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Delhi Schools में 'हाउसफुल' के हालात! 44.9 लाख छात्र और बुनियादी ढांचे की कमी, UDISE+ रिपोर्ट में बड़े खुलासे

राजधानी दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को लेकर हाल ही में जारी ‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस’ (UDISE+) 2024-25 की रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के स्कूलों में छात्रों का नामांकन तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उस अनुपात में स्कूल भवनों और संसाधनों का विकास नहीं हो पाया है, जिससे मौजूदा ढांचे पर भारी बोझ पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति स्कूल औसतन 808 छात्रों का नामांकन है, जबकि छात्र संख्या में वृद्धि की तुलना में स्कूल भवनों की संख्या नहीं बढ़ी है। स्कूलों में कुल 1,61,958 शिक्षक तैनात हैं, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात 28:1 है। इससे संकेत मिलता है कि शिक्षकों की संख्या भी लगभग स्थिर है।

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‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस’ (यूडीआईएसई+) 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों की संख्या की तुलना में नामांकन का अनुपात दिल्ली में सबसे अधिक है, जो भीड़ और मौजूदा सुविधाओं पर बढ़ते बोझ की ओर इशारा करता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार ने 2026-27 में राजधानी में करीब 50 नए स्कूल भवन और 8,000 अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा है। फिलहाल कुल 5,556 स्कूलों में से 2,681 सरकारी संस्थान हैं, जिससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में छात्र सार्वजनिक ढांचे पर निर्भर हैं।

आंकड़ों के अनुसार 2,528 स्कूल आधारभूत और प्रारंभिक स्तर के, 803 मध्य स्तर के तथा 2,225 माध्यमिक स्तर के हैं। स्कूलों में आधारभूत और प्रारंभिक स्तर पर 26,560 शिक्षक, मध्य स्तर पर 11,564 और माध्यमिक स्तर पर 1,23,834 शिक्षक हैं। छात्र-शिक्षक अनुपात आधारभूत स्तर पर 14:1, प्रारंभिक स्तर पर 18:1, मध्य स्तर पर 28:1 और माध्यमिक स्तर पर 19:1 है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1,089 छात्र एकल-शिक्षक वाले स्कूलों में नामांकित हैं, जिससे शिक्षक कार्यभार और कक्षा प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ती है।

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आधारभूत सुविधाओं के संदर्भ में 4,720 स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालय ठीक ठाक हालत में हैं और 4,781 में बालक शौचालय उपलब्ध हैं। हालांकि केवल 430 स्कूलों में डिजिटल पुस्तकालय की सुविधा है, जबकि 1,844 स्कूलों में सौर पैनल लगे हैं। आधार से जुड़े प्रवेश मामलों की संख्या 43,11,104 रही।

सकल नामांकन अनुपात के आंकड़े बताते हैं कि विभिन्न स्तरों पर छात्राओं की भागीदारी अधिक है। माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का अनुपात 95.7 प्रतिशत है, जबकि लड़कों का 88.3 प्रतिशत है। मध्य स्तर पर यह अनुपात 113 लड़कों और 122 लड़कियों, प्रारंभिक स्तर पर 100 लड़कों और 110 लड़कियों और आधारभूत स्तर पर 50 लड़कों और 54 लड़कियों का है।

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RSS Chief मोहन भागवत ने Nagpur से दिया शांति का मंत्र, कहा- दुनिया को संघर्ष नहीं, सौहार्द चाहिए

आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने शुक्रवार को कहा कि स्वार्थ और वर्चस्व की लालसा विश्व में संघर्षों का मूल कारण हैं, और उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है। नागपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए भगवत ने कहा कि पिछले 2000 वर्षों से दुनिया ने संघर्षों को सुलझाने के लिए विभिन्न विचारों पर प्रयोग किए हैं, लेकिन सफलता नगण्य रही है। उन्होंने बताया कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्मांतरण और श्रेष्ठता-हीनता की धारणाएं आज भी मौजूद हैं।
 

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख शहर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। भगवत ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा यह सिखाती है कि "सभी आपस में जुड़े हुए और एक हैं", और उन्होंने संघर्ष से सद्भाव और सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है। 
 

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भागवत ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है और इसमें अक्सर व्यक्तिगत कठिनाई भी झेलनी पड़ती हैं। भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की जरूरत है।

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  Sports

IPL में बिना रन बनाए खेल गए 31 गेंद, पंजाब के कप्तान ने किया था ये कांड, हैदराबाद में हुआ था 3 साल पहले अजूबा

शिखर धवन ने 2023 सीजन में पंजाब किंग्स के लिए खेलते हुए एक पारी में 31 डॉट गेंदें खेलीं यानी 31 गेंदों तक  खाता भी नहीं खोल पाए. राजीव गांधी स्टेडियम में सनराइजर्स हैदराबाद के  मार्को येंसन और मयंक मारकंडे ने बेहद किफायती गेंदबाजी करते हुए धवन को खुलकर नहीं खेलने दिया. Fri, 20 Mar 2026 17:00:38 +0530

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