ओरल हेल्थ बिगड़ी तो दिमाग पर भी पड़ सकता है असर! जानिए कनेक्शन
नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। दांतों और मसूड़ों की सेहत सिर्फ मुस्कान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर हमारे दिमाग और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। हाल के कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि अगर हम अपने दांतों और मसूड़ों का ठीक से ख्याल नहीं रखते, तो इसका असर सिर्फ मुंह तक नहीं रहता, बल्कि पूरे शरीर और खासतौर पर दिमाग पर भी पड़ सकता है।
जब दांत में कीड़ा लग जाता है, मसूड़े सूज जाते हैं या इंफेक्शन हो जाता है, तो लगातार दर्द बना रहता है। ये दर्द आपकी नींद खराब कर सकता है, खाने-पीने में दिक्कत दे सकता है और धीरे-धीरे आपको चिड़चिड़ा बना सकता है। नींद पूरी न होने और दर्द के चलते तनाव और एंग्जायटी बढ़ना आम बात है।
अगर आपके दांत पीले हैं, टूटे हुए हैं या सांस से बदबू आती है, तो आप लोगों के सामने खुलकर बात करने से कतराने लगते हैं। कई लोग तो हंसना तक कम कर देते हैं। इसका सीधा असर आत्मविश्वास पर पड़ता है और धीरे-धीरे ये आपकी मानसिक सेहत को भी प्रभावित करता है।
एक और अहम पहलू बैक्टीरिया भी है। जब हम मुंह की सफाई ठीक से नहीं करते, तो हानिकारक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। ये बैक्टीरिया खून के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जिसमें दिमाग भी शामिल है। कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि खराब ओरल हेल्थ का संबंध मेमोरी लॉस और अन्य कॉग्निटिव समस्याओं से हो सकता है।
सामाजिक जीवन पर भी इसका असर साफ दिखता है। मुंह से बदबू या दांतों की खराब हालत के कारण लोग दूसरों से दूरी बनाने लगते हैं। वे पार्टियों, मीटिंग्स या दोस्तों के साथ समय बिताने से बचते हैं। इससे अकेलापन बढ़ सकता है, जो मानसिक सेहत के लिए अच्छा नहीं है।
अच्छी बात ये है कि इन समस्याओं से बचना बहुत मुश्किल नहीं है। रोजाना दो बार ब्रश करना, खासकर रात में सोने से पहले, फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना, मीठी चीजों का कम सेवन करना और समय-समय पर डेंटिस्ट के पास जाना ये छोटे-छोटे कदम आपको बड़ी परेशानियों से बचा सकते हैं।
बच्चों के लिए भी ये आदतें बहुत जरूरी हैं। अगर बचपन से ही उन्हें दांतों की सही देखभाल सिखा दी जाए, तो वे आगे चलकर दांत स्वस्थ और मजबूत दोनों रहेंगे।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईयू के नेताओं ने प्रवासी प्रवाह के खिलाफ सतर्कता बरतने का लिया संकल्प, मध्य पूर्व में तनाव कम करने का आह्वान
यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं ने शपथ ली है कि वे मध्य पूर्व के संघर्षों से उत्पन्न किसी भी प्रभाव के प्रति सतर्क रहेंगे, जो ईयू देशों पर प्रवासन संबंधी दबाव बढ़ा सकता है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष यूरोप के लिए बढ़ता जोखिम पैदा कर रहा है।
हालांकि यह संघर्ष तुरंत यूरोपीय संघ की ओर प्रवासी प्रवाह में नहीं बदला है। यूरोपीय परिषद की बैठक में नेताओं ने “उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखने और आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करने के महत्व” पर जोर दिया, जैसा कि शिखर सम्मेलन के बाद अपनाए गए निष्कर्षों में कहा गया।
2015 के प्रवासन संकट से मिली सीख पर ध्यान देते हुए ईयू ने कहा कि वह प्रवासन को रोकने और यूरोप में सुरक्षा बनाए रखने के लिए “अपने कूटनीतिक, कानूनी, संचालनात्मक और वित्तीय उपकरणों को पूरी तरह से तैनात करने” के लिए तैयार है। निष्कर्षों में कहा गया, “ईयू की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा और नियंत्रण को लगातार मजबूत किया जाएगा।”
नेताओं ने मध्य पूर्व संघर्ष में तनाव घटाने और अधिकतम संयम अपनाने का भी आग्रह किया। सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह पालन करने को कहा और ऊर्जा एवं जल सुविधाओं पर हमलों पर स्थगन का समर्थन किया।
ईयू की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास में नेताओं ने जोर दिया कि इसके दो मौजूदा समुद्री सुरक्षा अभियानों यूनाफोर एपसाइड्स और यूनाफोर अटलांटा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधन तैनात किए जाने चाहिए।
यूनाफोर एपसाइड्स और यूनाफोर अटलांटा दोनों ही ईयू के सैन्य अभियान हैं, जो समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं। इनका संयुक्त क्षेत्र लाल सागर, हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र तक फैला है।
2015 के प्रवासन संकट के दौरान, सीरिया के युद्ध और अफगानिस्तान व इराक में अस्थिरता के कारण एक मिलियन से अधिक शरणार्थी और प्रवासी यूरोप में प्रवेश किए, जिससे सीमा और शरण प्रणाली पर दबाव पड़ा। इससे आपात स्थिति उत्पन्न हुई और ईयू के भीतर राजनीतिक विभाजन गहरा गया।
यूरोपीय परिषद की बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और इज़राइल से आग्रह किया कि वे ईरान के साथ युद्ध समाप्त करें और सैन्य कार्रवाई के स्थान पर कूटनीति अपनाने पर जोर दिया।
--आईएएनएस
पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















