बांग्लादेश: विवादित वन परियोजना के खिलाफ आदिवासी और कैथोलिक नेताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी
वॉशिंगटन, 20 मार्च (आईएएनएस)। बांग्लादेश के मध्य क्षेत्र में रहने वाले कई आदिवासी और कैथोलिक नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि विवादित वन विकास परियोजना को वापस नहीं लिया गया, तो वे बड़ा आंदोलन छेड़ सकते हैं।
गेरो और कोच आदिवासी समुदायों का आरोप है कि तांगाइल जिले के माधुपुर वन क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना, जिसमें कृत्रिम झील और इको-पार्क बनाने की योजना शामिल है, उनके पुश्तैनी जमीन से उन्हें बेदखल करने की एक साजिश है।
अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘इटरनल वर्ड टेलीविजन नेटवर्क’ की रिपोर्ट के अनुसार, 6 मार्च को माधुपुर में आयोजित एक विरोध रैली में बांग्लादेश इंडिजिनस यूथ फोरम के अध्यक्ष टोनी चिरान ने सैकड़ों छात्रों और समुदाय के लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आदिवासियों की कृषि भूमि छीन लेगी, प्राकृतिक वन को नष्ट करेगी और उनकी आजीविका खत्म कर देगी।
चिरान ने कहा, “सरकार विकास के नाम पर जो कर रही है, वह विकास नहीं है, बल्कि गेरो और कोच आदिवासियों को इस क्षेत्र से हटाने की स्पष्ट योजना है।”
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 17.8 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में करीब 4 लाख कैथोलिक हैं, जिनमें से आधे से अधिक आदिवासी समुदायों से आते हैं।
बताया गया कि सरकार ने सबसे पहले साल 2000 में माधुपुर वन में कृत्रिम झील और इको-पार्क की योजना प्रस्तावित की थी। 2004 में इस परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में एक गेरो व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे, जिसके बाद परियोजना को रोक दिया गया था। हालांकि, 2026 में इसे फिर से शुरू कर दिया गया है और खुदाई का काम भी शुरू हो चुका है।
आदिवासी नेताओं का कहना है कि यह परियोजना लंबे समय से उन्हें उनके पारंपरिक अधिकारों से वंचित करने की रणनीति का हिस्सा है।
गेरो इंडिजिनस स्टूडेंट यूनियन के सचिव जनोकी चिसिम ने कहा कि यह परियोजना न केवल जंगल के लिए बल्कि उस पर निर्भर लोगों के लिए भी अन्याय है। उन्होंने कहा, “जंगल को उसके मूल स्वरूप में रहने दिया जाए। गेरो और कोच समुदाय सदियों से यहां रहते आए हैं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदिवासियों के पारंपरिक भूमि अधिकारों की रक्षा नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चीन ने भारत के नए राजदूत विक्रम के. दोराईस्वामी का स्वागत किया, संबंध मजबूत करने की जताई उम्मीद
नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। चीन ने भारत के नवनियुक्त राजदूत विक्रम के. दोराईस्वामी का स्वागत करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। चीन ने उम्मीद जताई है कि वे अपने कार्यकाल के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने तथा भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
भारत स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, चीन, भारत के नवनियुक्त राजदूत विक्रम के. दोराईस्वामी (जिनका चीनी नाम वेई जियामेंग है) का स्वागत करता है और चीन में अपना पदभार ग्रहण करने में उन्हें हरसंभव सुविधा प्रदान करने के लिए तत्पर है।
उन्होंने आगे कहा, चीन को आशा है कि अपना कार्यभार संभालने के बाद वे चीन-भारत संबंधों में निरंतर सुधार और विकास को आगे बढ़ाने में सकारात्मक योगदान देंगे।
1992 बैच के आईएफएस अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर डिग्री ली।
1992-1993 में नई दिल्ली में अपनी इन-सर्विस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद दोराईस्वामी मई 1994 में हांगकांग में भारतीय दूतावास में थर्ड सचिव नियुक्त हुए। उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय के न्यू एशिया येल-इन-एशिया लैंग्वेज स्कूल से चीनी भाषा में डिप्लोमा पूरा किया।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी में बताया गया कि विक्रम दोराईस्वामी अभी ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर हैं और उन्हें चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। उम्मीद है कि वह जल्द ही यह काम संभाल लेंगे।
सितंबर 1996 में उन्हें बीजिंग में भारतीय दूतावास में नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने लगभग चार साल तक जिम्मेदारी संभाली। फिर 2000 में नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में लौटने पर दोराईस्वामी ने डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल (ऑफिशियल) नियुक्त की भूमिका निभाई। दो साल बाद उन्हें प्रधानमंत्री के ऑफिस में प्रमोट किया गया। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी सचिव के तौर पर काम किया।
2006 में दोराईस्वामी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में राजनीतिक सलाहकार के तौर पर और अक्टूबर 2009 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में भारत के महावाणिज्य दूत के तौर पर कार्यभार संभाला।
जुलाई 2011 में दोराईस्वामी नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में वापस आ गए, जहां उन्होंने साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (एसएएआरसी) विभाग का नेतृत्व किया। इस दौरान वे मार्च 2012 में नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स समिट के कोऑर्डिनेटर भी थे।
फिर अक्टूबर 2012 से अक्टूबर 2014 तक दोराईस्वामी विदेश मंत्रालय के अमेरिकी विभाग में संयुक्त सचिव थे। अप्रैल 2015 में कोरिया में भारत के राजदूत नियुक्त होने से पहले वे अक्टूबर 2014 में उज्बेकिस्तान में भारत के राजदूत बने।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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