एआई के चलते एचएसबीसी में जा सकती हैं 20,000 नौकरियां: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। लंदन मुख्यालय वाला निवेश बैंक एचएसबीसी आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की संख्या घटाने पर विचार कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, एचएसबीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जॉर्जेस एलहेडरी बैंक के कामकाज को ज्यादा आसान और तेज बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल बढ़ाना चाहते हैं।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खास तौर पर वे नौकरियां ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं जो सीधे ग्राहकों से जुड़ी नहीं हैं, जैसे मिडिल और बैक-ऑफिस के काम। हालांकि इस पर अभी शुरुआती स्तर पर ही चर्चा चल रही है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बदलाव से करीब 20,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जो बैंक के कुल वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 10 प्रतिशत है। हालांकि बैंक की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
बताया गया है कि इस तरह के बदलाव पर चर्चा मध्य-पूर्व में हालिया तनाव बढ़ने से पहले ही शुरू हो गई थी।
साल 2024 में सीईओ बनने के बाद जॉर्ज एलहेडरी ने बैंक में बड़े स्तर पर बदलाव शुरू किए हैं, जिसमें पहले ही हजारों कर्मचारियों की छंटनी, कुछ कारोबारों की बिक्री, विलय और बंद करने जैसे फैसले शामिल हैं।
2025 के अंत तक एचएसबीसी में करीब 2,10,000 कर्मचारी थे। अब बैंक यह भी देख रहा है कि जिन पदों पर कर्मचारी खुद नौकरी छोड़ते हैं, उन्हें दोबारा भरा जाए या नहीं। इसके अलावा कुछ नौकरियां कारोबार बंद करने या बेचने से भी खत्म हो सकती हैं।
यह कदम वैश्विक बैंकिंग सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे उस ट्रेंड को दिखाता है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरत बदल रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले तीन से पांच वर्षों में दुनिया भर के बैंक लगभग 2 लाख नौकरियां खत्म कर सकते हैं, क्योंकि कई काम अब मशीनें और एआई करने लगेंगी। तकनीकी प्रमुखों का मानना है कि कुल कर्मचारियों की संख्या में औसतन करीब 3 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
इससे पहले एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि बड़ी टेक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स भी अपने खर्च को नियंत्रित करने और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निवेश करने के लिए बड़े स्तर पर छंटनी कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, मेटा अपने कर्मचारियों में 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा की कटौती कर सकती है, जो करीब 16,000 कर्मचारियों के बराबर है। दिसंबर के अंत तक कंपनी में करीब 79,000 कर्मचारी थे।
--आईएएनएस
डीबीपी
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12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले रोकने की अपील की
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के बीच कई देशों की हवा बारूद के धुएं से भर गई। इजरायल की ओर से ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट साउथ पार्स फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात के गैस प्लांट पर हमला कर दिया। इस बीच 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान के इस हमले की निंदा की और इन्हें तुरंत रोककर अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने को कहा।
सऊदी की राजधानी रियाद में गुरुवार को हुई मीटिंग के बाद जारी एक संयुक्त बयान में 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने को कहा।
यह बयान अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों की ओर से जारी किया गया था।
बयान में, मंत्रियों ने खाड़ी देशों-जॉर्डन, अजरबैजान और तुर्किए पर हमलों की निंदा की। विदेश मंत्रियों ने कहा कि ईरान ने रिहायशी क्षेत्रों, नागरिकों के इलाके के ढांचे, जिसमें तेल की फैसिलिटी, डीसेलिनेशन प्लांट, एयरपोर्ट, रेजिडेंशियल बिल्डिंग और डिप्लोमैटिक जगहें शामिल हैं, को टारगेट किया था।
इसके अलावा मंत्रियों ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की भी निंदा की और इलाके की सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए समर्थन दोहराया।यह संयुक्त बयान तब आया, जब ईरान ने खाड़ी में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया और कतर में सुविधाओं में आग लगने और सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की खबरें आईं।
संयुक्त बयान में विदेश मंत्रियों ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के साथ संबंधों का भविष्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और उनके अंदरूनी मामलों में दखल न देने पर निर्भर करता है। साथ ही, किसी भी तरह से उनकी संप्रभुता या उनके इलाकों का उल्लंघन करने से बचना चाहिए और इलाके के देशों को धमकाने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल या विकास नहीं करना चाहिए।
इससे पहले, ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिका और इजरायल पर उसके तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन सुविधाओं के कुछ हिस्सों पर हमला करने का आरोप लगाया था।
वहीं कतर ने रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमले की कड़ी निंदा की है। कतर ने कहा कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन है। इस हमले के बाद ईरानी दूतावास के सैन्य अटैशे और सुरक्षा अटैशे के साथ-साथ उनके ऑफिस के स्टाफ को भी पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित कर दिया और उन्हें 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया। जब कोई देश किसी विदेशी राजनयिक को स्वीकार नहीं करता या उसे देश छोड़ने के लिए कह देता है, तो उसे पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित किया जाता है।
एक आधिकारिक बयान में कतर ने इस हमले को देश की आजादी का खुला उल्लंघन और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और इलाके की स्थिरता के लिए सीधा खतरा बताया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कतर शुरू से ही इस संघर्ष से खुद को दूर रखने की नीति पर चल रहा है। तनाव बढ़ने से बचने के वादे के बावजूद ईरान ने उसे और पड़ोसी देशों को निशाना बनाना जारी रखा है। यह एक गैर-जिम्मेदाराना तरीका है जो इलाके की सुरक्षा को कमजोर करता है और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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