राहुल गांधी 'ब्रिटिश नागरिकता' केस: हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने पेश की 4000 पन्नों की भारी-भरकम फाइल
लखनऊ: कांग्रेस नेता और रायबरेली के सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस मामले में केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष करीब 4000 पन्नों के दस्तावेज पेश किए हैं।
इन फाइलों में राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े कई अहम बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है।
जस्टिस के चेंबर में हुई 'सीक्रेट' चर्चा: गृह मंत्रालय ने सौंपी फाइल
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस राजीव सिंह के चेंबर में दोपहर के भोजन के बाद करीब एक घंटे तक गहन चर्चा हुई। इस दौरान केंद्र सरकार के वकील और याचिकाकर्ता के बीच दस्तावेजों को लेकर मंथन किया गया।
केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय (MHA) के विदेशी प्रभाग और नागरिकता विंग से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें पेश की गईं। हालांकि, इन 4000 पन्नों में क्या खास जानकारी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है, लेकिन इसे मामले में एक ठोस प्रगति माना जा रहा है।
30 महीने बाद मामले में आई तेजी: याचिकाकर्ता ने किया बड़ा दावा
याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर का कहना है कि करीब ढाई साल के इंतजार के बाद इस मामले में पहली बार इतनी बड़ी प्रगति देखने को मिली है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में ऐसी जानकारियां हैं जो मामले की दिशा पूरी तरह बदल सकती हैं। विग्नेश शिशिर ने ही राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
FIR दर्ज कराने की मांग: MP-MLA कोर्ट के फैसले को चुनौती
यह याचिका रायबरेली के कोतवाली थाने में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के उद्देश्य से दाखिल की गई है। इससे पहले, विशेष MP-MLA कोर्ट ने 28 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया था।
याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में मांग की गई है कि राहुल गांधी के खिलाफ 'ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923', 'पासपोर्ट एक्ट 1967' और 'फॉरेनर्स एक्ट 1946' जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जाए।
कोर्ट ने 9 मार्च को मांगे थे पूरे दस्तावेज
बता दें कि 9 मार्च 2026 को हुई पिछली सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि राहुल गांधी की नागरिकता से संबंधित अब तक की पूरी जांच फाइल कोर्ट के समक्ष पेश की जाए। उसी आदेश के अनुपालन में गुरुवार को यह विस्तृत रिकॉर्ड पेश किया गया। अब सबकी नजरें 6 अप्रैल पर टिकी हैं, जब कोर्ट इन दस्तावेजों के आधार पर अपना अगला रुख स्पष्ट करेगा।
Eid 2026: आज या कल कब मनाई जाएगी ईद-उल-फितर, जानें चांद दिखने का समय
Eid 2026 Date: ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म के सबसे प्रमुख और खुशियों भरे त्योहारों में से एक है। यह पवित्र पर्व रमजान के महीने के समापन के बाद शव्वाल महीने के पहले दिन मनाया जाता है। पूरे महीने रोजा रखने के बाद यह दिन अल्लाह का शुक्रिया अदा करने, इबादत करने और समाज में भाईचारे का संदेश फैलाने के लिए खास माना जाता है।
भारत में कब मनाई जाएगी ईद?
भारत में भी ईद का त्योहार चांद के दीदार पर निर्भर करता है। 19 मार्च की शाम को कई हिस्सों में चांद दिखाई नहीं दिया, भले ही मौसम साफ था। इसके चलते रमजान का एक और रोजा रखा जाएगा। अब आज यानी 20 मार्च की शाम को चांद नजर आने की उम्मीद है। यदि ऐसा होता है, तो देशभर में 21 मार्च 2026 को ईद-उल-फितर का पर्व मनाया जाएगा।
सऊदी अरब में कब है ईद?
मिडिल ईस्ट के देशों में चांद दिखने के आधार पर ईद की तारीख तय होती है। सऊदी अरब में 18 मार्च की शाम को चांद नजर नहीं आया, जिसके चलते रमजान के 30 रोजे पूरे किए जा रहे हैं। ऐसे में वहां 19 मार्च की शाम को चांद दिखाई दिया है। आज 20 मार्च 2026 को ईद-उल-फितर मनाई जाएगी।
ईद-उल-फितर का महत्व
ईद-उल-फितर को खुशियों, एकता और इंसानियत का त्योहार माना जाता है। रमजान के दौरान रोजा रखने के बाद मुसलमान इस दिन विशेष नमाज अदा करते हैं और अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं। इस मौके पर “फितरा” देना भी जरूरी माना गया है। इसका उद्देश्य है कि समाज का कोई भी व्यक्ति ईद के दिन भूखा न रहे। जरूरतमंदों की मदद करना और दान देना इस त्योहार की अहम परंपरा है।
ईद के दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, मस्जिदों में जाकर नमाज अदा करते हैं और एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहते हैं। यह त्योहार समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देता है। कुल मिलाकर, ईद-उल-फितर केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और उदारता का प्रतीक है। यह दिन हमें साझा खुशियों और दूसरों की मदद करने की भावना को अपनाने की प्रेरणा देता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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