Honda Plant: होंडा ने भारत में टू-व्हीलर प्रोडक्शन बढ़ाया, टपूकड़ा प्लांट को लेकर लिया बड़ा फैसला
Honda Plant: होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (HMSI) ने भारत में दोपहिया वाहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के विस्तार का ऐलान किया है। कंपनी अलवर जिले के टपूकड़ा स्थित अपने प्लांट में तीसरी प्रोडक्शन लाइन स्थापित करेगी, जिससे उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान मैन्युफैक्चरिंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि एचएमएसआई का यह निवेश न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम को भी मजबूती देगा।
HMSI के अनुसार, नई प्रोडक्शन लाइन वर्ष 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है और इसकी सालाना उत्पादन क्षमता 6.7 लाख यूनिट होगी। इस विस्तार के बाद टपूकड़ा प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 20.1 लाख यूनिट प्रति वर्ष हो जाएगी। इस परियोजना से 2,000 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस विस्तार योजना के तहत कंपनी लगभग 1,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और टपूकड़ा में 73,700 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण करेगी। नई लाइन में स्कूटर और मोटरसाइकिल के कम्यूटर सेगमेंट मॉडल्स का उत्पादन किया जाएगा।
वर्तमान में एचएमएसआई भारत में चार मैन्युफैक्चरिंग प्लांट संचालित करता है, जिनकी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 62.5 लाख यूनिट है। कंपनी अब तक 7 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहनों का उत्पादन कर चुकी है। इसके अलावा, कंपनी गुजरात के विठलापुर प्लांट में भी चौथी प्रोडक्शन लाइन जोड़ रही है, जो 2027 तक शुरू होने की संभावना है।
2028 तक प्रोडक्शन कैपेसिटी 80 लाख यूनिट होगी
- एचएमएसआई के प्रेसिडेंट और सीईओ Tsutsumu Otani ने कहा कि भारत तेजी से मोबिलिटी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और कंपनी इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि टपूकड़ा प्लांट में उत्पादन इकोसिस्टम को मजबूत करना सप्लाई चेन को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाएगा। इससे कंपनी बाजार की मांग के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होगी।
- कंपनी ने कहा है कि इन विस्तार योजनाओं के बाद उसकी कुल प्रोडक्शन कैपेसिटी वर्ष 2028 तक बढ़कर लगभग 80 लाख यूनिट प्रति वर्ष हो जाएगी। साथ ही, 2050 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एचएमएसआई सोलर एनर्जी, जल संरक्षण और रीसाइक्लिंग जैसी टिकाऊ पहलों को भी तेजी से अपनाने पर काम कर रही है।
(मंजू कुमारी)
भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते लौट रहे स्वदेश: एमईए
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को कहा कि ईरान में फंसे करीब 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र, व्यवसायी और तीर्थयात्री शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते अपने घर वापस आ रहे हैं। कई लोग पहले ही पहुंच चुके हैं। एमईए ने खाड़ी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को भी गलत बताया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, “कई लोगों ने खुद को दूतावास में रजिस्टर नहीं कराया है। इसलिए, हमारा अंदाजा था कि 9,000 लोग थे। इनमें से, लड़ाई शुरू होने से पहले काफी संख्या में छात्र लौट आए थे। अभी, लगभग 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र और व्यवसाय करने वाले लोगों के साथ-साथ यहां से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री भी शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्तों से लौटने की प्रक्रिया में हैं। कुछ पहले ही पहुंच चुके हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “वहां यात्रा करने वाले 284 तीर्थयात्रियों में से 280 लौट आए हैं; वे आर्मेनिया के रास्ते आए थे। तीन या चार और बचे हैं, जिनके भी एक या दो दिन में पहुंचने की उम्मीद है।”
जायसवाल ने बताया कि 772 लोग घर लौटने के लिए ईरानी जमीनी बॉर्डर पार करके आर्मेनिया चले गए, जबकि अजरबैजान के रास्ते पर गतिविधी धीमी धीमी है, 110 भारतीय नागरिकों में से कुछ अभी लौटने वाले हैं और कुछ पहले ही भारत वापस आ चुके हैं।
पिछले हफ्ते, ईरान में भारतीय नागरिकों को दी जा रही मदद के बारे में बताते हुए, जायसवाल ने कहा था कि कई नागरिक घर लौट आए हैं, जबकि जो लोग स्वदेश लौटने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मदद जारी है।
मंत्रालय ने ईरान छोड़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय नागरिकों से तेहरान में भारतीय दूतावास द्वारा जारी की गई सलाह का पालन करने का आग्रह किया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, भारत ने पहले भी इस क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया था। इस क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हाल ही में हुए हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और ये पूरी दुनिया के लिए पहले से ही अनिश्चित ऊर्जा परिदृश्य को और अधिक अस्थिर कर रहे हैं। ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें बंद किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
केआर/
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