Swami Ramdev Health Tips: योग धर्म अपनाने से स्वास्थ्य धर्म का होगा पालन, डिप्रेशन- घबराहट से बचें, स्वामी रामदेव ने दी सलाह
Swami Ramdev Health Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव, डिप्रेशन और घबराहट जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे समय में योग और आयुर्वेद को अपनाने की सलाह देते हुए योग गुरु स्वामी रामदेव ने आज अपने फेसबुक लाइव में कहा है कि योग धर्म को जीवन का हिस्सा बनाकर हम न केवल अपने शरीर बल्कि मन को भी स्वस्थ रख सकते हैं.
यहां देखें लाइव वीडियो
योग धर्म क्या है और क्यों जरूरी है?
स्वामी रामदेव ने लाइव सेशन में बताया कि योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं है बल्कि यह एक जीवनशैली है. 'योग धर्म' का मतलब है अपने दिनचर्या में योग, प्राणायाम और संतुलित आहार को शामिल करना. जब व्यक्ति योग को नियमित रूप से अपने जीवन में अपनाता है, तो उसका शरीर और मन दोनों संतुलित रहने लगता हैं. उन्होंने आज बताया कि आजकल लोग छोटी-छोटी बातों को सिर में बैठा लेते हैं जिससे डिप्रेशन, परिवारों में खींचातान और चिड़चिड़ाहट आ जाती है.
वे कहते हैं कि पहले से ही तनावपूर्ण जीवनशैली हैं, इसमें लोग छोटी-छोटी बातों पर चिंता करने लगते हैं, जिससे मानसिक समस्याएं बढ़ती हैं. ऐसे में योग एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय है, जो बिना किसी दवा के मन को शांत रख सकता है.
डिप्रेशन और घबराहट से बचने के लिए योग
डिप्रेशन और एंग्जायटी आज आम समस्या बन चुकी है. स्वामी रामदेव ने फेसबुक लाइव वीडियो में बताया है कि नियमित योग और प्राणायाम से इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
कुछ प्रमुख योग और प्राणायाम जो फायदेमंद हो सकते हैं-
अनुलोम-विलोम प्राणायाम- यह दिमाग को शांत करता है और तनाव को कम करता है.
कपालभाति- शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ाता है.
भ्रामरी प्राणायाम- घबराहट और चिंता को तुरंत कम करने में मदद करता है.
ध्यान- मन को स्थिर और सकारात्मक बनाता है.
इन अभ्यासों को रोजाना 20-30 मिनट करने से मानसिक स्थिति में बड़ा सुधार देखा जा सकता है.
योग से मिलते हैं कई बड़े फायदे
योग धर्म को अपनाने से केवल मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है. इसके कुछ प्रमुख फायदे हैं-
- शरीर की इम्युनिटी मजबूत होती है.
- नींद की समस्या दूर होती है.
- ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रहता है.
- शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति बनी रहती है.
- नकारात्मक सोच कम होती है.
स्वामी रामदेव का कहना है कि अगर इंसान रोज योग करता है, तो उसे जीवन में कभी एलोपैथी दवाओं की जरूरत नहीं पड़ेगी.
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संतुलित आहार भी है जरूरी
योग के साथ-साथ सही खानपान भी बेहद जरूरी होता है. स्वामी रामदेव सलाह देते हैं कि हमें ताजा, सात्विक और पौष्टिक भोजन करना चाहिए. जंक फूड और ज्यादा तला-भुना खाने से बचना चाहिए, क्योंकि ये मानसिक और शारीरिक दोनों पर असर डालता है. फल, हरी सब्जियां, दालें और पर्याप्त पानी का सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है.
डिजिटल लाइफस्टाइल से दूरी बनाएं
आजकल मोबाइल और सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल भी डिप्रेशन का बड़ा कारण बन गया है. स्वामी रामदेव के अनुसार, हमें डिजिटल डिटॉक्स करना चाहिए और दिन में कुछ समय खुद के लिए निकालना चाहिए. प्रकृति के करीब रहना, सुबह की सैर करना और सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताना भी मानसिक सेहत को बेहतर बनाता है.
स्वामी रामदेव ने दी जरूरी सलाह
स्वामी रामदेव की सलाह देते हैं कि अगर हम योग धर्म को अपनाएं, तो स्वास्थ्य धर्म का पालन अपने आप हो जाएगा. योग, प्राणायाम और सही जीवनशैली से हम डिप्रेशन, घबराहट और तनाव जैसी समस्याओं से बच सकते हैं. आज के समय में दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय योग करना एक बेहतर और स्थायी समाधान है. अगर हर व्यक्ति अपने दिन की शुरुआत योग से करे, तो न सिर्फ उसका स्वास्थ्य सुधरेगा बल्कि जीवन में सकारात्मकता ऊर्जा भी बढ़ेगी.
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पाकिस्तान की हालत हो गई खस्ता, स्कूल-कॉलेज बंद; 4 दिन का हुआ वर्किंग वीक
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर साफ दिखाई देने लगा है. लेकिन कुछ देश ऐसे हैं जिनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है. ऐसे ही देशों में है भारत का पड़ोसी और आतंकवाद का दोस्त पाकिस्तान. पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले ही चिंताजनक बनी हुई है. लेकिन अब जंग ने इसकी कमर ही तोड़ दी है. युद्ध का पाकिस्तान पर गहरा प्रभाव पड़ा है. तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, सप्लाई में रुकावट और महंगाई के दबाव ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरकार को अब सख्त कदम उठाने पड़े हैं.
50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम और 4 दिन का वर्किंग वीक
प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की सरकार ने ईंधन बचाने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया है. इसके साथ ही कामकाजी हफ्ते को घटाकर चार दिन का कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि इससे लोगों की आवाजाही कम होगी, जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आएगी. यह कदम सीधे तौर पर तेल बचाने और आर्थिक दबाव कम करने की रणनीति का हिस्सा है.
तेल की कमी का खतरा क्यों बढ़ा?
इस संकट की जड़ मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर असर पड़ने से. यह रास्ता दुनिया में तेल सप्लाई का एक बड़ा जरिया है.
जब इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो कई देशों तक तेल पहुंचना मुश्किल हो जाता है. पाकिस्तान जैसे देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. सरकार को डर है कि आने वाले दिनों में सप्लाई और घट सकती है, जिससे संकट और गहरा जाएगा.
स्कूल-कॉलेज बंद, ऑनलाइन पढ़ाई शुरू
सरकार ने ईंधन बचाने के लिए शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया है. कई इलाकों में स्कूल और कॉलेज दो हफ्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं और पढ़ाई को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दिया गया है.
इस कदम का उद्देश्य साफ है छात्रों और शिक्षकों की यात्रा को कम करना ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत घटे. हालांकि, इस फैसले को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है.
रईसों से अपील, कम करें फिजूलखर्ची
इतना ही नहीं शाहबाज सरकार ने देश के अमीर वर्ग से खास अपील की है कि वे उदाहरण पेश करें और अपनी गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करें. साथ ही गैरजरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी गई है.
जनता से भी कहा गया है कि वे बदलते हालात के अनुसार अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं और हर संभव तरीके से ईंधन की बचत करें.
बढ़ती कीमतों से जनता परेशान
तेल संकट का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में 24 प्रतिशत से ज्यादा और डीजल में 21 फीसदी तक बढ़ोतरी हो चुकी है. इससे महंगाई और गरीबी दोनों तेजी से बढ़ रही हैं.
सोशल मीडिया पर लोग सरकार के फैसलों की आलोचना भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि जहां आम जनता को बचत करने को कहा जा रहा है, वहीं सरकारी खर्चों में कोई कमी नहीं दिख रही.
जानकारों की मानें तो मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो पाकिस्तान की स्थिति और बिगड़ सकती है. फिलहाल सरकार हर संभव कोशिश कर रही है कि ईंधन की खपत कम हो और देश इस संकट से उबर सके. यह साफ है कि वैश्विक घटनाओं का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है, और पाकिस्तान इसका एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है.
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