CM Yogi on Akhilesh Yadav: 'बबुआ 12 बजे सोकर उठते थे', अखिलेश के लिए क्या बोले CM योगी? | UP News |
CM Yogi on Akhilesh Yadav: 'बबुआ 12 बजे सोकर उठते थे', अखिलेश के लिए क्या बोले CM योगी? | UP News | #cmyogi #akhileshyadav #upnews सीएम योगी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. मुख्यमंत्री ने कहा, 'बबुआ 12 बजे सोकर उठते थे. कुछ लोग जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं'. news18 up live, aaj ki taaza khabar, news18 up uttarakhand live, uttar pradesh news, kanwar yatra 2026, arvind kejriwal pm residence march, ram mandir donation controversy, income tax amendment bill 2026, uttar pradesh weather, sheikh hasina audio live briefing, meta algorithm scrutiny india, supreme court judges retirement age, social media ban for minors india, imd heavy rainfall alert, pakistan political unrest 2026, meerut kanwariya ground report news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh Follow Every Breaking Story LIVE ???? Watch News18 LIVE 24x7: https://youtube.com/live/pVXYxHNwJo8 SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|
Sawan 2026: कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए क्यों जाते हैं श्रद्धालु त्र्यंबकेश्वर मंदिर? जानें पौराणिक कथा
Sawan 2026: इस समय सावन का पवित्र महीना चल रहा है. यह महीना भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. दरअसल, देवश्यनी एकादशी के बाद से भगवान विष्णु भी योगमुद्रा में है. इसलिए, धरती का कार्यभार भगवान शिव पर आ जाता है. सावन के महीने में कुंडली के कुछ खराब दोषों का निवारण करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. कालसर्प दोष भी इन्हीं में से एक हैं. जिस किसी की कुंडली में कालसर्प दोष होता है उसके राहु-केतु सही नहीं होते हैं. ऐसे लोगों को अपने जीवन में खूब संघर्ष करना पड़ता है. इनके जीवन में बाधाएं आती हैं और आर्थिक अस्थिरता बनी रहती है. व्यक्ति को हर छोटी-बड़ी सफलता के लिए परिश्रम करना होता है. कहते हैं कि इन लोगों को सावन के महीने में त्र्यंबकेश्वर मंदिर में पूजा करनी चाहिए. यह मंदिर कालसर्प दोष की पूजा के लिए खास माना जाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में विस्तार से.
कालसर्प दोष क्या होता है?
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा के अनुसार, कालसर्प दोष बहुत ही अशुभ होता है. यह जिस व्यक्ति की कुंडली में होता है, उसे जीवन में बहुत संघर्ष करने होते हैं. कुंडली में कालसर्प दोष मनुष्य को मानसिक और शारीरिक दोनों ही प्रकार से प्रभावित करता है. जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी सातों ग्रह सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि के साथ राहु और केतु के बीच आ जाता है तो उसे कालसर्प दोष कहते हैं. इन लोगों को बिना वजह मानसिक अशांति का सामना करना होता है. भय महसूस होता है. साथ ही हमेशा सिरदर्द, स्किन से जुड़ी परेशानियां और स्वास्थ्य खराब रहता है.
काल सर्प दोष के प्रकार
काल सर्प दोष के ज्योतिष में कुल 12 प्रकार होते हैं.
- 1.अनंत कालसर्प योग- जब राहु लग्न में और केतु सप्तम भाव में हो.
- 2.कुलिक कालसर्प योग-जब राहु द्वितीय भाव में और केतु अष्टम भाव में हो.
- 3.वासुकी कालसर्प योग- जब राहु तृतीय भाव में और केतु नवम भाव में हो.
- 4.शंखपाल कालसर्प योग- जब राहु चतुर्थ भाव में और केतु दशम भाव में हो.
- 5.पद्म कालसर्प योग-जब राहु पंचम भाव में और केतु एकादश भाव में हो.
- 6. महापद्म कालसर्प योग- जब राहु छठे भाव में और केतु द्वादश भाव में हो.
- 7. कर्कोटक कालसर्प योग- जब राहु सप्तम भाव में और केतु लग्न में हो.
- 8. तक्षक कालसर्प योग- जब राहु अष्टम भाव में और केतु द्वितीय भाव में हो.
- 9. शंखचूड़ कालसर्प योग- जब राहु नवम भाव में और केतु तृतीय भाव में हो.
- 10. घातक कालसर्प योग- जब राहु दशम भाव में और केतु चतुर्थ भाव में हो.
- 11. विषधर कालसर्प योग- जब राहु एकादश भाव में और केतु पंचम भाव में हो.
- 12. शेषनाग कालसर्प योग- जब राहु द्वादश भाव में और केतु छठे भाव में हो.
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त्र्यंबकेश्वर मंदिर की खासियत?
त्र्यंबकेश्वर मंदिर शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह कालसर्प दोष के निवारण के लिए सबसे प्रभावी तीर्थ स्थान माना जाता है. यहां स्वयंभू शिवलिंग है, जिसके तीन छोटे मुख हैं. ये ब्रह्मा, महेश और विष्णु का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस मंदिर में कालसर्प दोष की पूजा करने के लिए एक दिवसीय अनुष्ठान होता है, जो कई घंटों तक चलता है.
मंदिर में कैसे होती है कालसर्प दोष की पूजा?
यहां पूजा में सबसे पहले जातक को गोदावरी नदी में स्नान करवाया जाता है. इसके बाद विघ्नहर्ता भगवान गणेश के आह्वान और संकल्प के साथ पूजा शुरू होती है. पूजा में तांबे या चांदी के राहु-केतु और नागों की मूर्तियों को रखा जाता है और उनका पूजन होता है. भगवान शिव त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग पर दूध, जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है. राहु-केतु के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए महामृत्युंजय मंत्रों का जाप किया जाता है. नाग मंत्रों का जाप व हवन किया जाता है. पूजा के लिए समय आमतौर पर सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच कराई जाती है. पुरुषों के लिए सफेद धोती-कुर्ता और महिलाओं के लिए साड़ी पारंपरिक परिधान होता है.
त्र्यंबकेश्वर मंदिर कहां है?
यह मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है. यह प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जिसके तीन छोटे मुख है. यहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश- तीनों त्रिदेवों के प्रतीक रूप में तीन छोटे लिंग विद्यमान हैं. यह गोदावरी नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का आठवां ज्योतिर्लिंग माना जाता है. इसे त्रिमुखी ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है. इस मंदिर में कुशावर्त कुंड है, जिसमें स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. सावन में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचती है.
क्या सच में त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष की पूजा कराने से दोष समाप्त हो जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित यह मंदिर कालसर्प दोष के लिए खास स्थान है. इस मंदिर में पूजा करवाने से नकारात्मक प्रभावों का असर भी कम हो सकता है. मानसिक शांति भी मिलती है. कई लोगों का मानना है कि पूजा के बाद साधक को डर, तनाव और बाधाएं नहीं होती हैं. साथ ही ज्योतिषों का मानना है कि यह पूजा मानसिक रूप से भी मजबूत करती है. मगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह तर्कवादी हो सकता है. साइंस में इसका कोई वास्तविक संबंध नहीं मिलता है.
क्या है त्र्यंबकेश्वर मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा?
त्र्यंबकेश्वर मंदिर की स्थापना गौतम ऋषि द्वारा हुई थी. इस मंदिर की कथा भी उन्हीं से जुड़ी हुई है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मगिरि पर्वत पर महर्षि गौतम और उनकी पत्नी अहिल्या निवास करते थे. एक बार क्षेत्र में भयानक अकाल पड़ गया था तब ऋषि ने अपनी तपस्या से वरुण देव को प्रसन्न कर यहां प्रचुर मात्रा में अन्न और जल प्राप्त किया था. इससे ईर्ष्यावश अन्य ऋषियों और देवताओं ने मिलकर एक मायावी गाय का निर्माण किया. उस गाय को ऋषि के खेत में छोड़ दिया. उसके बाद जब ऋषि गाय को भगाने के लिए घास का तिनका छूआ, तो उसी श्रण गाय गिरकर मर गई. इससे गौतम ऋषि को गौहत्या का पाप लग गया. अपने पाप से मुक्ति पाने के लिए महर्षि गौतम ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. शिव जी ने उनसे प्रसन्न होकर माता गंगा को पृथ्वी पर गोदावरी नदी के रूप में प्रकट होने का आशीर्वाद दिया. इसके बाद गौतम ऋषि ने भी भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे यानी त्र्यंबकेश्वर में हमेशा के लिए ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो जाए. भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और वहां त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई. इससे तीनों लोकों के पापों का नाश करने वाला स्थान भी माना जाता है.
सावन में त्र्यंबकेश्वर क्यों जाना चाहिए?
सावन के महीने मं महाराष्ट्र के इस खूबसूरत मंदिर में दर्शन जरूर करने चाहिए. सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इसलिए, प्रमुख शिवालयों के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जिसके गर्भ गृह में तीन छोटे-छोटे अंगूठे के आकार के लिंग है. सावन के दौरान ब्रह्मगिरी पहाड़ियों और आस-पास के इलाकों में हरा-भरा वातावरण रहता है, जो मन को शांति प्रदान करता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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