थाईलैंड के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल को पीएम मोदी ने दी बधाई
नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को थाईलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में अनुतिन चर्नविराकुल के चुनाव पर उन्हें हार्दिक बधाई दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए थाई नेतृत्व के साथ मिलकर काम करने में गहरी रुचि व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध साझा सभ्यतागत विरासत, घनिष्ठ सांस्कृतिक जुड़ाव और जीवंत जन-संबंधों पर आधारित हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और थाईलैंड अपने-अपने देशों की जनता के लिए शांति, प्रगति और समृद्धि की साझा आकांक्षाओं में एकजुट हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, थाईलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में अनुतिन चर्नविराकुल के चुनाव पर हार्दिक बधाई। मैं उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं। हम मिलकर भारत-थाईलैंड की बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे संबंध साझा सभ्यतागत विरासत, घनिष्ठ सांस्कृतिक जुड़ाव और जीवंत जन-संबंधों पर आधारित हैं। भारत और थाईलैंड अपने लोगों के लिए शांति, प्रगति और समृद्धि की साझा आकांक्षाओं में एकजुट हैं।
थाईलैंड के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने बैंकॉक के एजम्पशन कॉलेज में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की , जिसके बाद उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में मैसाचुसेट्स के वॉर्सेस्टर स्थित वॉर्सेस्टर अकादमी में अपनी पढ़ाई जारी रखी । 1989 में उन्होंने न्यूयॉर्क के हेम्पस्टेड स्थित हॉफस्ट्रा विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की । बाद में उन्होंने 1990 में थम्मासैट विश्वविद्यालय के वाणिज्य और लेखा संकाय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की।
--आईएएनएस
एसके/पीएम
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World Oral Health Day 2026: सिर्फ ब्रश करना काफी नहीं! ओरल हाइजीन से जुड़ी ये 5 गलतियां बढ़ा रही बीमारियों का खतरा
World Oral Health Day 2026: आपने अक्सर सुना होगा कि दिन में दो बार ब्रश करना ही दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए काफी है. मगर डेंटल एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह अधूरी जानकारी है. गलत तरीके से ब्रशिंग करने से धीरे-धीरे गम डिजीज, कैविटी और मुंह की बदबू जैसी समस्याएं हो सकती हैं. आजकल दांतों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और इसके पीछे एक बड़ा कारण है-अधूरी और गलत ओरल हाइजीन की जानकारी होना है. डेंटल विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ ब्रश करना ही काफी नहीं है बल्कि सही तकनीक और पूरी रूटीन को फॉलो करना जरूरी है.
ओरल हेल्थ डे 2026 थीम
आज ओरल हेल्थ डे 2026 मनाया जा रहा है. इस दिन की शुरुआत साल 2013 में हुई थी. ऐसे में आज इसका चौदहवां संस्करण है. वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे 2026 की थीम है 'खुश मुंह खुशहाल जीवन है'. इसका मतलब होता है कि मुंह का अच्छा स्वास्थ्य हमारे जीवन में खुशहाली लाएगा. इसलिए, इस अवसर पर जानते हैं ब्रशिंग के बारे में. यह एक रोजाना की आदत है, जिसे हर उम्र का इंसान करता है. चलिए जानते हैं ब्रश करने से जुड़ी 5 बड़ी गलतियों के बारे में.
गलत ब्रशिंग तकनीक बन रही है बड़ी वजह
कई लोग जल्दी-जल्दी या बहुत जोर से ब्रश करते हैं. दरअसल, यह लोग ऐसा सोचते हैं कि इससे दांत ज्यादा साफ होंगे. लेकिन हकीकत इसके विपरित होती है. ज्यादा तेज और हार्ड ब्रशिंग से दांतों की ऊपरी परत यानी एनामेल को नुकसान पहुंचता है और मसूड़े कमजोर हो सकते हैं.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एशियन हॉस्पिटल के पेशेंट केयर सर्विसेज की डायरेक्टर डॉ. स्मृति पांडेय बताती हैं कि लोग ब्रश तो करते हैं, लेकिन सही तकनीक नहीं अपनाते. इससे उनके दांतों पर प्लाक जमा होता रहता है, ये धीरे-धीरे गंभीर समस्याओं में बदल सकता है. इसलिए, दांतों पर ब्रश को हमेशा हल्के हाथों से गोलाकार मूवमेंट में कम से कम 2 मिनट तक करना चाहिए. वह बताती हैं कि हार्ड ब्रिसल वाले ब्रश का इस्तेमाल करने बचना चाहिए और सॉफ्ट ब्रश का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित होता है.
फ्लॉसिंग करना सबसे जरूरी स्टेप
एक्सपर्ट बताते हैं कि दांतों के बीच फंसे खाने के कण सिर्फ ब्रश से साफ नहीं होते हैं. अगर इन्हें समय पर नहीं हटाया गया, तो बैक्टीरिया जमा होकर दांतों में सड़न हो सकती हैं. इसलिए, फ्लॉसिंग करना अहम ओरल हाइजीन का स्टेप है, जिसको लोग अक्सर अनदेखा करते हैं. रोजाना फ्लॉसिंग करने से दांतों के बीच की गंदगी साफ होती है और कैविटी का खतरा कम हो जाता है.
माउथवॉश का गलत इस्तेमाल भी नुकसानदायक
एक्सपर्ट बताते हैं कि आजकल लोग माउथवॉश को हर समस्या का समाधान मान लेते हैं, लेकिन बाजार में मिलने वाला हर माउथवॉश, हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता है. इस लिक्विड के ज्यादा इस्तेमाल से मुंह के नैचुरल बैक्टीरिया का इंबैलेंस हो जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि माउथवॉश का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए.
ब्रश समय पर न बदलना
कुछ लोग महीनों-महीनों तक एक ही ब्रश का इस्तेमाल करते रहते हैं, जो कि गलत आदत है. ज्यादा पुराना ब्रश बैक्टीरिया का घर बन जाता है और इससे उसकी सफाई क्षमता भी कम हो जाती है. डॉक्टरों के अनुसार, हर 3 महीने में ब्रश बदलना जरूरी है या फिर जब ब्रश के ब्रिसल्स फैल जाएं तो नया ब्रश यूज करना चाहिए.
डेंटल चेकअप न करवाना
आज भी ऐसे बहुत लोग है, जो तब ही डेंटिस्ट के पास जाते हैं जब दांतों में दर्द शुरू हो जाता है या कोई समस्या होती है. मगर तब तक समस्या बढ़ चुकी होती है. नियमित रूप से डेंटल चेकअप करवाने से शुरुआती स्तर पर ही समस्याओं को रोका जा सकता है. डॉ. कहते हैं कि सही ओरल केयर रूटीन में सिर्फ ब्रशिंग शामिल हीं, बल्कि फ्लॉसिंग और नियमित डेंटल चेकअप भी शामिल होना चाहिए.
कब-कब करवाएं डेंटल चेकअप?
हर 6 महीने में एक बार आपको डेंटिस्ट से दांतों की जांच जरूर करानी चाहिए. सिर्फ ब्रश करना दांतों की पूरी तरह सुरक्षा नहीं प्रदान करता है. सही तकनीक, संतुलित ओरल केयर रूटीन और नियमित जांच ही आपको मसूड़ों और अन्य दंत समस्याओं से बचा सकती है.
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