LIC OFS: सरकार ने 4 साल बाद फिर बेची हिस्सेदारी, ₹31,552 करोड़ जुटाए, अब आगे क्या?
LIC OFS: लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (LIC) एक बार फिर चर्चा में है. वजह है सरकार की 6.5% ऑफर फॉर सेल (OFS) और कंपनी के Q1 FY27 के शानदार नतीजे. सरकार ने LIC में अपनी 6.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹31,552 करोड़ जुटाए हैं. खास बात यह है कि यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े OFS में से एक है और इसे रिटेल के साथ-साथ इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स से भी जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है.
पहले समझिए OFS क्या है?
ऑफर फॉर सेल एक ऐसा तरीका है, जिसके जरिए मौजूदा शेयरहोल्डर स्टॉक मार्केट के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं. इस मामले में, बेचने वाली खुद भारत सरकार थी. बता दें कि 2022 में LIC का IPO आया था. इसके जरिए सरकार ने लगभग ₹21,000 करोड़ जुटाए थे. अब लगभग 4 साल बाद एकबार फिर भारत सरकार ने अपनी हिस्सेदारी कम कर दी है.
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सरकार ने हिस्सेदारी क्यों बेची?
इस OFS का मुख्य कारण SEBI का मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियम है. SEBI के नियमों के अनुसार, किसी भी लिस्टेड कंपनी के लिए कम से कम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखना जरूरी है. हालांकि LIC के बहुत बड़े आकार को देखते हुए मई 2022 में पब्लिक होने पर इसे केवल 3.5% पब्लिक शेयरहोल्डिंग के साथ लिस्ट होने की इजाजत दी गई थी. बाद में, SEBI ने LIC को 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग का लक्ष्य हासिल करने की समय-सीमा बढ़ाकर 16 मई, 2027 कर दी. अब इस 6.5% OFS के बाद, LIC ने तय समय से पहले ही 10% पब्लिक फ्लोट का लक्ष्य हासिल कर लिया है.
क्या सरकार आगे भी हिस्सेदारी बेचेगी?
LIC के CEO और MD आर. दोराईस्वामी के अनुसार, सरकार का अभी अगले 18 से 24 महीनों में कोई नया पब्लिक ऑफर लाने का इरादा नहीं है. हालांकि LIC को आखिरकार 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग के लेवल तक पहुंचना है. सरकार ने कंपनी को ऐसा करने के लिए 2032 तक का समय दिया है. इसका मतलब है कि भले ही सरकार आने वाले सालों में धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी कम कर सकती है. लेकिन अभी तुरंत ऐसा कोई कदम उठाए जाने की संभावना नहीं है. CEO का मानना है कि पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने से LIC के शेयरों में लिक्विडिटी बेहतर होगी, जिससे लंबे समय में शेयर की कीमत को फायदा हो सकता है.
कैसे हुआ इतना बड़ा OFS?
सरकार ने इस OFS में कुल 82.23 करोड़ इक्विटी शेयर्स ऑफर किए. इसमें 2.5% बेस ऑफर, 4% ग्रीनशू ऑप्शन शामिल था. कुल मिलाकर यह LIC की 6.5% इक्विटी के बराबर था. OFS की बिडिंग 4 और 5 अगस्त को हुई, जिसमें पहले दिन नॉन-रिटेल इंवेस्टर्स और दूसरे दिन रिटेल इंवेस्टर्स ने हिस्सा लिया.
LIC का Q1 FY27 के रिजल्ट क्या कहते हैं?
अब LIC के FY27 की पहली तिमाही के नतीजों पर बात करते हैं. OFS के साथ-साथ, LIC ने जून तिमाही के नतीजे भी जारी किए. कंपनी का नेट प्रॉफिट सालान आधार पर 23% बढ़कर ₹13,492 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹10,987 करोड़ था. वहीं, कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹2.38 लाख करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल इसी दौरान यह ₹2.23 लाख करोड़ थी. जून तिमाही में LIC का कुल प्रीमियम इनकम बढ़कर ₹1,27,250 करोड़ रहा. पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹1,19,200 करोड़ था. यानी कंपनी ने लगभग 6.75% की ग्रोथ दर्ज की.
सबसे अच्छी खबर क्या रही?
इस तिमाही में LIC के वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) में 61% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई, जबकि VNB मार्जिन बढ़कर 22.9% हो गया. आसान शब्दों में कहें तो कंपनी न केवल ज्यादा बिजनेस कर रही है, बल्कि नए बिजनेस से पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफा भी कमा रही है. CEO के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह कंपनी की प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन और डिस्ट्रिब्यूशन स्ट्रैटजी थी.
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इंवेस्टर्स के लिए इसके क्या मायने हैं?
फिलहाल 3 बातें सबसे अहम हैं. सरकार ने तय समय से पहले ही 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है. अगले 18-24 महीनों में नया OFS आने की संभावना कम है. पहली तिमाही (Q1) के नतीजे बताते हैं कि LIC का मुख्य कारोबार लगातार मजबूत हो रहा है और मुनाफे में सुधार हुआ है. अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो LIC निवेशकों की नजर में बनी रहेगी. हालांकि, निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले कंपनी के वैल्यूएशन, ग्रोथ की संभावनाओं और अपने वित्तीय लक्ष्यों पर जरूर विचार करें.
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