Vastu Tips For Office: अप्रैजल का महीना शुरू, PIP में जाने का है खतरा, वास्तु अनुसार ऑफिस में तुरंत करें ये बदलाव
Vastu Tips For Office: मार्च आते ही अप्रेजल का महीना शुरू हो जाता है, जिसका इंतजार नौकरी पेशा लोग सालभर करते हैं. लेकिन इस माह से कई लोगों का पीआईपी में नाम भी आ जाता है, जो कइयों के सपनों को तोड़ भी देता है. अगर आप अपना नाम इस लिस्ट में नहीं देखना चाहते हैं तो वास्तु अनुसार ऑफिस में तुरंत ये बदलाव करें.
Rupee VS Dollar: रिकॉर्ड लो पर पहुंचा भारतीय रुपया, पहली बार डॉलर के मुकाबले 93 का स्तर पार किया; आगे क्या होगा?
Rupee VS Dollar: मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा। 19 मार्च को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 0.65 फीसदी गिरकर 93.24 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो इससे पहले का 92.63 का रिकॉर्ड भी तोड़ गया। यूएस-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रुपया करीब 2 फीसदी तक कमजोर हो चुका।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हमलों के बाद गुरुवार को तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि शुक्रवार को इसमें थोड़ी नरमी आई, लेकिन बाजार की चिंता अभी भी बरकरार है।
क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से रुपया गिरा
भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे देश की आर्थिक विकास दर और महंगाई दोनों पर दबाव पड़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर भी हालात आसान नहीं हैं। यूरोप के कई देश और जापान अब होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल हो रहे हैं। वहीं अमेरिका ने भी तेल सप्लाई बढ़ाने के संकेत दिए हैं, ताकि बाजार में स्थिरता लाई जा सके।
एफआईआई ने 8 अरब डॉलर निकाले
इस बीच विदेशी निवेशकों का भरोसा भी डगमगाता नजर आ रहा है। मार्च में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी कर ली है। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो माना जा रहा है। निवेशकों की यह बिकवाली रुपये पर और दबाव डाल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो महंगाई बढ़ सकती है। एक अनुमान के मुताबिक, हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से महंगाई दर में करीब 0.5 फीसदी का इजाफा हो सकता है। इससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीति भी उभरते बाजारों के लिए चिंता बढ़ा रही है। ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के संकेत से डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की घरेलू आर्थिक मजबूती इस झटके को कुछ हद तक संभाल सकती है। फिर भी, आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
(प्रियंका कुमारी)
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