गुजरात के अल्पसंख्यकों के लिए खुशखबरी, बिजनेस शुरू करने के लिए सरकार दे रही 20 लाख तक का सस्ता लोन
गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए एक बहुत ही शानदार पहल की है. गुजरात अल्पसंख्यक वित्त और विकास निगम यानी GMFDC द्वारा चलाई जा रही "टर्म लोन योजना" उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं लेकिन पैसों की कमी की वजह से पीछे रह जाते हैं. इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और यहूदी जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ सिंधी, मराठी और उर्दू बोलने वाले भाषाई अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार के अवसर देना है.
कितना मिलेगा पैसा और क्या है ब्याज दर
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान शर्तें और कम ब्याज दर है. GMFDC टर्म लोन योजना के तहत लाभार्थी को 1 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 20 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. ब्याज की बात करें तो यह आपकी जेंडर और सालाना कमाई पर निर्भर करता है. अगर आपकी सालाना पारिवारिक आय 1.20 लाख रुपये तक है, तो महिला और पुरुष दोनों को केवल 6 पर्सेंट सालाना ब्याज देना होगा. वहीं, जिनकी आय 1.20 लाख से 8 लाख रुपये के बीच है, उनमें पुरुषों के लिए ब्याज दर 8 पर्सेंट और महिलाओं के लिए 6 पर्सेंट रखी गई है. इस लोन को चुकाने के लिए आपको 5 साल यानी 60 महीनों का समय मिलता है, जिसे समान किस्तों में वापस करना होता है.
किन कामों के लिए ले सकते हैं मदद
GMFDC ने इस लोन के दायरे में लगभग हर उस काम को रखा है जिससे कमाई की जा सके. अगर आप खेती या पशुपालन से जुड़े हैं, तो डेयरी और मत्स्य पालन के लिए पैसा ले सकते हैं. सर्विस सेक्टर में रुचि रखने वाले लोग प्रोविजन स्टोर, रेडीमेड गारमेंट की दुकान, साइबर कैफे, ब्यूटी पार्लर या ऑटो रिपेयरिंग सेंटर खोल सकते हैं. इसके अलावा हस्तशिल्प और पारंपरिक कारीगरी से जुड़े छोटे उद्योगों के लिए भी लोन मिलता है. अगर कोई ट्रांसपोर्ट के काम में हाथ आजमाना चाहता है या किसी तकनीकी फील्ड में अपना हुनर दिखाना चाहता है, तो उसे भी इस स्कीम का पूरा सपोर्ट मिलता है.
कौन कर सकता है आवेदन
इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए कुछ जरूरी पात्रताएं तय की गई हैं. सबसे पहले तो आवेदक का गुजरात का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है. आवेदक की उम्र 21 साल से 45 साल के बीच होनी चाहिए. आय की बात करें तो परिवार की कुल सालाना कमाई 8 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. एक और जरूरी बात यह है कि परिवार के किसी भी सदस्य ने पहले कभी GMFDC या किसी अन्य सरकारी निगम से लोन न लिया हो. अगर आप इन शर्तों को पूरा करते हैं, तो आप इस सुनहरे अवसर का हिस्सा बन सकते हैं.
जरूरी कागज और आवेदन का तरीका
लोन के लिए आवेदन करने से पहले आपको कुछ डॉक्युमेंट्स तैयार रखने होंगे. इसमें आपकी पहचान और पते के सबूत के तौर पर आधार कार्ड, वोटर आईडी या बिजली बिल की जरूरत होगी. उम्र के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देना होगा. इसके अलावा अल्पसंख्यक होने का सर्टिफिकेट, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी आय का प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और जिस बिजनेस को आप करना चाहते हैं उसकी एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी जरूरी है. अगर आपके पास उस काम का कोई अनुभव या डिग्री है, तो उसका सर्टिफिकेट भी जरूर लगाएं.
आवेदन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी है. सबसे पहले आपको GMFDC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर खुद को 'New User' के तौर पर रजिस्टर करना होगा. इसके बाद अपनी आईडी से लॉगिन करके 'Term Loan Scheme' का चुनाव करना होगा. फॉर्म में अपनी सभी पर्सनल और बिजनेस की जानकारी भरें और मांगे गए कागज स्कैन करके अपलोड कर दें. फॉर्म सबमिट करने के बाद मिलने वाले एप्लीकेशन नंबर को संभाल कर रखें. लोन की मंजूरी आपके बिजनेस प्लान की मजबूती पर निर्भर करती है, इसलिए अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट को बहुत ही ध्यान से तैयार करें.
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क्या अमेरिका तक पहुंच बना रहा पाकिस्तान का मिसाइल प्रोग्राम? यूएस इंटेलिजेंस रिपोर्ट में खुलासा
वॉशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने बुधवार को चेतावनी दी कि पाकिस्तान का प्रगतिशील मिसाइल प्रोग्राम संयुक्त राज्य अमेरिका को भी निशाना बना सकता है। उन्होंने इसे अमेरिकी धरती के लिए बढ़ते वैश्विक खतरों के समूह का एक हिस्सा बताया।
गबार्ड ने 2026 की वार्षिक खतरों की रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि चीन और रूस उन्नत डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली को मात देने में सक्षम होंगे, जबकि उत्तर कोरिया के पास पहले से ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो अमेरिकी धरती तक पहुंच सकती हैं, और यह अपना परमाणु शस्त्रागार बढ़ाने में लगा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का लंबी दूरी वाला बैलिस्टिक मिसाइल विकास अंततः इंटरकॉन्टिनेंटल सिस्टम में विकसित हो सकता है, जो अमेरिका को भी निशाना बनाने में सक्षम हो सकता है। इसे अमेरिकी सुरक्षा योजनाकारों के लिए उभरते रणनीतिक खतरों की श्रेणी में रखा गया है।
उन्होंने सीनेट इंटेलिजेंस सेलेक्ट कमेटी के सदस्यों को कहा, “इंटेलिजेंस कम्युनिटी का आकलन है कि चीन और रूस उन्नत डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो अमेरिकी मिसाइल रक्षा को पार या बेअसर कर सकें। उत्तर कोरिया की आईसीबीएम पहले ही अमेरिकी धरती तक पहुंच सकती हैं और वह अपने परमाणु शस्त्रागार को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
गबार्ड ने सीनेट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस के सदस्यों से कहा, पाकिस्तान के लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में संभावित रूप से ऐसी आईसीबीएमएस शामिल हो सकती हैं, जिनकी मारक क्षमता अमेरिकी धरती तक पहुंचने की हो।
विश्व खतरा आकलन पर उनकी 34 पन्नों की रिपोर्ट में भी इसी तरह का आकलन किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया, “पाकिस्तान लगातार अधिक अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है, जो उसकी सेना को दक्षिण एशिया से परे लक्ष्यों तक मार करने की क्षमता वाले मिसाइल सिस्टम विकसित करने का साधन प्रदान करती है, और यदि ये प्रवृत्तियां जारी रहती हैं, तो यह अमेरिका के लिए खतरा बन सकती हैं।”
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष में दक्षिण एशिया अमेरिकी सुरक्षा के लिए निरंतर चुनौतियों का स्रोत बना रहा। भारत-पाकिस्तान संबंधों में परमाणु संघर्ष का जोखिम बना हुआ है, क्योंकि इन दोनों परमाणु देशों के बीच अतीत में कई बार टकराव हो चुका है, जिससे बढ़ने वाले संकट का खतरा है।
रिपोर्ट में कहा गया, “पिछले साल पहलगाम के पास हुए आतंकवादी हमले ने दिखाया कि आतंकवादी हमले संघर्ष को बढ़ावा दे सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप से हालिया परमाणु तनाव कम हुआ है, और हमारा आकलन है कि कोई भी देश खुले संघर्ष में वापस नहीं जाना चाहता, लेकिन परिस्थितियां मौजूद हैं, जिससे आतंकवादी फिर से संकट उत्पन्न कर सकते हैं।”
गबार्ड ने कानून निर्माताओं को बताया कि अमेरिकी सुरक्षित परमाणु प्रतिरोधक तंत्र गृह सुरक्षा में रणनीतिक खतरों के खिलाफ सुरक्षा सुनिश्चित करता है। हालांकि, रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान विभिन्न प्रकार की नवीन, उन्नत या पारंपरिक मिसाइल डिलीवरी प्रणालियों का विकास कर रहे हैं, जिनमें परमाणु और पारंपरिक हथियार शामिल हैं, जो अमेरिका को निशाना बना सकते हैं।
उन्होंने कहा, “इंटेलिजेंस कम्युनिटी का आकलन है कि 2035 तक अमेरिका पर खतरे 16 हजार से अधिक मिसाइलों तक बढ़ जाएंगे, जबकि वर्तमान में इसका आंकड़ा तीन हजार से अधिक है।”
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और तालिबान के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं, और समय-समय पर सीमा पार झड़पें होती रही हैं। इस दौरान इस्लामाबाद अफगानिस्तान में मौजूद आतंकवादी समूहों से परेशान है और आतंकवादी हिंसा बढ़ रही है।
26 फरवरी को अफगान तालिबान ने पाकिस्तान की सीमा पर अपने सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनका दावा उन्होंने पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में किया। पाकिस्तान ने कुछ ही घंटों में अफगान सीमा प्रांतों और राजधानी काबुल को बमबारी कर जवाब दिया। यह पहला मौका था जब पाकिस्तान ने अफगान शहरों पर हवाई हमला किया। लड़ाई तब से जारी है।
रिपोर्ट में कहा गया, “पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने इस महीने चेतावनी दी कि स्थायी शांति के लिए तालिबान को उन आतंकवादियों से संबंध तोड़ने होंगे जो पाकिस्तान को निशाना बना रहे हैं। तालिबान का सार्वजनिक रुख संवाद का है, लेकिन उसने यह नहीं माना कि वह पाकिस्तान विरोधी आतंकवादियों को पनाह दे रहा है।”
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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