दिया है. अगर यह रास्ता जल्द नहीं खुला, तो तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल सकती है. गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, रूस और ईरान का समुद्र में मौजूद कुल तेल हॉर्मुज से होने वाली सप्लाई की कमी को केवल दो हफ्तों तक ही झेल सकता है.
कीमतों को काबू करने की कोशिश
अमेरिकी प्रशासन पर इस समय तेल की बढ़ती कीमतों को रोकने का भारी दबाव है. यही वजह है कि वाशिंगटन अब अपनी रणनीति बदल रहा है. पहले रूस के तेल के लिए रियायतें दी गई थीं और अब ईरान के कच्चे तेल को भी हरी झंडी देने की तैयारी चल रही है. हालांकि, ईरानी तेल को बाजार में लाना इतना आसान नहीं होगा. पिछले कई सालों से ईरानी तेल का मुख्य खरीदार चीन रहा है, जो इसे भारी डिस्काउंट पर खरीदता है. अब अन्य खरीदारों को इस व्यापार में शामिल करने के लिए नए पेमेंट सिस्टम और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा, जो एक बड़ी चुनौती है.
व्यापारिक और लॉजिस्टिक चुनौतियां
भले ही अमेरिका पाबंदियों में ढील देने की बात कर रहा है, लेकिन मुख्यधारा के तेल आयातकों के लिए अब भी कई मुश्किलें बरकरार हैं. वोर्टेक्स की लीड एनालिस्ट एम्मा ली का कहना है कि अगर सभी कार्गो सामान्य बैरल की तरह बेचे जाते हैं, तो इससे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को अच्छा मुनाफा हो सकता है. हालांकि, बड़े खरीदार अभी भी फाइनेंस और लॉजिस्टिक से जुड़ी पाबंदियों के कारण डरे हुए हैं. उन्हें डर है कि अगर यह छूट केवल अस्थायी हुई, तो भविष्य में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें हॉर्मुज के रास्ते और अमेरिकी सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं.
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आम आदमी पार्टी ने केरलम में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तीसरी लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 17 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं।
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