Kitchen Tips: बारिश में मसालों में नमी लगने लगी है? अपनाएं ये देसी ट्रिक्स, महीनों तक रहेंगे फ्रेश
Kitchen Tips: बरसात के मौसम में रसोई की सबसे आम समस्याओं में से एक है मसालों और नमक में नमी आ जाना। नमी के कारण नमक सख्त हो जाता है, मसालों की खुशबू कम होने लगती है और कई बार उनमें फफूंदी लगने का भी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बार-बार नए मसाले खरीदना जेब पर भी भारी पड़ सकता है और खाने का स्वाद भी प्रभावित होता है।
अगर आप चाहते हैं कि आपके किचन के मसाले लंबे समय तक ताजे, सूखे और खुशबूदार बने रहें, तो कुछ आसान घरेलू उपाय काफी कारगर साबित हो सकते हैं। ये देसी ट्रिक्स न सिर्फ नमी से बचाव करती हैं, बल्कि मसालों की गुणवत्ता और स्वाद को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 4 आसान और असरदार उपाय।
एयरटाइट कंटेनर में ही रखें मसाले और नमक
मसालों और नमक को हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले एयरटाइट कांच या फूड-ग्रेड प्लास्टिक कंटेनर में स्टोर करें। कंटेनर का ढक्कन हर बार अच्छी तरह बंद करें ताकि हवा और नमी अंदर न जा सके। गीले चम्मच का इस्तेमाल करने से भी बचें, क्योंकि थोड़ी-सी नमी भी पूरे डिब्बे को खराब कर सकती है।
नमक में डालें कुछ चावल के दाने
यह एक पुराना और बेहद कारगर घरेलू उपाय है। नमक के डिब्बे में 8-10 सूखे चावल के दाने डाल दें। चावल अतिरिक्त नमी को सोख लेते हैं, जिससे नमक लंबे समय तक सूखा और आसानी से इस्तेमाल करने योग्य बना रहता है। ध्यान रखें कि चावल पूरी तरह सूखे हों।
मसालों को धूप दिखाएं
अगर आपको लगे कि हल्दी, धनिया, लाल मिर्च या गरम मसाला हल्का नम हो गया है, तो उन्हें साफ प्लेट में फैलाकर कुछ समय के लिए हल्की धूप में रखें। इससे अतिरिक्त नमी निकल जाती है और मसालों की खुशबू भी बनी रहती है। तेज धूप में बहुत देर तक रखने से बचें, क्योंकि इससे रंग और स्वाद प्रभावित हो सकता है।
किचन को सूखा और हवादार रखें
रसोई में लगातार नमी रहने से मसाले जल्दी खराब हो सकते हैं। इसलिए किचन में उचित वेंटिलेशन रखें और खाना बनाते समय बनने वाली भाप को बाहर निकलने दें। यदि संभव हो तो एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें। मसालों के डिब्बों को गैस स्टोव या सिंक के बिल्कुल पास रखने से भी बचें।
इन बातों का भी रखें ध्यान
- मसाले हमेशा छोटे-छोटे बैच में खरीदें।
- मसालों को सीधे धूप या अत्यधिक गर्म जगह पर न रखें।
- डिब्बों को समय-समय पर साफ और पूरी तरह सूखा करें।
- नमक और मसालों में हमेशा सूखे चम्मच का ही इस्तेमाल करें।
- खराब गंध या फफूंदी दिखने पर मसालों का उपयोग न करें।
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लेखक: (कीर्ति)
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ऊना दलित कांड: आरोपियों के बरी होने पर मायावती ने जताई चिंता, गुजरात सरकार पर साधा निशाना
Una Dalit case: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने साल 2016 के चर्चित ऊना दलित कांड के आरोपियों के बरी होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी कर पीड़ित परिवारों की कानूनी और आर्थिक चुनौतियों का मुद्दा उठाया है और गुजरात सरकार से इस मामले में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.
बहुजन समाज में व्याप्त है भारी चिंता
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में बताया कि गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में साल 2016 में दलितों पर जघन्य अत्याचार हुआ था. इस मामले के लगभग सभी अभियुक्तों को स्थानीय अदालत ने इसी साल मार्च में बरी कर दिया है. मायावती ने चिंता जताते हुए कहा कि इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए पीड़ित दलित परिवारों को भारी वित्तीय और अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस विचलित करने वाली सच्चाई के कारण विशेषकर बहुजन समाज के लोगों में भारी चिंता का माहौल है.
सरकारी लापरवाही और उदासीनता का आरोप
मायावती ने घटना के समय के अपने दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद पीड़ितों से मिलने वहां गई थीं और सच्चाई जानने के बाद राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने निराशा व्यक्त की कि देशभर में हुए भारी विरोध और आक्रोश के बावजूद 40 में से 35 आरोपियों का बरी हो जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने इसे दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हितों की अनदेखी और सुरक्षा के प्रति सरकार की लापरवाही व उदासीनता का सीधा परिणाम बताया है.
मुफ्त कानूनी सहायता और हाईकोर्ट में पैरवी की मांग
राज्य सरकार से अपनी गलती सुधारने की अपील करते हुए मायावती ने मांग की है कि सरकार इस मामले की हाईकोर्ट में मजबूती से पैरवी करे. उनका कहना है कि सभी दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए. इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग रखी कि पीड़ित परिवारों की संतुष्टि के अनुसार उन्हें सरकारी खर्च पर वकील मुहैया कराया जाए. उन्होंने अपनी पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश सरकार का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि बसपा शासनकाल में गरीबों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता का विशेष कानूनी प्रावधान किया गया था, और गुजरात सरकार को भी उसी तर्ज पर पीड़ितों की मदद करनी चाहिए.
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