पाकिस्तान स्थित नेटवर्कों से कथित तौर पर शुरू हुए एक समन्वित दुष्प्रचार अभियान ने भारत की राजनयिक स्थिति को निशाना बनाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समुद्री संघर्ष का फायदा उठाने की कोशिश की। यह घटना ईरानी नौसेना के फ्रिगेट आईरिस देना पर हुए हमले से संबंधित है, जिसे 4 मार्च को श्रीलंका के तट पर अमेरिकी नौसेना ने टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया था। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस हमले को यह दर्शाने वाला बताया कि ईरानी जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी सुरक्षित नहीं हैं। हमले के प्रभाव को दर्शाने वाले पेरिस्कोप फुटेज भी जारी किए गए। फ्रिगेट को आत्मसमर्पण का कोई अवसर नहीं दिया गया, और इस बात पर बहस जारी है कि क्या चेतावनी जारी की गई थी, हालांकि नौसैनिक युद्ध कानून स्पष्ट आत्मसमर्पण के संकेत न मिलने पर दुश्मन के युद्धपोतों पर बिना पूर्व चेतावनी के हमले की अनुमति देता है।
पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान
इस घटना के तुरंत बाद, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से एक ऐसी कहानी फैल गई जिसमें भारत पर अमेरिका के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप लगाया गया था। विश्लेषकों ने इस दावे का व्यापक रूप से खंडन किया है, मामले से परिचित लोगों ने बताया। घटना के लगभग तुरंत बाद, सोशल मीडिया पर #IndiaBetraysIran हैशटैग के तहत एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान शुरू हुआ, जिसमें झूठा आरोप लगाया गया कि भारत ने फ्रिगेट के निर्देशांक या स्थान डेटा को संयुक्त राज्य अमेरिका को लीक कर दिया था, जिससे हमला संभव हो सका। भारतीय ओएसआईएनटी समूहों और खतरे की खुफिया जानकारी देने वाले प्लेटफार्मों द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला कि इस अभियान की उत्पत्ति 4 मार्च को @TacticalTribun नामक खाते की एक पोस्ट से हुई थी, जिसके उपयोगकर्ता नाम में बार-बार बदलाव का इतिहास दुर्भावनापूर्ण इरादे का संकेत देता है।
उन्होंने आगे बताया कि यह कहानी विशिष्ट खातों (पूरी तरह से एल्गोरिथम आधारित नहीं) द्वारा मैन्युअल रूप से प्रसारित होने के कारण तेजी से फैली, जिसमें लगभग 40% पाकिस्तान स्थित उपयोगकर्ताओं और नेटवर्क से उत्पन्न हुई, इसके बाद ईरान समर्थित, मध्य पूर्वी, अफ्रीकी और दक्षिण पूर्व एशियाई समूहों का योगदान रहा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में समन्वित हाइब्रिड सूचना युद्ध के लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें वास्तविक उपयोगकर्ता सहभागिता को सुनियोजित प्रसार तकनीकों के साथ जोड़ा गया है।
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क्या ईरान के आसमान में अमेरिकी फाइटर जेट्स का दम फूल रहा है? क्या सुपर पावर अमेरिका के हाथ से बाजी फिसल रही है? यह सवाल मैं इसलिए पूछ रही हूं क्योंकि पिछले 20 दिनों के आंकड़ों ने वाशिंगटन से लेकर तेल अभी तक हड़कंप मचा दिया है। दावा चौंकाने वाला है। खबर है कि इस भीषण जंग में अब तक अमेरिका के 16 सैन्य विमान या तो मलबे में तब्दील हो चुके हैं या फिर इतने जख्मी हुए हैं कि अब वो उड़ान भरने के लायक नहीं बचे। और सुनिए यह सिर्फ ड्रोन नहीं है। इनमें वो शिकारी विमान भी शामिल है जिन्हें दुनिया अजय कहती थी। सबसे बड़ी सनसनी मची है एफ 35 स्टील फाइटर जेट को लेकर। वही F35 है जो रडार की आंखों में धूल झोंकने के लिए मशहूर है। जिसकी एक हुंकार से दुश्मन का कलेजा कांप जाता है। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि ईरान की जवाबी कार्यवाही ने इस सुपर हीरो जेट का गुरूर भी तोड़ दिया। एक अमेरिकी एयरबेस पर इसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। पायलट तो बच गया लेकिन सवाल खड़ा हो गया कि अगर रडार से बचने वाला विमान भी निशाने पर है तो क्या अब आसमान में अमेरिका का कंट्रोल खत्म हो चुका है?
शिकारी खुद यहां शिकार हो गया
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने एक साथ ईरान पर चौतरफा हमला बोला। मकसद बड़ा था और अंजाम उससे भी बड़ा जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामिने की मौत हो गई। ईरान के लिए यह सिर्फ हमला नहीं था। यह उसकी साख पर चोट थी और उसके बाद शुरू हुआ मिसाइलों ड्रोंस और सुसाइड अटैक्स का वो सिलसिला जिसने मिडिल ईस्ट के नक्शे को दहला दिया। इन 16 विमानों की बात करें तो इनमें से 10 तो सिर्फ एमq9 रिपर ड्रोंस हैं। यह वो जासूस हैं जो बिना पायलट के मीलों दूर से तबाही मचाते हैं। लेकिन ईरान का दावा है कि उसने इन्हें खिलौनों की तरह आसमान से नीचे गिरा दिया। पर कहानी सिर्फ ड्रोंस की नहीं है। जो नुकसान हुआ है वो हैरान करने वाला है। कुवैत में अमेरिका के तीन A15 फाइटर जेट्स अपनी ही सेना की गलती से गिर गए। और दुखद खबर यह भी रही कि एक KC135 टैंकर विमान जो हवा में दूसरे जहाजों में फ्यूल भरता है वो क्रैश हो गया और रिपोर्ट्स के मुताबिक छह क्रू मेंबर्स की जान चली गई। सऊदी अरब के एयर फील्ड पर भी ईरानी मिसाइलों ने पांच टैंकर विमानों को लोहे का ढेर बना दिया। अमेरिका इसे टेक्निकल फौल्ट कह रहा है। लेकिन ईरान के दावे बता रहे हैं कि शिकारी यहां खुद शिकार हो रहा है।
ईरान का दावा है कि उसने एफ-35 को कैसे निशाना बनाया
ईरानी मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि इस हमले में स्वदेशी बावर-373 वायु रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि निष्क्रिय सेंसर तकनीक ने रडार सिग्नल उत्सर्जित किए बिना ही स्टील्थ विमान का पता लगाने में भूमिका निभाई होगी। हालांकि स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है, ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि सिस्टम ने सटीक रूप से जेट को लॉक किया और उसे निशाना बनाया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने स्वीकार किया है कि एफ-35 को मध्य पूर्व में एक अमेरिकी हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी, क्योंकि उस पर ईरानी गोलाबारी का संदेह है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के अनुसार, सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर विमान घटना के समय "ईरान के ऊपर एक लड़ाकू मिशन पर था"। उन्होंने पुष्टि की कि विमान सुरक्षित रूप से उतर गया और कहा कि वर्तमान में विस्तृत जांच चल रही है।
एफ-35 पर हमला क्यों महत्वपूर्ण है?
एफ-35 को अमेरिकी और सहयोगी देशों की वायु शक्ति की रीढ़ माना जाता है। प्रत्येक विमान की कीमत 10 करोड़ डॉलर से अधिक है और इसमें स्टील्थ विशेषताएं, उन्नत सेंसर और अगली पीढ़ी की युद्धक्षेत्र नेटवर्किंग क्षमताएं समाहित हैं। यह एक साथ वायु-से-वायु युद्ध, वायु-से-भूमि बमबारी और निगरानी कर सकता है। 1,900 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति और 360-डिग्री सेंसर सूट के साथ, एफ-35 को अत्यधिक सुरक्षित हवाई क्षेत्र में बिना पता चले प्रवेश करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस जेट को मामूली क्षति भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एफ-35 की सेंसर फ्यूजन तकनीक इसे अद्वितीय कैसे बनाती है
इस लड़ाकू विमान की सेंसर फ्यूजन तकनीक रडार, इन्फ्रारेड सेंसर, उपग्रहों और अन्य विमानों से प्राप्त जानकारी को एकत्रित और संसाधित करके वास्तविक समय में युद्धक्षेत्र की छवि तैयार करती है। इससे पायलटों को खतरों की शीघ्र पहचान करने और पकड़े जाने से पहले ही हमला करने में मदद मिलती है। यह उन्नत प्रणाली उन कारणों में से एक है जिनकी वजह से एफ-35 को आधुनिक हवाई युद्ध में बेजोड़ माना जाता है।
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